यह कहानी काबुलीवाला और 5 साल की छोटी बच्ची मिनी के बीच के अनोखे रिश्ते की कहानी है काबुलीवाला मिनी को प्रतिदिन बादाम और किशमिश दिया करता और ढेर सारी बातें करता किंतु एक प्रसंग के तहत काबुली वाले को जेल हो जाती है और जब वह वापस आता है तो उस समय मिनी बड़ी हो चुकी होती है क्या था उनके बीच का अनोखा रिश्ता जाने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ टैगोर की लिखी कहानी काबुलीवाला अमित तिवारी जी की आवाज में
पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
हरसुंदरी ने मां न बन पाने के कारण अपने पति निवारण का विवाह शेलबाला नाम की किशोरी से तो कर दिया पर उसे क्या पता था कि इसके बाद उसका जीवन इतनी मुश्किलों से भर जाएगा।
A kabuliwala, an merchant from Kabul used to sell the dry fruits in a village. He developed a fatherly relationship with a little girl and used to provide nuts and resins free of cost. That’s the way he was trying to remember his own little daughter. One day he went to jail for stabbing a villager. After returning from jail he figured out the fact that time flew by then and the little girl is not little anymore. He felt lost and depressed thinking that he will have the same experience with his own little daughter and it would be hard to connect with her following the same reason.
नवीन का कंचन से प्रेम करना किंतु कह ना पाना इस कहानी को प्रेम के शिखर पर ले जाता है।
कादम्बिनी में प्राण तब वापस आए जब उसे जलाने के लिए शमशान में रखकर, लोग लकड़ी लेने चले गए। अपने आस पास किसी को ना पाकर कादंबनी को लगा कि वह मर चुकी है और जीवन तथा मृत्यु के बीच लटक रही है, उसकी इसी जीवन और मृत्यु के बीच की यात्रा की कहानी।
जेरिन नाम के एक अनजान लड़के का अचानक स्कूल के अध्यापक के पास मदद मांगने के लिए फोन आता है ,कि वह सीडी चुराने के आरोप में सिक्योरिटी वालों की गिरफ्त में है |अध्यापक उसकी मदद के लिए वहां पहुंचता है ,किंतु जब उसे सच्चाई का पता लगता है तो वह बहुत हताश होता है |क्या थी उसकी सच्चाई और अध्यापक क्यों हताश हुआ ??पूरी कहानी जाने के लिए अमित तिवारी जी की आवाज में सुनते हैं कृष्ण बिहारी जी द्वारा लिखी गई कहानी जब तवक्को ही उठ गई गालिब……
सोचने का समय नहीं था। लड़की ने बस क्षणांश के लिए सोचा और कब्रिस्तान में घुस गई। आदमी भी दौड़ता हुआ कब्रिस्तान के गेट में प्रवेश कर गया। लड़की एक कब्र के पीछे सिमटी हुई थी। आदमी कब्र के दूसरी ओर खड़ा था। पानी बरसना कम हो गया था। लड़की का भूतों और कब्रोंवाला डर भी कम हो गया था। 14 वर्ष की एक लड़की जो स्वभाव से बहुत डरपोक होती है एक प्रसंग के तहत उसे अपने बीमार पिता के लिए अकेले सुनसान कब्रिस्तान वाले रास्ते से गुजर कर वैद्य को लाने के अकेले जाना पड़ता है | इसी बीच के साथ ऐसा हादसा घटता है जिसके कारण मैं वह अपने डर पर विजय प्राप्त करती हैं पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं कहानी विमल चंद्र पांडे द्वारा लिखी गई कहानी
वृद्धावस्था में सुख-दु:ख की भावना परिवर्तित हो जाती है। तरुणावस्था में आडम्बर अथवा प्रदर्शन की जो चाह रहती है वह वृद्धावस्था में नहीं रह जाती| इसी प्रकार न क्षणिक सुखों से वृद्धों को उल्लास होता है और न क्षणिक दु:खों से विषाद। न तो कोई सफलता उन्हें उत्तेजित करती है और न कोई असफलता हताश। संसार की कठोरता और कर्तव्य की गुरुता से परिचित हो जाने से उनमें विश्वास के स्थान में अविश्वास आ जाता है। वे संयत हो कर भी संशयालु हो जाते हैं। इसी से वे तरुणावस्था के मोह में पड़ना नहीं चाहते।
