यतीन की मुलाकात चुनिया से उसकी चचेरी बहन पटल के घर पर होती है। अपने मजाकिया स्वभाव के चलते पटल दोनों को खूब छेड़ती है जिससे तंग आकर यतीन तो अपने घर चला आता है पर चुनिया उसका जाना सहन नहीं कर पाती और घर छोड़ कर चली जाती है। काफी समय बाद वह यतीन को फिर मिलती है हमेशा के लिए चले जाने के लिए।
यतीन की मुलाकात चुनिया से उसकी चचेरी बहन पटल के घर पर होती है। अपने मजाकिया स्वभाव के चलते पटल दोनों को खूब छेड़ती है जिससे तंग आकर यतीन तो अपने घर चला आता है पर चुनिया उसका जाना सहन नहीं कर पाती और घर छोड़ कर चली जाती है। काफी समय बाद वह यतीन को फिर मिलती है हमेशा के लिए चले जाने के लिए।
यतीन की मुलाकात चुनिया से उसकी चचेरी बहन पटल के घर पर होती है। अपने मजाकिया स्वभाव के चलते पटल दोनों को खूब छेड़ती है जिससे तंग आकर यतीन तो अपने घर चला आता है पर चुनिया उसका जाना सहन नहीं कर पाती और घर छोड़ कर चली जाती है। काफी समय बाद वह यतीन को फिर मिलती है हमेशा के लिए चले जाने के लिए।
सुभाषिनी नाम की ऐसी लड़की की कहानी जो बोल नहीं सकती, इसलिए उसकी मित्रता भी मूक प्राणियों से अधिक है जिसे बोलने वाले समाज से हमेशा निरादर ही प्राप्त हुआ।
दो भाईयों की ऐसी कहानी जो अपनी पत्नियों के रोज़ रोज़ के झगड़े से आहत हैं। एक दिन खाना मांगने पर न मिलने से क्रुद्ध हो एक भाई अपनी पत्नी के सर पर प्रहार करता है जिससे कि उसकी मृत्यु हो जाती है लेकिन दूसरा भाई सबके सामने बताता है कि खून भाई ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी ने किया है क्योंकि उसका मानना है कि पत्नी तो उसे और मिल जाएगी लेकिन भाई तो दूसरा नहीं मिल सकता।
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तबतक जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें बंधकर हर लड़की को अपने प्रियजनों से विदा लेनी पड़ती है। हेम भी इसी बंधन में बंध कर अपने पिता से दूर अपने ससुराल चली आई थी किंतु तब ये किसने जाना था कि यह विदा एक दिन अनंत कालीन विदा बन जाएगी।
हस्तिनापुर के महाराज शांतनु ने गंगा से विवाह किया |गंगा का आठवां पुत्र देवव्रत (भीष्म )के रूप में जाने गए| आगे चलकर देवव्रत भीष्म ने क्या अखंड प्रतिज्ञा ली? जो भीष्म प्रतिज्ञा’’ के रूप में सदैव प्रख्यात रही है| इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी भीष्म जन्म तथा अखंड प्रतिज्ञा, शिवानी आनंद की आवाज में…
कहानी में लेखक और उसका दोस्त विक्रम जैसे -तैसे रुपए की व्यवस्था कर लॉटरी की टिकट खरीदते हैं |दोनों मिलकर खूब सारी पूर्व योजनाएं बनाते हैं क्या उनकी लॉटरी की टिकट निकलेगी? और उनके साथ क्या होगा पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी के द्वारा लिखी गई कहानी लॉटरी सुमन वैद्य जी की आवाज में
प्रेम में होने पर अक्सर प्रेमी युगल अपनी कल्पना में अपनी प्रेमी अथवा प्रेमिका की तस्वीर बनाते हैं इसी भाव को गीत में प्रस्तुत किया गया है सुनिए भावना तिवारी जी की आवाज में प्रोफेसर रामस्वरूप सिंदूर ji के शब्दों में
मंटो की ये कहानी जीवन के कई पहलुओं पर नज़र डालती है , जैसा की हम जानते हैं मंटो ने उन औरतो और गलियों के बारे में बहुत लिखा है , जिन्हे लोगो बाज़ारू कहते हैं, पर इंसान वो भी हैं और एहसास उनके दिलों में भी होते हैं , ये कहानी भी एक ऐसी ही औरत की है , जो जवानी से बुढ़ापे की ओर बढ़ती है तो उसके जीवन में बहुत कुछ बदल जाता है
द्रौपदी ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य की नायिका है |वह केवल दु:शासन ही नहीं वरन् अपने पति को भी प्रश्नों के कटघरे में खड़ा कर स्पष्टीकरण माँगती है। वह भरी सभा में यह सिद्ध कर देती है कि जुए में स्वयं को हारने वाले युधिष्ठिर को मुझे दाँव पर लगाने का कोई अधिकार नहीं है
पति -पत्नी का रिश्ता जो एक दूसरे के साथ पूरा जीवन बिता देते हैं किंतु क्या यह सच्चाई नहीं कि वह एक दूसरे के मन की तालों को जीवन भर नहीं खोल पाते ।एक खूबसूरत विपिन जैन की कहानी अलमारी और कागज का टुकड़ा में इस अहसास को किस तरीके से रखा गया है जानिए विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में…
Reviews for: Seemant part-3 (सीमान्त भाग -3)