एक आलीशान कॉलोनी के बीच में एक मैदान जहां पर गरीब बस्ती के लोग ,बच्चे खेलते- कूदते आते -जाते और सर्दियों में धूप सेंकते हैं किंतु आलीशान बंगलों में रहने वालों को यह बात नागुज़ार है तो क्या ये अमीर लोग अपनी झूठी शान के ख़ातिर उस मैदान के साथ ऐसा कुछ करेंगे कि जिससे कोई गरीब आदमी उस मैदान में आये ही ना । क्या होगा? जानने के लिये सुनतें हैं अंजना वर्मा की कहानी नंदन पार्क ,विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में..
“Mother’s Day”
माँ…
वो नाम, जिसे सुनते ही
मन अचानक बचपन की किसी सुरक्षित जगह पर लौट जाता है।
उसकी डाँट में चिंता होती है,
उसकी चुप्पी में दुआएँ,
और उसके हर त्याग में
हमारी पूरी दुनिया छिपी होती है।
माँ सिर्फ़ वह नहीं होती
जो जन्म देती है…
कभी-कभी रिश्तों में कुछ लोग
ममता का वही स्पर्श चुपचाप निभा जाते हैं।
इस भावनात्मक कहानी में
अमिता और उसके पति प्रवीण
अपने नवजात शिशु की देखभाल के लिए
बुआ सास को दिल्ली बुलाते हैं।
वह भी सब कुछ छोड़कर,
निस्वार्थ भाव से बच्चे को अपना स्नेह, समय और ममता देती हैं —
ठीक एक माँ की तरह।
लेकिन क्या रिश्तों में दिया गया प्रेम
हमेशा सम्मान भी पाता है?
जब विदा का समय आता है,
तो प्रवीण उनके वर्षों के अपनत्व और ममता को
कुछ पैसों में समेट देने की कोशिश करता है।
और यही पल दिल में एक गहरा सवाल छोड़ जाता है—
क्या हर वह स्त्री
जो माँ की तरह प्रेम और त्याग देती है,
उसे वही सम्मान नहीं मिलना चाहिए?
🎧 रिश्तों, संवेदनाओं और ममता की अनकही परतों को छूती
अंजना वर्मा की मार्मिक कहानी
“Mother’s Day”
आवाज़: विनीता श्रीवास्तव
केवल Gaatha पर।
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वृद्ध पिता की कहानी,जो अपनी सारी जिम्मेदारियां पूरी कर चुका है और उसका शरीर शिथिल हो गया है |इस समय काल में जब उसे अपने बच्चों का सानिध्य प्राप्त होता है ,तो उसके अंदर एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है | किंतु यह सानिध्य उसे अल्प समय के लिए प्राप्त
इंसान अपने जीवन में भौतिक खुशियों को पाने के चक्कर में अपनी वास्तविक खुशियों से दूर होता चला जाता है| इसी भावना से ओतप्रोत है अंजना वर्मा जी के द्वारा लिखी गई कहानी हॉर्स- रेस , ,सुनते हैं विनीता श्रीवास्तव की आवाज …
Female Protrayal in Bollywood with Anandita Bhasin (Part – 2)
गैंडा- मोटी चमड़ी का , थोड़ा कुरूप सा दिखने वाला प्राणी। राज मेहरा, सुपर्णा की बचपन की सहेली थी और स्कूल कॉलेज की हर प्रतियोगिता में पूरे समय बराबर रहकर अन्त में बाज़ी मार ले जाती थी । जब काफ़ी समय बाद दोनो सहेलियाँ मिली तो अपने सुदर्शन फौजी पति के सामने राज के मोटे काले पति को देखकर सुपर्णा को ना जाने क्यों बहुत सन्तोष हुआ था। पर जब रूपसी वाचाल राज , सुपर्णा के घर रहने आयी और सहेली के पति को ही पुरस्कार की तरह जीत लिया, तब सुपर्णा ये विश्वासघात सहन ना कर पायीं. फिर सुपर्णा ने उस आघात को कैसे झेला? क्या एक पत्नी , सहेली के सामने एक बार फिर हार गयी या उसने एक ऐसा कदम उठाया जिसके बारे में राज ने कल्पना भी ना करी थी . जानिए शिवानी की इस कहानी “गैंडा “ में … ((सुनिए शिवानी जी की लेखनी का जादू इस कहानी गैंडा में , जहाँ एक सहेली और पत्नी के मनोभवों को बड़ी सुंदरता और सजीवता से प्रस्तुत किया गया है )
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