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बलिया के रहने वाले राधेश्याम की एक नौटंकी मंडली है, उसका सपना है कि वह एक भोजपुरी फिल्म बनाएं और उसमें अपनी मंडली के सभी सदस्यों को मुख्य किरदार के रूप में रखें| क्या उसका सपना सच हो पाता है ?? जानने के लिए सुनते हैं कहानी एक भोजपुरी भोजपुरी फिल्म की हिट स्टोरी
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शिकागो शहर में ग़रीब एंटोनी चौकीदारी का काम करता है रात के करीब 11:30 बजे एक कार से 3आदमी कार से उतरते हुए देखता है |उनमें से दो आदमी तीसरे आदमी का मर्डर कर देते हैं | एंटोनी यह सब देख लेता है और अंत में अपने एक डिटेक्टिव दोस्त एंथनी को सब बताता है | रोमांच और सस्पेंस से भरी कहानी शिकागो की एक रात में जा जान सकेंगे इसके पीछे की इस उलझी पहेली को
हम सब लोग ऐसी मिट्टी के बने हैं जिसे किसी बाहरी शक्ति की जरूरत नहीं है बनने-बिग़डने के लिए। यह ऐसी मिट्टी है जो अपने आप बहती है और अपने आप ही कठोर और ज़ड भी हो जाती है। जहाँ ज़ड हो गई है वहाँ कोई अहसास नहीं, वेदना नहीं, टीस नहीं और जहाँ बह रही है, गल रही है वहाँ भरपूर गुँजाइश है तर्क की, कुतर्क की, संवेदना की, खुशी की और दर्द की। लेकिन इसी मिट्टी से बनी दुनिया में जब चारों और से सवाल उठने लगें, भयंकर सवाल, तंग करने वाले, शोषित करने वाले, दमन करने वाले सवाल …. तो इसी मिट्टी से पनपने लगती हैं उलझनें और उलझनें … पुष्पेंद्र को अक्सर एक अजीब सा एहसास सताया करता था जैसे कोई मकड़ी का जाला उसके शरीर से चिपक गया हो जबकि वह पूरी तरह से स्वस्थ था | उसे और भी कई लोग मिले जिनके साथ कुछ अजीबोगरीब एहसास से ग्रसित थे |अंत में पुष्पेंद्र इन एहसासों को किस प्रकार समझा और किस निष्कर्ष पर पहुंचा ???जाने के लिए सुनते हैं कहानी उलझने………
कहानी में दो जिगरी दोस्त मक्खन और प्रवीण एक दूसरे से काफी समय के बाद मिलते हैं | प्रवीर ,मक्खन से उसकी निजी जिंदगी में उसकी पत्नी लाली के बारे में जानना चाह रहा है |मक्खन ,प्रवीर को क्या बतलाता है? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कमलेश भट्ट के द्वारा लिखी गई कहानी, चिट्ठी आई है “”,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में …
हीराबाई को नवाब साहब से बेगम के कनफूल नही चाहिए थे नज़राने के तौर पे। उसने एक छोटा सा नज़राना माँगा… नवाब साहब खुशी खुशी तैयार भी हो गए वो नज़राना देने को….. ….पर हीराबाई ने ऐसा क्या माँग लिया, जिस फ़रमाइश को सुनकर नवाब साहब के पैरों तलें ज़मीन खिस
कहानी दो शराबी भाइयों की है जो शराब और अपनी दौलत के नशे में दिन रात मदमस्त रहते हैं मुफ्त की शराब पीने वाले चापलूस उनके ख्याल ना में सुनते और शराब के मजे लेते किंतु इनकी करतूतों से एक दिन एक अप्रिय घटना घट जाती है क्या है वह घटना पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं चंदन पांडे द्वारा लिखी गई कहानी समय के दो भाई अमित तिवारी जी की आवाज में
धुंए के छल्ले – Arvind saxena – Priya bhatia
जो तूने_दिया उसे हम याद करेंगे, हर पल तेरे मिलने की #फ़रियाद करेंगे, चले_आना जब कभी ख्याल आये मेरा, हम रोज़ खुदा से पहले “तुझे” याद करेंगे।
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