“Ginni” is a story of the frustration and a feeling of failure of a student as he is victimized by his teacher himself in the form of name calling.
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
Story of a blind bhikharan, who was saving some money for her adopted child but due to the fear of theft she deposited her money to the money lander. Once her child got ill and she went to the money lander to get her money back but he deny to give it
दो भाईयों की ऐसी कहानी जो अपनी पत्नियों के रोज़ रोज़ के झगड़े से आहत हैं। एक दिन खाना मांगने पर न मिलने से क्रुद्ध हो एक भाई अपनी पत्नी के सर पर प्रहार करता है जिससे कि उसकी मृत्यु हो जाती है लेकिन दूसरा भाई सबके सामने बताता है कि खून भाई ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी ने किया है क्योंकि उसका मानना है कि पत्नी तो उसे और मिल जाएगी लेकिन भाई तो दूसरा नहीं मिल सकता।
कहानी एक स्वार्थपरस्त व्यक्ति अनाथ बाबू की है | अनाथ बन्धु का विवाह विन्ध्यवासिनी से हुआ जोकि सुन्दर सद्चरित्रा है किन्तु अनाथ बाबू को हिन्दुस्तानी नाम से घृणा थी। पत्नी को भी वह विशेषताओं और सुन्दरता में अपने योग्य न समझते थे। अनाथ बाबू ससुराल के पैसों से विदेश जाना चाहते हैं |क्या अनाथ बाबू की यह मंशा पूरी हो पाती है? विंध्यवासिनी के जीवन में आगे क्या घटित होता है? इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ टैगोर के द्वारा लिखी गई कहानी नई रोशनी, शिवानी आनंद की आवाज में..
सुभाषिनी नाम की ऐसी लड़की की कहानी जो बोल नहीं सकती, इसलिए उसकी मित्रता भी मूक प्राणियों से अधिक है जिसे बोलने वाले समाज से हमेशा निरादर ही प्राप्त हुआ।
Awoman with great look, good taste was still not getting the attention from her husband. Each day the distance was impacting huge among their relationship that prompted the lady to leave her house.
The story shows how the groom side of the family used to take upperhand in every area during a marriage settlement. Sometimes it goes to such extent as exploitation and mental torture.
Khata” is a story of a girl who in those days got the opportunity of schooling while women’s education was not that very common. The little girl was enthusiastically writing everywhere that was not very much appreciated by his brother as she was messing up his writing notebook. Once she got married she was taunted and prevented from writing by her sister-in-law and her husband who had himself a strong passion for writing. At the end she was forced to stop writing. Her fate was bound to surrender herself to the hostile situation.
“Chitrokor” is a story of a solvent housewife, a mom whose life is dedicated in pursuing creative art as part of her hobby. She got her husband in support of her passion. But after her husband’s death the relative whose house she was sheltered, used to believe in materialism. And he used to preach her son that money making is the only way that’s meaningful in life. First the lady tried to live with her passion even exposing her hobby to her child hiding from the shelter giver. But when he came to know and resisted vehemently, she didn’t even hesitate to leave the house with her child for the sake of her passion on art.
एक कक्षा – 6 में पढ़ने वाला लड़का जो बेहद शैतान प्रकृति का है । जीव – जंतुओं , पक्षियों को मारना उसका शौक है। किंतु एक ऐसा प्रसंग घटता है जो उसके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाता है। क्या घटना थी और ऐसा क्या बदलाव उसमें आया? जानने के लिए सुनते हैं गुलेलबाज लड़का !
जिस अवकाश के समय को लोग आमोद प्रमोद के लिए सुरक्षित रखते हैं उसी को मैं इस खंडहर और उसके क्षत-विक्षत चरणों पर पछाड़े खाती हुई भागीरथी के तट पर सुख से काट देती हूँ। कब और कैसे मुझे उन बालकों को कुछ सिखाने का ध्यान आया मैं नहीं जानती। मेरे विद्यार्थी पीपल की छाया में मेरे चारों ओर एकत्र हो गए। वह गोधूलि मुझे अब तक ना भूली जब एक मलिन स्त्री ने मुझे कुछ शब्दों और कुछ संकेतों से कहा कि उसके अकेले लड़के को भी और बच्चों के साथ बैठने दिया करूँ। तो यह कुछ तो सीख सकें । वह घीसा था जिसकी सचेत आँखों में ना जाने कौन सी जिज्ञासा भरी थी । जब उन लोगों को मुझे छोड़ जाना था तब मेरा मन बहुत ही अधीर हो उठा। मैं घीसा को ढूँढ रही थी । हार कर मैं चली किंतु अंधेरे में एक काला धब्बा आता दिखा। वह घीसा था। उसके दोनों हाथों में एक बड़ा तरबूज था ।घीसा के पास न पैसा था ना खेत। तब क्या वह इसे चुरा लाया है? मन का संदेह बाहर आया। तब पता चला कि घीसा आज नया कुर्ता दे आया और उसके बदले में मेरे लिए तरबूज लाया है। किंतु चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि गर्मी में वह कुर्ता पहनता ही नहीं।
महाशय मेहता उन अभागों में से हैं जिनको अपनी मेहनत के हिसाब से प्रशंसा या पुरस्कार नहीं मिलता| किंतु अब उन्होंने सोच लिया है कि वह राजा साहब के आगे स्तुति गान करेंगे| इसके चलते वह शीघ्र दीवान बन गए |किंतु मेहता जी की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुई ,आगे अब क्या क्या हुआ? पूरी बात जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी रियासत का दीवान ,सुमन वैद्य की आवाज में
मिश्राजी यूं तो बिजली का बिल कम आए इसके लिए मीटर रीडिंग लेने आने वाले अली भाई से पैसे देकर सेटिंग जमाए हुए हैं लेकिन अंत में पाते हैं की उनकी सेटिंग की अपेक्षा उनके घर काम करने वाली बाई की सेटिंग ज्यादा कारगर है।
आखिरी लिबास – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में लेखिका एक पुरस्कार समारोह में अपने सह लेखकों के साथ दिल्ली से बरेली जा रही होती है तो अचानक उसकी नज़र एक ऐसी दुकान पर पड़ती है जिसके बोर्ड पर लिखा था ‘आखिरी लिबास’, लेखिका के मन में भय,आश्चर्य जैसी कई भावनाएं आ जाती है ।आखिरी ये कैसा नाम हुआ? पर क्या आप जानते हैं इस नाम का क्या आशय है ?लेखिका ने इस घटना से ऐसा क्या अनुभव किया? सुनिए ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी लिबास, शैफाली कपूर की आवाज़ में
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