रात! तारे-तारे, तारे! लूनी के मन में एक विचार उठा, मैं इन्हें देख रही हूँ, वह भी एक बार तो इन्हें देख ही लेगा और पहाड़ों की याद कर लेगा… तारे क्षण-भर झपक लेंगे; जब जागेंगे, तब मैं इन्हें अलपक ही देख रही हूँगी, पर वह-? भाई बहन के निश्छल प्रेम को दर्शाती यह कहानी जिसमें जिसने भाई-बहन अनाथ होते हैं और एक दूसरे के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं किंतु भाई को मिलता है प्राण दंड मिलता है तो बहन की मनोदशा किस प्रकार हो जाती है भूतकाल में बिताए हर एक क्षण को याद कर रही है
अनंत और ज्योति चांदनी रात में ताजमहल की आलौकिक सुंदरता हो निहार रहे हैं इसी से अभिभूत होकर अनंत और ज्योति उसकी सुंदरता में खो जाते हैं इस प्यार के स्मारक में उनके बीच क्या वार्तालाप चल रही है और वह क्या महसूस कर रहे हैं जानते हैं अब यह की लिखी कहानी ताज की छाया में भूपेश पांडे की आवाज में
कहानी की नायिका मालती की एक उबाऊ और रोजमर्रा की नीरस जिंदगी को चित्रित किया गया है | जो नायिका के व्यक्तित्व को किस प्रकार प्रभावित कर रही है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी गैंग्रीन, सुमन वैद्य जी की आवाज में
सन 1946 में हुए हिंदू-मुस्लिम दंगों पर आधारित यह कहानी कोलकाता शहर की है। स्त्रियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार और भेदभाव से संतृप्त हैं उनका तिरस्कार और निरादर होता है। समाज में फैली इस विकृति को देखकर -सुनकर मन व्यथित हो जाता है
कहानी का नायक शेखर अपने मां के मृत्यु का समाचार प्राप्त करके दुखी है| शेखर के मानसिक व्यथा को जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी दुख और तितलियां ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
पिंगमाल्य एक मूर्तिकार है सौन्दर्य की देवी अपरोदिता का वरदान उसे प्राप्त है-उसके हाथ में असुन्दर कुछ बन ही नहीं सकता। अपरोदिता का वरदान पिंगमाल्य को असमंजस की स्थिति में डाल देता है क्या था वह वरदान और आखिर पिंगमाल्य क्या निर्णय लेता है जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय की जी के द्वारा लिखी गई कहानी कलाकार की मुक्ति अमित तिवारी जी की आवाज में
हिंदुस्तान -पाकिस्तान दो झंडो के बीच खड़ा एक व्यक्ति जो लंबी दाढ़ी और फटे हाल में खड़ा हुआ जो मानसिक रूप से अस्वस्थ लग रहा हो
कहानी प्रारंभ से ही उन संकीर्ण मानसिकता वाले पुरुषों और स्त्रियों की मनोदशा से परिचित कराते हुए आगे बढ़ती है कि किस प्रकार एक अकेली युवती को देखकर बिना यथार्थ जाने लोग उसके चरित्र का विश्लेषण करने लग जाते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी मनोवृति मनोवृति सुनते हैं भूपेश पांडे जी की आवाज में
कहानी का नायक एक मेहनती गरीब क्लर्क है ,जबकि उसका मित्र ईश्वरी एक बड़े जमीदार का लड़का है |नायक को अपने अमीर दोस्त के साथ कुछ दिन बिताने को मिलते हैं ईश्वरी के ठाठ- बाट, शानो- शौकत से नायक भी अपने को अछूता नहीं रख पाता है |कहीं ना कहीं नायक के मन में भी अमीरी का नशा चढ़ने लगता है| नायक के चरित्र में आए इस बदलाव को जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी नशा भूपेश पांडे जी की आवाज में…
वैवाहिक जीवन के एकपहलू में जितने जितने सुख हैं अगर उसके दूसरे पहलू को देखा जाए तो वह उतना ही हृदय विदारक और भयानक है | कहानी में नायक के जीवन में अपने वैवाहिक जीवन की इस समस्या के समाधान के लिए नायक कौन-कौन से प्रयत्न करता है | जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी हीला भूपेश पांडे जी की आवाज में
ताहदे नज़र एक बयाबान सा क्यू हैं – Malti Joshi (मालती जोशी) – Arti Srivastava
एक औरत जीवन साथी से धोखा खाने के बाद अपनी औलाद से उम्मीदें रखती है । लेकिन वही औलाद जब मुँह मोड़ ले , तो उसके पास जीने के लिए क्या रह जाता है ? रेखा ने हिम्मत नहीं हारी है । उसे उम्मीद है कि शायद एक दिन उसका बेटा ,सक्षम उसके पास लौट आएगा ।
कहानी में नायक नेपाल के पोखरा अपने पूरे परिवार के साथ घूमने के उद्देश्य से जाता है |नायक किस प्रकार किस प्रकार पोखरा पहुंचता है? और वहां जाकर क्या होता है ? यात्रा वर्णन सुनते हैं अंजू जेटली की आवाज में
हमारी कई बार ऐसी मनोस्थिति हो जाती है कि हमें अपने घर में ही वह प्रेम और शांति नहीं प्राप्त हो पाती है, जो घर के बाहर प्राप्त हो जाती है |कविता के माध्यम से इसी मनोभाव को प्रकट किया गया है…
रक्षाबंधन…एक ऐसा त्योहार, जहाँ कभी खीर की मिठास, मेहंदी की खुशबू, रेशमी राखियों के धागे और भाई-बहन की मासूम नोक-झोंक रिश्तों को और भी खूबसूरत बना देती थी।
लेकिन क्या होता है जब वही रिश्ते बड़े होते-होते औपचारिकताओं, अहंकार, स्वार्थ और दूरियों के बोझ तले दबने लगते हैं?
कविता और शांतनु भाई बहन है |एक समय ऐसा भी था कि दोनों भाई- बहन में असीम प्रेम झलकता था| किंतु आज क्या? क्यों उनके बीच में इतनी दूरियां पैदा हो गई ?
‘आँखों में किरकिराते रिश्ते’ एक भावनात्मक और कड़वी सच्चाई को सामने लाने वाली कहानी है, जो बचपन की निश्छल मोहब्बत से लेकर बड़े होने पर रिश्तों में आती कड़वाहट तक की यात्रा को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है।
यह कहानी सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते की नहीं, बल्कि उन बदलते पारिवारिक संबंधों की भी है, जहाँ कभी बिना शर्त वाला प्यार धीरे-धीरे उम्मीदों, हिसाब-किताब और औपचारिक व्यवहार में बदल जाता है।
सुनिए एक ऐसी कहानी, जो शायद आपको अपने ही रिश्तों के आईने से रूबरू करवा दे…
सिर्फ Gaatha पर।
Reviews for: Ekaki Tara (एकाकी तारा)
Average Rating
pragati sharma