बैरिस्टर दया शंकर मेहता वायसराय की कार्यकारिणी सभा के मेंबर नियुक्त हुए तो चारों तरफ उनके पक्ष और विपक्ष भी बन गए पत्नी राजेश्वरी , सुपुत्री मनोरमा, और स्वयं वे अंग्रेजों से बहुत प्रभावित थे। किंतु उनका सुपुत्र, बालकृष्ण उनका सबसे बड़ा विरोधी बन गया और आखिरकार उसने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली।
माधव और उसके पिता घीसू दोनों के दोनों बेहद आलसी, निकम्मे और कामचोर प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। उन्हें फटे -चीथडे में रहना मंजूर है किंतु वे दोनों मेहनत कर पैसा कमाना नहीं चाहते। कहानी में बेहद संवेदनहीन दृश्य तब आता है जब घीसू और माधव लालच और भूख मिटाने के लिए माधव की बीवी बुधिया का इलाज तक नहीं करवाते और वह प्रसव पीड़ा से कराह कर मर जाती है। कहानी मे दोनों का अमानवीय रूप तब और झलकता है जब दोनों बुधिया के अंतिम संस्कार और कफ़न के लिए जो लोगों से पैसे प्राप्त करते हैं उनका भी उपभोग वह अपने खाने-पीने में उड़ा देते हैं ।एक इंसान के मन की दुर्बलता के चलते किस प्रकार मनुष्य अपनी मानवता को छोड़ देता है इस बेहद संवेदनशील भावों को झकझोर देने वाली प्रेमचंद की कहानी कफ़न, जरूर सुनिए सिर्फ़ गाथा पर
कहानी का नायक एक मेहनती गरीब क्लर्क है ,जबकि उसका मित्र ईश्वरी एक बड़े जमीदार का लड़का है |नायक को अपने अमीर दोस्त के साथ कुछ दिन बिताने को मिलते हैं ईश्वरी के ठाठ- बाट, शानो- शौकत से नायक भी अपने को अछूता नहीं रख पाता है |कहीं ना कहीं नायक के मन में भी अमीरी का नशा चढ़ने लगता है| नायक के चरित्र में आए इस बदलाव को जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी नशा भूपेश पांडे जी की आवाज में…
हकीम जिला का किसी प्रयोजन से लेखक को अपने घर आने का निमंत्रण दिया जाता है |अब पूरी जगह यह चर्चा होने लगती है कि लेखक और हकीम जिला की बहुत गहरी दोस्ती है| अब इस बात का प्रभाव लेखक के जीवन पर किस प्रकार पड़ता है ,जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी मुफ्त का यश ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
चंद्रप्रकाश b.a. पास करके ठाकुर जी के बेटे को ट्यूशन पढ़ा कर अपनी जीविका चला रहा है | ठाकुर जी का पूरा परिवार चंद्र प्रकाश को अपने बेटे के समान प्यार और सम्मान देते हैं, किंतु कहानी के प्रसंग में चंद्रप्रकाश की नियत बदल जाती है और ठाकुर जी के यहां गहनों चोरी करता है |क्या चंद्र प्रकाश को अपने द्वारा किए गए गलत कार्य का कोई पश्चाताप होगा? क्या चंद्र प्रकाश की चोरी पकड़ी जाएगी? क्या ठाकुर जी का व्यवहार चंद्रप्रकाश के प्रति बदल जाएगा? संवेदना से भरी प्रेमचंद्र की कहानी चमत्कार में सुनते हैं, सुमन वैद्य जी की आवाज में….
पुनर्विवाह का दूसरा नाम है समझौता । हर परिस्थिति से , हर हालात से समझौता करना ही पुनर्विवाह है। हालात से तो समझौता किया जा सकता है लेकिन प्यार में समझौता ? कभी नहीं । फिर ऐसा समझौता क्यों करना पड़ा ? क्या मजबूरी थी ?
