सुबल और सुशील नामक पिता और पुत्र की ऐसी कहानी जिसमे इच्छा पूरी करने वाली देवी उन्हें अदला बदली का वरदान देकर उनकी इच्छा पूरी करती हैं लेकिन इस वरदान से तंग आकर वे पुनः देवी से उन्हें पहले जैसा कर देने की प्रार्थना करते हैं।
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
एक विज्ञान के विद्यार्थी को उसके अध्यापक के द्वारा एक मानव कंकाल, शरीर विज्ञान के अध्ययन हेतु दिया जाता है, किंतु एक रात उस मानव कंकाल की आत्मा उसे अपनी मौत के पीछे की कहानी सुनाती है| क्या है वह कहानी ? इस रोचक कहानी को सुनने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में, रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी “पिंजर”…
यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो अपनी महत्वकांक्षाओ के चलते अपने बचपन की सहचरी सुरबाला से विवाह के लिए इंकार कर देता है और जब जीवन के यथार्थ पर उतरकर देखता है तो उसे एहसास होता है कि उसने सिर्फ सुरबाला ही नहीं बल्कि सब कुछ खो दिया।
सुभाषिनी नाम की ऐसी लड़की की कहानी जो बोल नहीं सकती, इसलिए उसकी मित्रता भी मूक प्राणियों से अधिक है जिसे बोलने वाले समाज से हमेशा निरादर ही प्राप्त हुआ।
The story shows how after giving a shelter to a distressed lady a distinguished man in that village was cornered and became the victim of politics which bound him to lose the legal case which led him to lose his property.
एक बार एक ज्योतिषी अपनी विद्या का बखान बढ़-चढ़कर अपने दोस्त से कर रहा था| विक्रमादित्य ने उस ज्योतिषी की बात को सुन लिया और उसकी विद्वता की जाँच के लिए उन्होंने क्या किया ?इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी बीसवीं पुतली ज्ञानवती राजा विक्रमादित्य तथा ज्ञानियों की कद्र, शिवानी आनंद की आवाज में
काचू एक बेहद भला और ईमानदार व्यक्ति है। वो कभी किसी का बुरा या किसी के साथ गलत नही कर सकता, इसलिए अपनी टोपी चोर द्वारा ली जाने पर जब वह चुपके से उसे वापस ले लेता है तो अपराध बोध से ग्रसित हो खुद ही जेल चला जाता है और वहां इंस्पेक्टर से कहता है कि उसे सजा दी जाए।
दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें जिंदगी अपनी शर्तों पर जीने की आदत होती है। वह किसी की परवाह नहीं करते। लोग क्या कहेंगे ? क्या सोचेंगे? अगर किसी को बुरा लगा तो ? वगैरह -वगैरह जैसे प्रश्नों के बारे में तो सोचते ही नहीं। लाख मुश्किलें आएँ, वह अपने तरीके से उसका सामना करते हैं। ऐसे लोगों को दुनिया की परवाह नहीं होती। लेकिन कुछ तो होता है, जो उनकी शख्सियत को भी हिला देता है। लेकिन क्या?
“तुम फौजी बड़े बेवफा होते हो शादी करोगे ,फिर कल फर्ज के नाम पर शहीद कहलाओगे | तुम्हारे पीछे मैं विधवा ……” कहानी में आकाश एक नेवी कमांडर है और एक भूमि नाम की लड़की से बहुत प्यार करता है | भूमि भी उससे बेतहाशा प्यार करती है |किंतु जब आकाश ,भूमि के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है तो उसे वह अस्वीकार कर देती है | पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं ऋषभ आदर्श के द्वारा लिखी गई कहानी “विधवा “,अमित तिवारी जी की आवाज में….
जीवनलाल मामूली ईंटों के भट्टे पर क्लर्क से आज खुद अपने भट्टे के मालिक के साथ-साथ बड़ी-बड़ी इमारतों के ठेकेदार भी है शंभू नाथ की बीवी जीवन लाल के चुंबकीय व्यक्तित्व से अपने को बचा नहीं पाई जीवन लाल की शादी लीला से हुई उस समय तक जीवन लाल स्त्रीे के चरित्र पर विश्वाीस ही न कर पाते और अपनी पत्नीस के सतीत्वा की परीक्षा लेने का स्वभाव बन गया है जिस कारण लीला उन से तंग आ चुकी है क्या उनका यह स्वभाव उनके वैवाहिक जीवन में मतभेद पैदा करेगा लीला किस प्रकार इस बात से जीवन लाल को सबक सिखाएगी
अम्मा जब आगरा जाने लगी तो हफ्ता भर के लिए उन्होंने मुझे बेगम जान के पास छोड़ दिया। नवाब साहब , बेगम जान से शादी करके कुल साज़-ओ- सामान के साथ ही घर में रखकर भूल गए ।बेगम जी जान छोड़ कर बिल्कुल ही यासो हसरत की पोट ही बन गई। रब्बो ने उन्हें नीचे गिरते- गिरते संभाल लिया साथ खाती, साथ उठती -बैठती और माशाअल्लाह! साथ ही सोती थी। रब्बो और बेगम जान आम जलसों और मज़मूओ की दिलचस्प गुफ्तगू का मौजूँ थी। जहाँ उन दोनों का जिक्र आया और कहकहे उठे। लोग जाने क्या-क्या चुटकुले गरीब पर उड़ाते।
एक साधारण-सी बस यात्रा में
युवा संदीप और प्रतीक्षा की अनायास मुलाकात होती है।
संदीप रोज़ की तरह ऑफिस जा रहा है,
और प्रतीक्षा भी अपने काम के सिलसिले में
उसी ऑफिस की ओर निकली है।
बस की भीड़, रास्ते की हलचल और
कुछ अनकहे क्षणों के बीच
जब दोनों के बीच बातचीत शुरू होती है, तो यह मुलाकात केवल संयोग नहीं रह जाती।
बातों-बातों में दोनों को यह एहसास होने लगता है कि उनके जीवन की राहें, संघर्ष, ख़ामोशियाँ और सपने कहीं न कहीं एक-दूसरे से मिलते हैं। क्या है संदीप और प्रतीक्षा के जीवन की वह समानता जो दो अजनबियों को एक पल में अपना-सा बना देती है? क्या यह सिर्फ़ इत्तेफ़ाक़ है या जीवन का कोई गहरा संकेत?
इन्हीं सवालों, भावनाओं और मानवीय संवेदनाओं से बुनी संजय विद्रोही की भाव-विभोर कर देने वाली कहानी “हम एक से”
सुनिए पूजा श्रीवास्तव की आत्मीय आवाज़ में—
केवल Gaatha पर।
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