सीने में उठने वाला वो दर्द जब अलग हो जाए हमसे वो इंसान जिससे हम बेहद मोहब्बत करते हैं। उसी दर्द को दर्शाती है यह कविता।
कई दिनों तक – Arvind saxena – Priya bhatia
एक ऐसा एहसास जब सारी बातें, सारे लोग ब़ेगाने से लगने लगे,जो कभी हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा हुआ करते थे। ऐसा कब होता है ?और यह एहसास कब जन्म लेता है ?खूबसूरत शब्दों में पिरोया हुआ यह एहसास अरविंद सक्सेना की कविता कई दिनों से में सुनते हैं प्रिया की आवाज़ में..
प्यार में जुदाई के आलम को दशाया गया है इस कविता में
अच्छे पलों को किसी की नजर लग जाना आम बात है और अगर वही पल हम किसी के साथ बिताएं तो ये डर और बढ़ जाता है। तो ऐसे ही भावों को दर्शा रही है ये कविता।
एक तन्हा सा मै था – Arvind saxena – Priya bhatia
मैं हूँ, दिल है, तन्हाई है तुम भी होते अच्छा होता|
एकता का पाठ घर से ही शुरू होता है तो विषम परिस्थितियों में कैसे परिवार अलग हो जाते हैं ये कविता बखूबी बता रही है।
भून के अपने दिल को – Arvind saxena – Priya bhatia
तेरे रोने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ऐ दिल.. जिनके चाहने वाले ज्यादा हो.. वो अक्सर बे दर्द हुआ करते हैं….
कई दिनों तक – Arvind saxena – Priya bhatia
एक ऐसा एहसास जब सारी बातें, सारे लोग ब़ेगाने से लगने लगे,जो कभी हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा हुआ करते थे। ऐसा कब होता है ?और यह एहसास कब जन्म लेता है ?खूबसूरत शब्दों में पिरोया हुआ यह एहसास अरविंद सक्सेना की कविता कई दिनों से में सुनते हैं प्रिया की आवाज़ में..
न बुझा तू बत्तिया – Arvind saxena – Priya bhatia
लुटी है एक बेटी, तो लुटा सम्मान सबका है!!
मां हमारे जीवन में क्या महत्व रखती है ये कविता ये बखूबी बताती है। मां जैसा अगर कोई है तो वो मां ही है।
लकीरें तो उनकी भी होती हैं, जिनके हाथ नहीं होते !
अक्सर हमारा वक्त बीती -बातों को याद करने में चला जाता है| आप कुछ ऐसा ही पल्लवी के द्वारा लिखी गई कविताyad aa gya mujko gujra zamana(याद आ गया मुझको गुज़रा ज़माना) को सुनकर निश्चित तौर पर सब अपने बचपन में जरूर लौट जाएंगे, उन पलों को याद करेंगे, जो हमारे- आपके जीवन का एक खूबसूरत हिस्सा है |
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कहानी उस ओर संकेत करती है कि समाज में पुरुष सिर्फ अपने पुरुषत्व को दिखाने की चाहत में स्त्रियों पर अत्याचार करने में अपना गौरव महसूस करते हैं |कहानी का मुख्य पात्र कन्हैयालाल की जब नई-नई शादी होती है तो आपके दोस्तों के समझाने पर अपनी नई नवेली दुल्हन लाजो पर अत्याचार शुरू कर देता है |करवा चौथ वाले दिन भी लाजो के प्रति रूखे व्यवहार से लाजो खिन्न हो जाती हो जाती है |कहानी में आगे क्या होता है? क्या लाजो कन्हैयालाल को छोड़ देती है? कन्हैयालाल को अपनी भूल का अहसास होता है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं यशपाल के द्वारा लिखी गई कहानी करवा का व्रत, नयनी दीक्षित की आवाज में…
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The story depicts The story shows how a happy life can topple down with a single incident and nothing is in our control and nothing to be taken for granted. It’s a story about life’s twist and turn and survival.
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Anonymous