जो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था वो अब गरीब होने लगा ,,,और उस देश से बाहर निकल कर गया हुआ इंसान , बाहर के देशो में बहुत खुश होता है ,,,साफ़ सफाई,,,चकाचौंध सब कुछ उसे अच्छा लगता है,,,वो पैसे कमाने में लग जाता है,,,अपने नाम बनाने में लग जाता है, पर वो नाम ही क्या नाम जिसे कोई अपनेपन से पुकार भी न सके , देश से बाहर जाकर अपनी पहचान बना पाना एक गर्व की बात है पर क्या उस पहचान में अपनापन होता है ?
जो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था वो अब गरीब होने लगा और उस देश से बाहर निकल कर गया हुआ इंसान , बाहर के देशो में बहुत खुश होता है |साफ़ सफाई,चकाचौंध सब कुछ उसे अच्छा लगता है|वो पैसे कमाने में लग जाता है,अपने नाम बनाने में लग जाता है, पर वो नाम ही क्या नाम जिसे कोई अपनेपन से पुकार भी न सके ? देश से बाहर जाकर अपनी पहचान बना पाना एक गर्व की बात है पर क्या उस पहचान में अपनापन होता है ?
शामनाथ जी के यहां आज उनके अंग्रेज बॉस चीफ़ की दावत की है| शामनाथ अपनी झूठी शानो शौकत को दिखाने के उद्देश्य से अपनी उस मां की उपेक्षा करते हैं जिसने शामनाथ के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया| भावुक कर देने वाली भीष्म साहनी की द्वारा लिखी गई कहानी चीफ़ की दावत ,सुनते हैं अमित तिवारी की आवाज में
सत्य की खोज में इंसान हमेशा से रहा है और इसे खोजने के लिए कभी उसने धर्म को गहराई से समझने की कोशिश की है | आसान से शब्दों में कहा जाये तो सत्य , धर्म , राजनीति , सामाजिकता और अत्याचार इन सबसे घिरा इंसान सत्य की खोज कैसे करेगा और इन सब का उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
समय बदलने पर आदर्शों की प्रसांगिकता रह जाती है ? जब परिवार आपके आदर्शों का सम्मान ना करे तो और एक रंगकर्मी का जीवन सिर्फ मंच पर ही है या बहार की दुनिया में भी है ,,,बहुत से उलझे हुए सवालों और ज़िंदगी की मुश्किलों को बयान करती ये कहानी ,,ज़रूर सुने ,,, लगेगा जैसे हमारे जैसे ही किसी अपने की कहानी है
72 वर्ष के एक वृद्ध की कहानी है जो 20 साल तक अपनी एक जमीन के लिए अदालतों का चक्कर काटता रहता है अब इस उम्र में उसे जमीन मिल भी जाती है किंतु अभी जमीन का कब्जा बाकी होता है वह बेहद कशमकश की स्थिति में है कि अब क्या करें क्या वह वयोवृद्ध जमीन का सुख उठा पाता है क्या होता है उसके साथ पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी मरने से पहले सुमन वैद्य जी की आवाज में
कहानी में गंगो एक मजदूरिन है है |गर्भ से होने के कारण ठेकेदार उसे काम से निकाल देता है| इधर गंगो का पति घीसू भी एक मजदूर है| घर का खर्चा चलाने के लिए घीसू अपने छोटे बेटे और रीसा को बूट -पॉलिश का काम कराने भेज देता है| किंतु रीसा गलियों में खो जाता है| आगे कहानी में क्या होता है जानने के लिए सुनते भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी गंगो का जाया, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग इगतपुरी महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चमी घाट पर स्थित स्ह्याद्री पर्वतमाला से घिरी यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। प्रकृति ने इस जगह को क्या खूब सजाया-संवारा और खूबसूरती बक्शी है। प्रकति प्रेमियों को यहां एक बार ज़रूर जाना चाहिए
अकल बड़ी या भैंस , ये तो हम कई सालो से और युगो से सुनते आ रहे हैं , पर आज तक इसका सही उतार नहीं मिला,,,एक नजर में तो ऐसा लगता है की अकाल बड़ी है पर दूसरे ही पल कोई कहता है की जिसके पास जिस चीज़ की कमी होगी वो इंसान उसी को चुनेगा ,,ये बात मज़ाकिया लग सकती है , पर सवाल भी कुछ ऐसा ही है ,,,आइये इस कहानी को सुनते हैं ,,और आनंद लेते हैं अकाल और भैंस का
आपने आज तक ऐसे लोगो के बारे में तो सुना ही होगा जो की कही से पैसे उठाते हैं और गरीबो में बांट देते हैं , आप उनको चाहे तो शैतान समझे या फिर देवता ये आपके ऊपर है , कई बार इंसान को ऐसी चीज़ों से लगाव हो जाता है , जो उसके लिए बहुत मायने रखने लगती हैं , और इंसान कई बार उनको खुद से ज़्यादा समझने लगता है , ये कहानी भी एक ऐसे ही इंसान की है , जो कानून की नज़र में गलत होता है उसे सज़ा मिलती है , पर आप खुद ये समझे की क्या वो सच में ग़लत है ?
