एक रिश्ता किस तरीके से रंग बदलता है| अपर्णा एक मेधावी छात्रा है और बाद में उसी संस्थान में कार्य करने लग जाती है जहां उसके सर दिनेश जी है| दिनेश उसके सामने प्रेम का प्रस्ताव रखता है किंतु दिनेश किसी और से विवाह करता है |क्या हुआ था दिनेश और अपर्णा के बीच प्रेम संबंधों का |पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं विनीता शुक्ला की द्वारा लिखी गई कहानी बदलते रंग, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
योगिता और ऋषभ की नई- नई शादी हुई है| ऋषभ अपने दोस्तों के बीच योगिता को दोस्तों के पत्नियों के समक्ष एक अनजानी सी प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर देता है| योगिता को जबरदस्ती के इस थोपे हुए होते हुए संग्राम के ऊपर कैसे विजय हासिल होती है जानते हैं विनीता शुक्ला के द्वारा लिखी गई कहानी एक थोपा हुआ संग्राम ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में..
शीतला प्रसाद जी की सीमित आमदनी है| जैसे ही वह खाना खाने जा रहे होते हैं तभी उनके दरवाजे की घंटी बजती है |दामाद रामअवतार जी के आने की आशंका से जैसे- तैसे उनकी खातिरदारी की तैयारियां शुरू हो जाती है किंतु क्या वास्तव में वह मेहमान राम अवतार जी है या कोई और ?कामतानाथ के द्वारा लिखी गई इस रोचक कहानी को सुनते हैं पूजा श्रीवास्तव जी की आवाज
कुंभ मेले में स्नान का महत्व: पवित्रता की ओर एक कदम
कुंभ मेले में नदियों में स्नान करना सिर्फ एक परंपरा नहीं, यह आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम है। मान्यता है कि गंगा, यमुना और सरस्वती जैसे पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कुंभ के दौरान इन नदियों का जल अमृतमय हो जाता है। स्नान करने से केवल शरीर ही नहीं, मन और आत्मा भी शुद्ध होती है। यह एक ऐसा अनुभव है, जो व्यक्ति को अपने भीतर की गहराइयों को समझने और आध्यात्मिक शांति पाने में मदद करता है।
गाथा के साथ जानिए, कुंभ मेले में स्नान से जुड़ी कहानियां और धार्मिक रहस्यों की गहराई।
उत्तरा 50 साल की एक महिला है जिसका विवाह गिरीश से हुआ है |उसकी दो बेटियां हैं निशि और आशु |उत्तरा के जीवन में कहीं ना कहीं एक सन्नाटा पसरा हुआ है |उत्तरा को ऐसा क्यों महसूस हो रहा है| क्या वह अपने अंदर चल रहे इन बातों को को समाज को दिखा पाती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी की लिखी कहानी सन्नाटा, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
गैंडा- मोटी चमड़ी का , थोड़ा कुरूप सा दिखने वाला प्राणी। राज मेहरा, सुपर्णा की बचपन की सहेली थी और स्कूल कॉलेज की हर प्रतियोगिता में पूरे समय बराबर रहकर अन्त में बाज़ी मार ले जाती थी । जब काफ़ी समय बाद दोनो सहेलियाँ मिली तो अपने सुदर्शन फौजी पति के सामने राज के मोटे काले पति को देखकर सुपर्णा को ना जाने क्यों बहुत सन्तोष हुआ था। पर जब रूपसी वाचाल राज , सुपर्णा के घर रहने आयी और सहेली के पति को ही पुरस्कार की तरह जीत लिया, तब सुपर्णा ये विश्वासघात सहन ना कर पायीं. फिर सुपर्णा ने उस आघात को कैसे झेला? क्या एक पत्नी , सहेली के सामने एक बार फिर हार गयी या उसने एक ऐसा कदम उठाया जिसके बारे में राज ने कल्पना भी ना करी थी . जानिए शिवानी की इस कहानी “गैंडा “ में … ((सुनिए शिवानी जी की लेखनी का जादू इस कहानी गैंडा में , जहाँ एक सहेली और पत्नी के मनोभवों को बड़ी सुंदरता और सजीवता से प्रस्तुत किया गया है )
एक ऐसी मुसलमान राजकुमारी की कहानी जिसने अपनी सेना के हिंदु सेनापति के लिए अपना धर्म और राज्य सब छोड़ दिया लेकिन अपने प्रेम को ना प्राप्त कर सकी।
स्त्री के चरित्र को समझना एक लेखक के लिए भी मुश्किल होता है ऐसा ही कुछ कहानी की नायिका का किरदार है वास्तव में कहानी की नायिका कैसी है जानने के लिए सुनते हैं ज्योत्सना सिंह की लिखी कहानी नायिका
आजादी के पावन पर्व पर जब पूरी नगरी सज रही थी । तब कोठों पर भी रंग बिरंगी झालर सजाई जा रही थी। शम्मो जान का कोठा भी जगमगा रहा था ।मुन्नी बाई ने शम्मोजान से पूछा कि यह आजादी का जश्न आज क्यों हो रहा है? हम तो कब के आजाद हो चुके हैं! है ना ! तो क्या वास्तव में आजादी सभी को मिल सकी है ? क्या वास्तव में मुन्नी जान जैसी कितनी ही मुन्नीजान आजाद है ?
सैफ अली एक किसान है |अजमेर जाने से पहले वह काज़ी अब्दुल्ला के पास अपना सारा धन हिफाजत से रखने के लिए दे जाता है | किंतु उसे काज़ी अब्दुल्ला से पत्थरों से भरा थैला वापस मिलता है |अब बीरबल इस समस्या को किस प्रकार सुलझा पाते हैं पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं दुष्ट काज़ी, अंजू जेटली की आवाज में ..
इस कहानी में एक पिता और बेटे के कहे अनकहे जज़्बातों को , उनके एहसासों को बड़ी सच्चाई और ख़ूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया है।
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