आत्महत्या – Arvind saxena – Priya bhatia
बहुत लोग है इंडिया में जो हर साल आत्महत्या करते है ….ये सब कभी ना सोचे ज़िन्दगी बहुत अच्छी है आज वक़्त बुरा है कल अच्छा होगा ……👍
भून के अपने दिल को – Arvind saxena – Priya bhatia
तेरे रोने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ऐ दिल.. जिनके चाहने वाले ज्यादा हो.. वो अक्सर बे दर्द हुआ करते हैं….
न बुझा तू बत्तिया – Arvind saxena – Priya bhatia
लुटी है एक बेटी, तो लुटा सम्मान सबका है!!
“मां का हमारे जीवन में क्या महत्व है ये कविता बख़ूबी बताती है। मां के होने से ही हमारा जीवन सुखी है। कविता के भाव जानने के लिए जरूर सुनें ये कविता।”
आशा की किरण दिखा रही है ये कविता,,,कविता को जरूर सुनें।
प्रेम में विरह की भावना को दर्शा रही है ये कविता
साईं की कृपा हम सब पर होती है लेकिन हम उसका शुक्रियादा करना भूल जाते हैं। शुक्र मनाइए हर उस चीज का जो आपको मिली है।
न बुझा तू बत्तिया – Arvind saxena – Priya bhatia
लुटी है एक बेटी, तो लुटा सम्मान सबका है!!
एक लड़की के लिए मायका क्या होता है ? सिर्फ वही जानती है । मायके के नाम से ही आँखें भर आती हैं। सारा बचपन, सखियाँ,सावन, माँ-बाबूजी, भईया, बहन आँखों में तैर जाते है।मायके जाने के नाम से ही ज़मीन पर पैर नही पड़ते है।वक्त काटे नही कटता है।क्या कोई ऐसा होगा , जो मायके न जाने की कसम खाले ? श्रुति ने मायके न जाने की कसम खाई थी। आखिर क्यों ?
एक कंजूस व्यक्ति के पास बहुत सारा सोना था लेकिन वह उसका सदुपयोग ना करके उसे जमीन में गाडे रखता था ।एक दिन उसका यह सारा सोना चोरी हो गया। इस बात से कंजूस को क्या सीख मिली और उसने क्या किया जाने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा लिखी गई कहानी कंजूस और सोना निधि मिश्रा जी की आवाज में
गौरा शूद्र जाति की गरीब मां की बेटी है | जिसकी शादी मंगरू नामक एक परदेसी से हो जाती है, लेकिन अचानक मंगरू गौरा को छोड़कर बिना कुछ बताए वहां से चला जाता है, कई साल बाद अचानक एक बूढ़ा व्यक्ति गौरा के पास आता है और यह कहकर कि मंगरू ने उसे बुलाया है अपने साथ कोलकाता ले जाता है किंतु बाद में जब गौरा कोलकाता पहुंचती है तो वह बहुत अचंभित हो जाती है आखिर ऐसा क्या हुआ गौरा के साथ?क्या मंगरू ने वापस गौरा को अपने पास बुलाया था ? बूढ़ा व्यक्ति कौन था ?पूरी कहानी को जाने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी शुद्र सुमन वैद्य जी की आवाज में..
कहानी का नायक ब्रजराज अपनी पत्नी इन्दो की बातों से विचलित रहता है | ब्रजराज के हृदय में एक अलग ही विरक्ति आ जाती है |और ब्रजराज घर छोड़ने का निश्चय कर लेता है |आगे क्या होता है ब्रजराज की जिंदगी में? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी भीख ,शिवानी आनंद की आवाज में
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