मनुष्य भौतिकवादी जब बनता चला जाता है ,तो वो रिश्तों को भूलता चला जाता है , या दूसरे शब्दों कहें तो इंसान रिश्तों को पैसे से और ताकत से तोलने लगता है |क्या यह सही होगा कि इंसान की ईमानदारी उसके अमीर या गरीब होने से आकी जाये ?
क्या समय बदलने पर आदर्शों की प्रसांगिकता रह जाती है ? जब परिवार आपके आदर्शों का सम्मान ना करे तो और एक रंगकर्मी का जीवन सिर्फ मंच पर ही है या बहार की दुनिया में भी है,बहुत से उलझे हुए सवालों और ज़िंदगी की मुश्किलों को बयान करती कहानी झूमर…क्या समय बदलने पर आदर्शों की प्रसांगिकता रह जाती है ? जब परिवार आपके आदर्शों का सम्मान ना करे तो और एक रंगकर्मी का जीवन सिर्फ मंच पर ही है या बहार की दुनिया में भी है,बहुत से उलझे हुए सवालों और ज़िंदगी की मुश्किलों को बयान करती कहानी झूमर…
कुसुम जिसे घाट पर बैठकर घंटो पानी की लहरें देखना अच्छा लगता था, अपने वैधव्य के बाद प्रेम में पड़कर उसे न पा सकने के दुख को बर्दाश्त न करते हुए उसी घाट पर उन्ही लहरों में समा गई।
हमारी भारतीय समाज में पति विहीन नारी की हमेशा उपेक्षा की जाती है |हमारी मानसिकता अभी भी नहीं बदली पति कैसा भी हो स्त्री का सुहाग होता है ,किंतु उसके बिना जैसे उस स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं रहता और उसका वजूद महा शून्य में तब्दील हो जाता है इसी संदर्भ में सुनते हैं इस मार्मिक कहानी को महा शून्य को मालती जोशी जी की आवाज में
महादेवी जी के द्वारा लिखी गई कहानी गिल्लू उनकी चर्चित कहानियों में से एक है| कहानी एक गिलहरी (गिल्लू) और लेखिका के बीच के स्नेह की है |गिल्लू किस प्रकार लेखिका को मिला और उन दोनों के बीच में किस प्रकार का स्नेह था ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में कहानी गिल्लू
आपको चित्तौर का सिंहासन सुखद हो, देश की श्री-वृद्धि हो, हिन्दुओं का सूर्य मेवाड़-गगन में एक बार फिर उदित हो। भील, राजपूत, शत्रुओं ने मिलकर महाराणा का जयनाद किया, दुन्दुभि बज उठी। मंगल-गान के साथ सपत्नीक हम्मीर पैतृक सिंहासन पर आसीन हुए। अभिवादन ग्रहण कर लेने पर महाराणा ने महिषी से कहा-क्या अब भी तुम कहोगी कि तुम हमारे योग्य नहीं हो?इस पूरी कथा को जाने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी चित्तौड़ निधि मिश्रा की आवाज में
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