जो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था वो अब गरीब होने लगा ,,,और उस देश से बाहर निकल कर गया हुआ इंसान , बाहर के देशो में बहुत खुश होता है ,,,साफ़ सफाई,,,चकाचौंध सब कुछ उसे अच्छा लगता है,,,वो पैसे कमाने में लग जाता है,,,अपने नाम बनाने में लग जाता है, पर वो नाम ही क्या नाम जिसे कोई अपनेपन से पुकार भी न सके , देश से बाहर जाकर अपनी पहचान बना पाना एक गर्व की बात है पर क्या उस पहचान में अपनापन होता है ?
जो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था वो अब गरीब होने लगा और उस देश से बाहर निकल कर गया हुआ इंसान , बाहर के देशो में बहुत खुश होता है |साफ़ सफाई,चकाचौंध सब कुछ उसे अच्छा लगता है|वो पैसे कमाने में लग जाता है,अपने नाम बनाने में लग जाता है, पर वो नाम ही क्या नाम जिसे कोई अपनेपन से पुकार भी न सके ? देश से बाहर जाकर अपनी पहचान बना पाना एक गर्व की बात है पर क्या उस पहचान में अपनापन होता है ?
इंसान की उस संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती यह कहानी जब कभी अपने खून के रिश्ते वास्तव में कोई जिसने गलत काम किया हो और एक ऐसा रिश्ता जो आपके लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देंलेकिन आपका खून का रिश्ता ना हो के बीच में कोई चुनाव करना होता है तो इंसान सहज भाव से अपने खून के रिश्ते का चुनाव कर लेता है और एक पल में ही दूसरे रिश्ते को ठुकरा देता है भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी साग मीट सुमन वैद्य जी की आवाज में
स्टेशन के प्लेटफार्म में 2 औरतें जोर-जोर से लड़ रही है| उन दोनों औरतों का दावा एक छोटे दूध पीते बच्चे की मां होने का है| इस विषम परिस्थिति में जानने के लिए कि कौन उस बच्चे की वास्तविक मा है मां है? उसके पीछे क्या कहानी है? सुनते हैं भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी माता -विमाता ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
ज़िंदगी में बहुत आगे निकल आने पर भी हमें कई बार महसूस होता है कि अतीत हम में आज भी ज़िंदा है| हम उससे कितना ही पीछा छुड़ाने की कोशिश क्यों न कर लें पर वो हमारा पीछा कभी नहीं छोड़ता और रह -रह कर हमारी आँखों के सामने आता रहता है , ऐसे में इंसान क्या करे? कभी अतीत के आगे झुकने का मन करता है तो कभी उससे लड़कर आगे बढ़ने का , इसी कशमकश को बयां करती ये कहानी…
जो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था वो अब गरीब होने लगा और उस देश से बाहर निकल कर गया हुआ इंसान , बाहर के देशो में बहुत खुश होता है |साफ़ सफाई,चकाचौंध सब कुछ उसे अच्छा लगता है|वो पैसे कमाने में लग जाता है,अपने नाम बनाने में लग जाता है, पर वो नाम ही क्या नाम जिसे कोई अपनेपन से पुकार भी न सके ? देश से बाहर जाकर अपनी पहचान बना पाना एक गर्व की बात है पर क्या उस पहचान में अपनापन होता है ?
72 वर्ष के एक वृद्ध की कहानी है जो 20 साल तक अपनी एक जमीन के लिए अदालतों का चक्कर काटता रहता है अब इस उम्र में उसे जमीन मिल भी जाती है किंतु अभी जमीन का कब्जा बाकी होता है वह बेहद कशमकश की स्थिति में है कि अब क्या करें क्या वह वयोवृद्ध जमीन का सुख उठा पाता है क्या होता है उसके साथ पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी मरने से पहले सुमन वैद्य जी की आवाज में
क्या समय बदलने पर आदर्शों की प्रसांगिकता रह जाती है ? जब परिवार आपके आदर्शों का सम्मान ना करे तो और एक रंगकर्मी का जीवन सिर्फ मंच पर ही है या बहार की दुनिया में भी है,बहुत से उलझे हुए सवालों और ज़िंदगी की मुश्किलों को बयान करती कहानी झूमर…क्या समय बदलने पर आदर्शों की प्रसांगिकता रह जाती है ? जब परिवार आपके आदर्शों का सम्मान ना करे तो और एक रंगकर्मी का जीवन सिर्फ मंच पर ही है या बहार की दुनिया में भी है,बहुत से उलझे हुए सवालों और ज़िंदगी की मुश्किलों को बयान करती कहानी झूमर…
