एक सज्जन ने देखा की यहाँ आनेवालों को समय के ज्ञान के बिना बड़ा कष्टे होता है। अतएव उस पुण्यात्मा ने बड़े व्यय से एक घंटाघर उस नए बने मकान के ऊपर लगवा दिया। रात के अंधकार में उसका प्रकाश, और सुनसानी में उसका मधुर स्वर क्या पास के और क्या दूर के, सबके चित्त को सुखी करता था। वास्तव में ठीक समय पर उठा देने और सुला देने के लिए, एकांत में पापियों को डराने और साधुओं को आश्वा सन करने के लिए वह काम देने लगा। एक सेठ ने इस घंटे की (हाथ) (सूइयाँ) सोने की बनवा दीं और दूसरे ने रोज उसकी आरती उतारने का प्रबंध कर दिया। पूजा पाठ और कल कांडों को जोड़ती कहानी हे घंटाघर
मृत्यु के कुछ समय पहले स्मृति बहुत साफ़ हो जाती है। जन्मभर की घटनाएँ एक-एक करके सामने आती हैं। सारे दृश्यो के रंग साफ़ होते है, समय की धुन्ध बिल्कुल उन पर से हट जाती है। लहनासिंह बारह वर्ष का है। अमृतसर मे मामा के यहाँ आया हुआ है। दहीवाले के यहाँ, सब्जीवाले के यहाँ, हर कहीं उसे आठ साल की लड़की मिल जाती है। जब वह पूछता है कि तेरी कुड़माई हो गई? तब वह धत् कहकर भाग जाती है। एक दिन उसने वैसे ही पूछा तो उसने कहा–हाँ, कल हो गयी, देखते नही, यह रेशम के फूलों वाला सालू? यह सुनते ही लहनासिंह को दुःख हुआ। क्रोध हुआ । क्यों हुआ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं चंद्रधर गुलेरी द्वारा लिखी गई कहानी उसने कहा था, अमित तिवारी की आवाज में….
कहानी के नायक ने बचपन से गरीबी देखी है उसने अपनी मां को दूसरे घरों में काम औरगरीबी से संघर्ष करते हुए देखा है जवान होते -होते अमीर बनने की चाहत में वह गलत कार्य करने लगता है जब मां को इस बात का पता लगता है तो वे उसका त्याग कर देती है किंतु कहानी के अंत में नायक को इस बात का एहसास होता है कि उसकी मां उसके लिए क्या है जुनैद की लिखी कहानी मां भारती मां के प्यार और त्याग की कहानी है ,अमित तिवारी जी की आवाज
आसिफ़ अहमद की फ़र्श से अर्श तक की कहानी, बचपन से आर्थिक तंगी से गुज़रने वाले आसिफ़ अहमद का बड़ा बनने का जुनून ,उनका आत्मविश्वास और अपने सपनों की डोर को हमेशा थामें रखने का हुनर उन्हें एक मामूली से बिरयानी का ठेला लगाने वाले शख़्स से आज 70 करोड़ टर्न ओवर के मालिक होने की पहचान दिला रहा है। यह सब कैसे हुआ? आसिफ़ अहमद की आम आदमी से ख़ास आदमी बनने की क्या रही कहानी ?इसे जानते हैं अमित तिवारी के द्वारा
कहानी में मनसुख कवि बनना चाहता है किंतु कविता लिखने का उसे कोई अभ्यास नहीं है वह अपने गुरु से कविता लिखने के गुण सीखता है उसे भाव विहीन शब्दों से उसके द्वारा लिखी गई कविता को पुरस्कार भी प्राप्त हो जाता है इसी बात पर व्यंग करते हुए पल्लवी त्रिवेदी जी की एक कहानी मनसुख कवि कैसे बने अमित तिवारी जी की आवाज में
चिरौटे ने गहरी साँस भरी। चिरैया को देखा और तनकर बोला – मैं अब इसी घर में घोंसला बनाऊँगा, देखता हूँ कब तक नोंचता है यह जल्लाद बात-बात पर गुस्सा करने वाले एक व्यक्ति के घर में चिरौटा और चिरैया घोंसला बनाते हैं आदमी और चिरोटे के बीच इस प्रकार एक जंग छिड़ जाती है हरि भटनागर के द्वारा लिखी गई कहानी जंग में इसका वर्णन सुनते हैं
