बड़े-बूढ़े कुछ झूठ नहीं कह गए हैं कि परदेश जाए तो ऐसे चौकन्ने रहें, जैसे बुढ़ापें में ब्याह करने वाला अपनी जवान जोरू से रहता है। हम चौकन्नेपन क्या, दसकन्नेपन की सिफारिश करते हैं, वरना ईश्वर न करे किसी पर ऐसे बीते, जैसी परदेश में हम पर बीती, यानी हम साढ़े पांच हाथ के जीते-जागते मौजूद रहे और परदेश ने हमारे मुंह पर कानूनी तमाचा मारकर कुछ देर के लिए यह साबित कर दिया कि हम फौत शुद यानी मर गए।कहानी का पात्र जो परदेश में है वहां उसके साथ क्या घटना घटती है पूरा वृतांत जानने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर जी के द्वारा लिखी गई कहानी जब बात बनाए ना बनी,अमित तिवारी जी की आवाज में
इस दुराचारी ने अपने स्वार्थ के लिए न मालूम कितनी बालाओं का जीवन नष्ट कराया है उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया है। जिस आदरणीय दृष्टि से इस नीच समाज में देखा जाता है वास्तव में यह नीच उसके योग्य नहीं, वरन यह नर पशु है, लोलुपी है, लम्पट है। सिंह की खाल ओढ़े हुए तुच्छ गीदड़ है-रंगा सियार है। मुक्ता पंडित जी से संगीत की शिक्षा ले रही है किंतु पंडित जी दलाली जैसा घिनौना कृत्य करते हैं मुक्ता को भी इसी प्रयोजन का हिस्सा बनाने के आशय से मुक्ता की मुलाकात मणिधर से करवाते हैं मुक्ता जब गर्भ से हो जाती है तो समाज सारा दोष मुक्ता पर मढ़ देता है किंतु क्या पंडित जी और मणिधर को अपने कृत्य पर कोई अफसोस होता है और क्या वे प्रायश्चित करते हैं जानने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर द्वारा लिखी गई कहानी प्रायश्चित सुमन वैद्य की आवाज में
एक दिन जमीलन की लड़की शकीला, दो घण्टे में अपनी मौसी के यहाँ से लौट आने की बात कह, किसी के साथ कहीं चल दी। इस पर घर में चख-चख और तोबा-तोबा मचा, उसे देखने में लोगों को बड़ा मजा आया। दिन-भर बाजार के मनचले दुकानदारों की जबान पर शकीला की ही चर्चा रही और, तीसरे दिन सबेरे, आश्चर्य-सी वह लौट भी आई।अमृतलाल नागर द्वारा लिखी गई कहानी शकीला की माँ,सुमन वैद्य की आवाज में
पचासी – छियासी साल के लखनऊ के हाजी मियां बुलाकी अपने पुत्र- पुत्री की मृत्यु के पश्चात हौसला नहीं छोड़ते और इस उम्र में भी परिवार के सभी लोगों के साथ – साथ, अन्य लोगों का भी ध्यान रखते हैं | जानते हैं यह सब कैसे संभव हो पाता है | कहानी हाजी कुल्फी वाला में…….
जीवनलाल मामूली ईंटों के भट्टे पर क्लर्क से आज खुद अपने भट्टे के मालिक के साथ-साथ बड़ी-बड़ी इमारतों के ठेकेदार भी है शंभू नाथ की बीवी जीवन लाल के चुंबकीय व्यक्तित्व से अपने को बचा नहीं पाई जीवन लाल की शादी लीला से हुई उस समय तक जीवन लाल स्त्रीे के चरित्र पर विश्वाीस ही न कर पाते और अपनी पत्नीस के सतीत्वा की परीक्षा लेने का स्वभाव बन गया है जिस कारण लीला उन से तंग आ चुकी है क्या उनका यह स्वभाव उनके वैवाहिक जीवन में मतभेद पैदा करेगा लीला किस प्रकार इस बात से जीवन लाल को सबक सिखाएगी
56 वर्षीय विधुर एक 18 वर्षीय युवती रीता से विवाह कर लेते हैं किंतु रीता कभी भी उन्हें अपना पति के रूप में स्वीकार नहीं कर पाती है बल्कि उनके पुत्र रमेश को अपना पति स्वीकार करती है अब यह स्थिति धर्म संकट में डालती है ऐसी स्थिति में समाज इस बात को स्वीकृति देगा कि नहीं पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर की लिखी कहानी धर्म संकट सुमन की आवाज में सुमन वैद्य जी की आवाज में