लड़की देखने जाने के लिए उतावला परिवार होटल पहुँचता है। और वहाँ पर लड़की के पिता को स्वागत के लिए ना पाकर नाराज होता है । जब लड़की अपनी माँ के साथ आती है तो अफसर पुत्र के पिता उसकी लंबाई नापते हैं। और वास्तविक रंग देखने के लिए लड़की को मुँह धोने के लिए कहते हैं ।उसके बाद तो वहाँ का सारा माहौल बदल जाता है।
साधारणत: धोबियों का रंग साँवला पर मुख की गठान सुडौल होती है ।बिबिया ने यह विशेषता गेंहएँ रंग के साथ पाई है । उसका हँसमुख स्वभाव उसे विशेष आकर्षण देता है। सुडौल, गठीली शरीर वाली बिबिया को धोबिन समझना कठिन था। पर थी वह धोबिनों में भी सबसे अभागी धोबिन। अपना ही नहीं वह दूसरों का काम करके भी आनंद का अनुभव करती थी। पाँचवें वर्ष में ब्याह हो गया। पर गौने से पहले ही वर की मृत्यु ने इस संबंध को तोड़ दिया। जिस प्रकार उच्च वर्ग की स्त्री का गृहस्थी बसा लेना कलंक है उसी प्रकार नीच वर्ग की स्त्री का अकेला रहना सामाजिक अपराध है। कन्हैया ने उसका दोबारा ब्याह रचा दिया लेकिन——-
आजादी की लड़ाई में सारा देश भाग ले रहा था। ऐसे में गाँव कहाँ पीछे रहने वाले थे ।कोदई मुखिया के गिरफ्तारी पर नोहरी बुढ़िया ने जब नौजवानों को ललकारा, तो जैसे क्रांति की एक नई लहर दौड़ गई।
एक आम लड़की की तरह सुमिता ने भी शादी के सुनहरे सपने देखे थे। सोम के रुप में जीवनसाथी को पाकर सुमिता जैसे खुशी से पागल सी हो गई थी। लेकिन उसका यह भ्रम बहुत जल्दी टूट गया। शादी के तीन दिन बाद ही उसे सोम की बीमारी का पता चला । उसे लगा कि जैसे वह ठगी गई है। तब, उसने एक अहम फैसला लिया।
2 साल पहले की बात है आज करमांवाली, डोली वाली लड़की ,एक औरत बन चुकी है| शादी के बाद करमांवाली के जीवन में जो कुछ भी घटित हुआ वह उसके चेहरे पर साफ -साफ झलक रहा है |आज जब लेखिका की पुनः करमांवाली से मुलाकात होती है तो लेखिका ने करमांवाली के संघर्ष को कहानी का रूप दिया है| करमांवाली के जीवन को अमृता प्रीतम ने किस तरीके से कहानी का रूप दिया है? जानने के लिए सुनते हैं अनुर्वी मेहरा की अवाज़ में कहानी करमांवाली…2 साल पहले की बात है आज करमांवाली, डोली वाली लड़की ,एक औरत बन चुकी है| शादी के बाद करमांवाली के जीवन में जो कुछ भी घटित हुआ वह उसके चेहरे पर साफ -साफ झलक रहा है |आज जब लेखिका की पुनः करमांवाली से मुलाकात होती है तो लेखिका ने करमांवाली के संघर्ष को कहानी का रूप दिया है| करमांवाली के जीवन को अमृता प्रीतम ने किस तरीके से कहानी का रूप दिया है? जानने के लिए सुनते हैं अनुर्वी मेहरा की अवाज़ में कहानी करमांवाली…
गैंडा- मोटी चमड़ी का , थोड़ा कुरूप सा दिखने वाला प्राणी। राज मेहरा, सुपर्णा की बचपन की सहेली थी और स्कूल कॉलेज की हर प्रतियोगिता में पूरे समय बराबर रहकर अन्त में बाज़ी मार ले जाती थी । जब काफ़ी समय बाद दोनो सहेलियाँ मिली तो अपने सुदर्शन फौजी पति के सामने राज के मोटे काले पति को देखकर सुपर्णा को ना जाने क्यों बहुत सन्तोष हुआ था। पर जब रूपसी वाचाल राज , सुपर्णा के घर रहने आयी और सहेली के पति को ही पुरस्कार की तरह जीत लिया, तब सुपर्णा ये विश्वासघात सहन ना कर पायीं. फिर सुपर्णा ने उस आघात को कैसे झेला? क्या एक पत्नी , सहेली के सामने एक बार फिर हार गयी या उसने एक ऐसा कदम उठाया जिसके बारे में राज ने कल्पना भी ना करी थी . जानिए शिवानी की इस कहानी “गैंडा “ में … ((सुनिए शिवानी जी की लेखनी का जादू इस कहानी गैंडा में , जहाँ एक सहेली और पत्नी के मनोभवों को बड़ी सुंदरता और सजीवता से प्रस्तुत किया गया है )
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Anju Sharma