कामता प्रसाद जी के द्वारा लिखी गई कहानी मकान जिसमें शंकर कई वर्षों के बाद अपने उस मकान में आता है जहां उसने 30 -32 साल गुजारे हैं उसकी बहुत सारी यादें उस मकान से जुड़ी हुई है अब उस मकान की अवस्था जर्जर सी हो रही है शंकर की मकान को लेकर क्या योजना है कौन-कौन सी यादें उसके साथ जुड़ी हुई है और अंत में अपने मकान को लेकर क्या निर्णय लेता है जाgने के लिए सुनते हैं तिवारी जी की आवाज में कहानी मकान
शाहनी एक बड़ी उम्र की महिला है | शाह जी के ना रहने के बाद शाहनी उनकी ऊंची हवेली और जायदाद होने के बावजूद बिल्कुल अकेली है| शेरा शाहनी के पास ही पलकर बड़ा हुआ है| आज शाहनी ने जो शाह जी के मरने के बाद उनकी अमानत को संभाल के रखा था वह वह क्यों उनसे छीना जा रहा है? उसे कौन धोखा दे रहा है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कृष्णा सोबती के द्वारा लिखी गई कहानी सिक्का बदल गया ,अंजू जेटली की आवाज में…
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यह मधुर गीत उस स्थिति को दर्शाता है ,जब हम नए-नए प्रेम में पड़ते हैं | हमारा तन – मन हमारे काबू में नहीं होता | भावना तिवारी जी की मधुर आवाज में….
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अमेरिका में रह रहा आशु आज अंग्रेजी संस्कार से लिप्त अपनी बेटी का विचलित कर देने वाला व्यवहार देखता है उसे भी अपने बीते दिनों की याद आ जाती है आज आशु इतना विचलित क्यों है उसका बीता हुआ पल उसे याद क्यों आ रहा है क्या है आशु की मनोस्थिति पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं जुनैद की भावपूर्ण कहानी कम बैक अमित तिवारी जी की आवाज में
कहानी विदेश में रह रहे एक भारतीय परिवार की है ।जहां उन्हीं के बेटे का शादी का कार्ड आज उनके पास आया है ।कार्ड में मां -बाप का नाम भी नहीं है विदेशी संस्कृति से प्रभावित बेटे में भारतीय संस्कृति और संस्कार की छाप कहीं भी नज़र नहीं आ रही है ।ऐसा क्यों हुआ? क्या यह पीढ़ी का अंतर है या फिर देशांतर लेकिन आज जिस बात के लिए मां-बाप अपने बेटे के लिए अफ़सोस कर रहे हैं, क्या वह स्वयं इस बात के लिए जिम्मेदार हैं ?इस प्रश्न को समेटे हुए कहानी किस मोड़ पर रूकती है सुनते हैं सुदर्शन प्रियदर्शिनी की लिखी कहानी देशांतर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में..
बद्री प्रसाद अपनी सरकारी नौकरी के कारण मुंबई में रहते हैं जबकि उनकी पत्नी उमा अपने दोनों बच्चों के साथ एक अलग शहर में है उमा एक अध्यापिका है बद्री प्रसाद चाहते हैं अपनी नौकरी छोड़कर उनके साथ मुंबई में रहे किंतु उमा अपनी नौकरी छोड़ना नहीं चाहती है बद्री प्रसाद इन परिस्थितियों में क्या निर्णय लेते हैं जाने के लिए सुनते हैं कहानी फैसले
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