दीपा बहुत ही कम उम्र में विधवा हो जाती है दीपा के भाई भाभी उसके विधवा होने पर उसके श्रृंगार और पहनने ओढ़ने पास तंज कसते हैं समाज में विधवा होने पर नारी के प्रति लोगों के इस दृष्टिकोण को उजागर करती हुई कहानी है अनारकली
एक आलीशान कॉलोनी के बीच में एक मैदान जहां पर गरीब बस्ती के लोग ,बच्चे खेलते- कूदते आते -जाते और सर्दियों में धूप सेंकते हैं किंतु आलीशान बंगलों में रहने वालों को यह बात नागुज़ार है तो क्या ये अमीर लोग अपनी झूठी शान के ख़ातिर उस मैदान के साथ ऐसा कुछ करेंगे कि जिससे कोई गरीब आदमी उस मैदान में आये ही ना । क्या होगा? जानने के लिये सुनतें हैं अंजना वर्मा की कहानी नंदन पार्क ,विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में..
यह कहानी बाल मन की व्यथा है |एक छोटी सी बच्ची घर से दूर अध्ययन हेतु छात्रावास के कड़े अनुशासन में रह रही है| अपने अतीत में बिताए घर के समय को स्मरण कर रही हैऔर अपने आने वाले अवकाश का बेसब्री से इंतजार करती है ,ताकि उसी बचपन में लौट सकें| अंजना वर्मा की भावुक कर देने वाली कहानी लेकिन कब ,सुनते हैं विनीता श्रीवास्तव की आवाज में..
वृद्ध पिता की कहानी,जो अपनी सारी जिम्मेदारियां पूरी कर चुका है और उसका शरीर शिथिल हो गया है |इस समय काल में जब उसे अपने बच्चों का सानिध्य प्राप्त होता है ,तो उसके अंदर एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है | किंतु यह सानिध्य उसे अल्प समय के लिए प्राप्त
एक फौजी की जिंदगी से रूबरू कराती कहानी जहां पर उसका अपना प्रेम और उसके देश के प्रति प्रेम के बीच में वह देश प्रेम को चुनता है ऐसी कहानी राजू की है जो एक फौजी है और जिसकी शादी उसके बचपन की दोस्त रूपा से होती है वह रूपा से अथाह प्रेम करता है किंतु जब देश को उसकी जरूरत होती है तो देश लिए तो हंसते-हंसते अपनी जान भी न्योछावर कर देता है पवनेश ठाकुराठी की बेहद मार्मिक कहानी पूजा श्रीवास्तव जी की आवाज में ।
जीवन में रिश्ते नहीं ,रिश्तो में जीवन ढूंढो| कनक के पिता की मृत्यु हो चुकी है और कनक विदेश से कानपुर अपनी मां के पास आई है, उसके आने का मकसद अपने एक पिता और उनके दोस्त गुप्ता जी के साझा खरीदे हुए प्लॉट को बेचने का भी है |किंतु कहानी के प्रसंग में ऐसा भी आता है कि कनक अपना इरादा बदल देती है| कहानी का वह प्रसंग क्या है ?क्या कनक पर अपने पिता की परवरिश का रंग चढ़ा हुआ है? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं नीतू मुकुल के द्वारा लिखी गई कहानी, “रंग जो छूटे नाहि” पूजा श्रीवास्तव की आवाज में….
जबसे निशीथ साथ चलते- चलते अचानक अजाने मोड पर मुड ग़या था तो ठिठक कर उस चौराहे पर उसके आस-पास फुरसत ही बाकि रह गई थी और एक अंधेरा खाली कोना। बस एक सप्ताह और वह उबर आई थी नई जीजिविषा के साथ.. एक आत्मनिर्भर आत्मविश्वासी लड़की के व्यक्तित्व मे एक चुंबकत्व होता है। केतकी रेडियो स्टेशन मे काम करती थी. खूबसूरत थी । बस अगर शादी नहीं करी तो लोगों को बाते बनाने का मौका मिल जाता है। जानिए नायिका केतकी के जीवन मे आने वाले कई उतार-चढ़ावों को और उसका हर बार परिस्थिति को हरा कर आगे बढ़ने की यात्रा , जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ की लिखी कहानी एक नदी ठिठकी सी”, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
रूहानी इश्क का नाम सुना है आपने ।ऐसा इश्क जो समय के साथ फीका नहीं पड़ता |जो कभी ना मिलकर भी हमेशा साथ रहता है |उषा राजे सक्सेना जी की कहानी आपको रूबरू कराएगी इससे ऐसी की दास्तान से ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
कहानी एक वृद्ध खिलौने वाले गंगाधर की है| आज गृहत्याग करने की इच्छा से जाने लगता है |तब उसे गृहस्वामी की छोटी बेटी कनक रोक लेना चाहती है |गंगाधर मासूम कनक को अपनी पूरे जीवन गाथा सुनाता है क्या आज गंगाधर उस मासूम के मोह में आकर अपने गृह त्याग का विचार ध्यान देगा त्याग देगा| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी गृहत्याग , सुमन वैद्य की आवाज में
वृद्ध पिता की कहानी,जो अपनी सारी जिम्मेदारियां पूरी कर चुका है और उसका शरीर शिथिल हो गया है |इस समय काल में जब उसे अपने बच्चों का सानिध्य प्राप्त होता है ,तो उसके अंदर एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है | किंतु यह सानिध्य उसे अल्प समय के लिए प्राप्त
धुंए के छल्ले – Arvind saxena – Priya bhatia
जो तूने_दिया उसे हम याद करेंगे, हर पल तेरे मिलने की #फ़रियाद करेंगे, चले_आना जब कभी ख्याल आये मेरा, हम रोज़ खुदा से पहले “तुझे” याद करेंगे।
श्रीमती ने बालपन में ही खेल -खेल में मंदिर के एक मुनि को अपना पति स्वीकार कर लिया | अब श्रीमती सयानी हो चुकी है तो उसके सामने विवाह के कई प्रस्ताव आ रहे हैं और वह सब को अस्वीकार कर रही है| क्या वास्तव में श्रीमती को मुनि पति के रूप में प्राप्त होते हैं? क्या मुनि गृहस्थ जीवन स्वीकार करते हैं ? इंद्र चंद्र शास्त्री जी के द्वारा लिखी गई कहानी प्रेम के धागे जानते हैं सुमन वैद्य जी की आवाज में …
अलग-अलग जाति से संबंध रखने वाले एक ऐसे प्रेमी युगल की कहानी जो एक दूसरे से प्रेम करते हैं विवाह भी करना चाहते हैं किन्तु सामाजिक बाधाओं के डर से डर कर कायरों की भांति पीछे हट जाते हैं
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