ज़िंदगी में बहुत आगे निकल आने पर भी हमें कई बार महसूस होता है कि अतीत हम में आज भी ज़िंदा है| हम उससे कितना ही पीछा छुड़ाने की कोशिश क्यों न कर लें पर वो हमारा पीछा कभी नहीं छोड़ता और रह -रह कर हमारी आँखों के सामने आता रहता है , ऐसे में इंसान क्या करे? कभी अतीत के आगे झुकने का मन करता है तो कभी उससे लड़कर आगे बढ़ने का , इसी कशमकश को बयां करती ये कहानी…
मंटो की ये कहानी जीवन के कई पहलुओं पर नज़र डालती है , जैसा की हम जानते हैं मंटो ने उन औरतो और गलियों के बारे में बहुत लिखा है , जिन्हे लोगो बाज़ारू कहते हैं, पर इंसान वो भी हैं और एहसास उनके दिलों में भी होते हैं , ये कहानी भी एक ऐसी ही औरत की है , जो जवानी से बुढ़ापे की ओर बढ़ती है तो उसके जीवन में बहुत कुछ बदल जाता है
अकल बड़ी या भैंस , ये तो हम कई सालो से और युगो से सुनते आ रहे हैं , पर आज तक इसका सही उतार नहीं मिला,,,एक नजर में तो ऐसा लगता है की अकाल बड़ी है पर दूसरे ही पल कोई कहता है की जिसके पास जिस चीज़ की कमी होगी वो इंसान उसी को चुनेगा ,,ये बात मज़ाकिया लग सकती है , पर सवाल भी कुछ ऐसा ही है ,,,आइये इस कहानी को सुनते हैं ,,और आनंद लेते हैं अकाल और भैंस का
ये कहानी है एक ऐसे इंसान की जो एक जानवर को पाल के रखता है , और समय के साथ वो जानवर बड़ा होता जाता है , उस इंसान के घर में उसकी बीवी भी बहुत कलेश करती है क्युकी उसकी अपने पति से कुछ उमीदें और कुछ शक हैं जिनको वो अधूरा पति है , दूसरी और वो जानवर समय के साथ बड़ा होता जाता है , और वो उस इंसान को खाना चाहता है , फिर एक वक्त ऐसा आता है की उस जानवर जिसे कैद किया गया था इंसान में लड़ाई होती है ,,, कौन था वो जानवर ? और क्या हुआ इस लड़ाई में ? जानने के लिए सुनिए ये कहानी
कहानी एक वृद्ध खिलौने वाले गंगाधर की है| आज गृहत्याग करने की इच्छा से जाने लगता है |तब उसे गृहस्वामी की छोटी बेटी कनक रोक लेना चाहती है |गंगाधर मासूम कनक को अपनी पूरे जीवन गाथा सुनाता है क्या आज गंगाधर उस मासूम के मोह में आकर अपने गृह त्याग का विचार ध्यान देगा त्याग देगा| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी गृहत्याग , सुमन वैद्य की आवाज में
एक स्वयंसेवक को जेल हो जाती है और उसकी पत्नी को यहां तक कि अपने ससुर का भी सहारा नहीं मिलता है |ऐसे में ज्ञानचंदकी पत्नी उसका सहारा बनती है| जानते हैं नारी के निर्भीक ,अलौकिक रूप को प्रेमचंद के द्वारा लिखी गई कहानी अनुभव में भूपेश पांडिया की आवाज में
महादेवी वर्मा को बचपन से ही मिले परिवार के शैक्षिक संस्कारों ने उनके भावी जीवन को एक दिशा देने का काम किया। लेकिन नौ वर्ष की उम्र में उनके विवाह ने उनके जीवन को उपेक्षित और पीड़ा से भर दिया। वे अपनी ससुराल कभी गई ही नहीं।
सयानी बुआ का नाम वास्तव में ही सयानी था या उनके सयानेपन को देखकर लोग उन्हें सयानी कहने लगे थे, । बचपन में ही वे समय की जितनी पाबंद थीं, अपना सामान संभालकर रखने में जितनी पटु थीं, और व्यवस्था की जितना कायल थीं, उसे देखकर चकित हो जाना पडता था| कहानी में सयानी बुआ के चरित्र को और अच्छे से समझने के लिए मनु भंडारी जी के द्वारा लिखी गई कहानी सयानी बुआ सुनते हैं माधवी शंकर जी की आवाज में
ताहदे नज़र एक बयाबान सा क्यू हैं – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
एक औरत जीवन साथी से धोखा खाने के बाद अपनी औलाद से उम्मीदें रखती है । लेकिन वही औलाद जब मुँह मोड़ ले , तो उसके पास जीने के लिए क्या रह जाता है ? रेखा ने हिम्मत नहीं हारी है । उसे उम्मीद है कि शायद एक दिन उसका बेटा ,सक्षम उसके पास लौट आएगा ।
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