Is it always important to think and do? Or is it important to just go ahead and do it? This poem compares to giants of history – Dharmraj- Yudhishthira and Mighty Arjuna.
क्या गलत है, क्या सही |बिना जाने -समझे किसी भी बात की रूपरेखा खींच लेना कितना उचित है ?क्या यह उचित नहीं होगा कि जब तक हम किसी भी बात को पूर्ण रूप से ना समझ ले, तब तक किसी भी बात पर अपना निर्णय नहीं बनाना चाहिए | इसी बात को उजागर करती हुई अनुपम ध्यानी की आवाज में कविता जानकर चलो मान कर नहीं..
Meri or se RAM JANM BHOOMI POOJAN ke shubh uplaksh par bhent kee hui ek EENT.
Jai Shri Ram! Jai Maa Bhaarati ! Jai Hind !
“जो हरदम अपनी मनमानी को आतुर हो ,शायद उन्होंने यमराज के संदेश नहीं देखे “ ,क्या वास्तव में हर एक बात की कोई सीमा है? नहीं ….इस कविता को सुनने के बाद यथार्थ का ज्ञान हो जाता है |अनुपम ध्यानी की आवाज में कविता “जो ‘”….
30 seconds of positive energy, positive poetry.
“मुरझाई दिए की बाती पवन का वेग नहीं सहन कर पाती ,मशाल हवा के संग अनूठा नृत्य निर्वाण है “ , हमें अपने को इतना कठोर बना लेना चाहिए कि बड़े से बड़े अवसाद को भी सरलता से झेल सकें ,ना कि जरा से अवसाद में हम बिखर जाएं | कविता “मुझे मशाल रास आती है” के मूल रूप में इसी संदेश को दिया गया है…
“जो हरदम अपनी मनमानी को आतुर हो ,शायद उन्होंने यमराज के संदेश नहीं देखे “ ,क्या वास्तव में हर एक बात की कोई सीमा है? नहीं ….इस कविता को सुनने के बाद यथार्थ का ज्ञान हो जाता है |अनुपम ध्यानी की आवाज में कविता “जो ‘”….
30 seconds of positive energy, positive poetry.
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Let the people be what they be. You become the best version of yourself! Chase excellence and let people say what they have to.
उन माता-पिता की स्थिति , जिनके बच्चे विदेशों में जा बसे हैं | वृद्ध माता पिता सिर्फ अपने बच्चों के आने का इंतजार करते -करते थक जाते हैं ,किंतु यह इंतजार उनका खत्म नहीं होता | दिल को छू लेने वाली इस मार्मिक कविता में इस एहसास को समझ सकते हैं| भावना तिवारी जी की मधुर आवाज में …
पड़ती है !|Hindi Kavita |हिंदी कविता | Motivational Hindi Poems by Anupam Dhyani Before starting something new one must shed the old! One must be patient for victory and always understand that all good things come in time.
निशा निमंत्रण से लिया गया यह गीत जिसमें शाम होने पर किस प्रकार वातावरण बदल जाता है बड़ी ही खूबसूरती के साथ उल्लेख किया गया है
सीने में उठने वाला वो दर्द जब अलग हो जाए हमसे वो इंसान जिससे हम बेहद मोहब्बत करते हैं। उसी दर्द को दर्शाती है यह कविता।
Reviews for: Dharmraj ya Parth? |Thinker or Doer? Hindi Kavita Poems by Anupam Dhyani