कहानी में नायक को किसी कार्य के लिए कुछ रुपए दिए जाते हैं, जिसे नायक को दूसरे तक पहुंचाने होते हैं किंतु नायक पैसे ना पहुंचा कर अपनी बीमार मां और अपनी बहन शशि से मिलने अपने घर चला जाता है घर जाने पर मां की असमय मृत्यु हो जाती है और बहन अपने भाई के जीवन में किसी प्रकार की बाधा ना पड़े यह विचार कर अपने प्राण त्याग देती है| नायक द्वारा समय से पैसा ना पहुंचाने के कारण उस पर विश्वासघात का आरोप लगाया जाता है| क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी क्षमा ,जिसे आवाज दी है अमित तिवारी जी …
द्रौपदी जब अपना शील खो रही थी , तब आप कहां थे कृष्ण ??? कृष्ण और उद्धव जी के बीच में चल रहे संवाद को उस संदर्भ मे उस प्रसंग को प्रेषित करता है जब धर्मराज युधिष्ठिर, दुर्योधन से द्युत क्रीडा में पराजित हो गए थे | भगवान श्री कृष्ण उसी संदर्भ में उद्धव को स्पष्टीकरण देते हैं | सुनते हैं इस संवाद को अमित तिवारी जी की आवाज में……
आसिफ़ अहमद की फ़र्श से अर्श तक की कहानी, बचपन से आर्थिक तंगी से गुज़रने वाले आसिफ़ अहमद का बड़ा बनने का जुनून ,उनका आत्मविश्वास और अपने सपनों की डोर को हमेशा थामें रखने का हुनर उन्हें एक मामूली से बिरयानी का ठेला लगाने वाले शख़्स से आज 70 करोड़ टर्न ओवर के मालिक होने की पहचान दिला रहा है। यह सब कैसे हुआ? आसिफ़ अहमद की आम आदमी से ख़ास आदमी बनने की क्या रही कहानी ?इसे जानते हैं अमित तिवारी के द्वारा
“यह समाज है मेरी जान… वह समाज जिसके आगे राम विवश नजर आए … जिसने ईशा को सलीब दी… जिसने बुद्ध को विक्षिप्त होने का तमगा दिया …” समाज के इस रूप को जोड़ती कहानी जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति और उसकी विधवा बहू के बीच के स्नेह संबंध को bhi समाज गलत नजरों से देखता है……
एक भावपूर्ण खत एक पुत्र का अपने पिता के लिए इंसान कितना भी बड़ा क्यों ना हो जाए जो इसने हैं जो स्नेह उसे अपने माता-पिता से प्राप्त होता है दुनिया में किसी और से प्राप्त नहीं हो सकता इसी अहसास को प्रेरित करता हुआ यह पत्र जानने के लिए सुनते हैं आकांक्षा पारे द्वारा लिखी गई कहानी डियर पापा अमित तिवारी जी की आवाज में
द्रौपदी जब अपना शील खो रही थी , तब आप कहां थे कृष्ण ??? कृष्ण और उद्धव जी के बीच में चल रहे संवाद को उस संदर्भ मे उस प्रसंग को प्रेषित करता है जब धर्मराज युधिष्ठिर, दुर्योधन से द्युत क्रीडा में पराजित हो गए थे | भगवान श्री कृष्ण उसी संदर्भ में उद्धव को स्पष्टीकरण देते हैं | सुनते हैं इस संवाद को अमित तिवारी जी की आवाज में……
अच्छे पलों को किसी की नजर लग जाना आम बात है और अगर वही पल हम किसी के साथ बिताएं तो ये डर और बढ़ जाता है। तो ऐसे ही भावों को दर्शा रही है ये कविता।
जिस अवकाश के समय को लोग आमोद प्रमोद के लिए सुरक्षित रखते हैं उसी को मैं इस खंडहर और उसके क्षत-विक्षत चरणों पर पछाड़े खाती हुई भागीरथी के तट पर सुख से काट देती हूँ। कब और कैसे मुझे उन बालकों को कुछ सिखाने का ध्यान आया मैं नहीं जानती। मेरे विद्यार्थी पीपल की छाया में मेरे चारों ओर एकत्र हो गए। वह गोधूलि मुझे अब तक ना भूली जब एक मलिन स्त्री ने मुझे कुछ शब्दों और कुछ संकेतों से कहा कि उसके अकेले लड़के को भी और बच्चों के साथ बैठने दिया करूँ। तो यह कुछ तो सीख सकें । वह घीसा था जिसकी सचेत आँखों में ना जाने कौन सी जिज्ञासा भरी थी । जब उन लोगों को मुझे छोड़ जाना था तब मेरा मन बहुत ही अधीर हो उठा। मैं घीसा को ढूँढ रही थी । हार कर मैं चली किंतु अंधेरे में एक काला धब्बा आता दिखा। वह घीसा था। उसके दोनों हाथों में एक बड़ा तरबूज था ।घीसा के पास न पैसा था ना खेत। तब क्या वह इसे चुरा लाया है? मन का संदेह बाहर आया। तब पता चला कि घीसा आज नया कुर्ता दे आया और उसके बदले में मेरे लिए तरबूज लाया है। किंतु चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि गर्मी में वह कुर्ता पहनता ही नहीं।
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pragati sharma