सामाजिक व्यवस्था के उस रूप को देखकर गरीब व्यक्ति की उस मनोदशा को दर्शाती यह कहानी जब वह श्रमजीवी लोगों को अपनी जैसी स्थिति में पाता है तो वह बिना श्रम के ही अपना जीवन व्यतीत करना चाहता है ऐसे में वह सारे मानवीय और आत्मीय रिश्तो को दफन कर देता है वो संवेदनाओ से विहीन होकर किसी अपने की मृत्यु का भी शौक नहीं करता अपितु उस बात का फायदा उठाकर अपनी जिंदगी का लुत्फ उठाना चाहता है । हृदयस्पर्शीऔर मार्मिक कहानी है मुंशी प्रेमचंद्र की कफन।
चोखे लाल शर्मा एक रसिक किस्म के संपादक हैं | स्त्रियों के कैसे भी लेख उनकी भूरी- भूरी प्रशंसा चोखे लाल शर्मा जी के द्वारा जरूर होती है |एक बार उग्र प्रेम को झलकाती एक अश्लील कविता प्राप्त हुई | इस कविता के बाद चोखे लाल शर्मा जी का क्या हुआ? क्या अब भी उनका रसिक मिजाज बाकी है ?सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी रसिक संपादक भूपेश पांडे की आवाज में
कहानी के माध्यम से बड़े ही रोचक ढंग से यह समझाने की कोशिश की गई है कि नशा चाहे भांग का हो ,शराब का या कोई और नशा हो हमेशा खराब होता है| नशे के सेवन से मनुष्य सही और गलत निर्णय लेने में अक्षम हो जाता है |कहानी में बहुत अधिक पंडितबाद पर कटाक्ष भी किया गया है| कहानी के मुख्य पात्र राय साहब पंडित घसीटे लाल और जिलाधीश मिस्टर बुल (जोकि विलायत से आये हैं ),उनके बीच नशे को लेकर संवाद पर व्यंग किया गया है | प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई इस रोचक कहानी यह भी नशा, वह भी नशा सुनते हैं , नयनी दीक्षित की आवाज में …
अलग-अलग जाति से संबंध रखने वाले एक ऐसे प्रेमी युगल की कहानी जो एक दूसरे से प्रेम करते हैं विवाह भी करना चाहते हैं किन्तु सामाजिक बाधाओं के डर से डर कर कायरों की भांति पीछे हट जाते हैं
नानक चंद जी धर्मनिष्ठ, दिल के मजबूत आदमी वाले महाजन है |उनके पास एक धमकी भरा पत्र आता है |जिसमें उनसे ₹25000 की मांग की गई है| नानक चंद जी इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं और उनका क्या होता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी के द्वारा लिखी गई कहानी खुदाई फौजदार ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
कहानी का नायक एक मेहनती गरीब क्लर्क है ,जबकि उसका मित्र ईश्वरी एक बड़े जमीदार का लड़का है |नायक को अपने अमीर दोस्त के साथ कुछ दिन बिताने को मिलते हैं ईश्वरी के ठाठ- बाट, शानो- शौकत से नायक भी अपने को अछूता नहीं रख पाता है |कहीं ना कहीं नायक के मन में भी अमीरी का नशा चढ़ने लगता है| नायक के चरित्र में आए इस बदलाव को जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी नशा भूपेश पांडे जी की आवाज में…
प्रभाकर और रजनी का विवाह हुए दो वर्ष से अधिक हो गया था। किन्तु विवाह-सुख किसे कहते हैं, यह उसे कभी नहीं ज्ञात हुआ। उसे तो अभी तक यही अनुभव होता रहा कि एक सिपाही का जीवन कितना कठोर हो सकता है।ऐसा इनकी जिंदगी में क्यों हो रहा है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भूपेश पांडे जी की आवाज में अज्ञेय की लिखी कहानी 1 घंटे में
एक स्वयंसेवक को जेल हो जाती है और उसकी पत्नी को यहां तक कि अपने ससुर का भी सहारा नहीं मिलता है |ऐसे में ज्ञानचंदकी पत्नी उसका सहारा बनती है| जानते हैं नारी के निर्भीक ,अलौकिक रूप को प्रेमचंद के द्वारा लिखी गई कहानी अनुभव में भूपेश पांडिया की आवाज में
वैवाहिक जीवन के एकपहलू में जितने जितने सुख हैं अगर उसके दूसरे पहलू को देखा जाए तो वह उतना ही हृदय विदारक और भयानक है | कहानी में नायक के जीवन में अपने वैवाहिक जीवन की इस समस्या के समाधान के लिए नायक कौन-कौन से प्रयत्न करता है | जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी हीला भूपेश पांडे जी की आवाज में
“मन “की प्रसन्नता व्यवहार में उदारता बन जाती है “कहानी “में एक विधवा स्त्री “बूटी” अपने जीवन से खिन्न है और यही खिन्नता उसके व्यवहार में आ जाती है किंतु एक प्रसंग से उसके व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है वो कौन सा प्रसंग था ? और उसके बाद क्या हुआ —–जानने के लिए सुनते हैं कहानी “ज्योति”___
देश और काल का फैलाव वहीं सबसे अधिक होता है जहाँ उनका महत्त्व सबसे कम होता है -जब-जब जीवन में तनाव आता है और सारी प्राणशक्ति एक केन्द्र या बिन्दु में संचित होने लगती है, तब-तब देश-काल भी उसी अनुपात में सिमट आते हैं… देवकान्त नाव खे रहा है, उसके सामने, आगे-पीछे कहीं, उस क्षण के सिवा कुछ नहीं है जिसमें वह है और नाव खे रहा और मोहन की बड़ी-बड़ी काली आँखों की ओर जा रहा है – मोहन जो एक हिरन का छौना है जिसे नीलिमा ने उसे दिया था – किन्तु फिर भी उस क्षण में ही कई देश-काल संचित हो आये हैं – वह एक साथ ही कई स्थानों, कई कालों में जी रहा है, कई घटनाओं का घटक है…
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
कहानी पाश्चात्य सभ्यता लिवइन रिलेशनशिप आधारित है |प्रतिमा बिना शादी के प्रणव के साथ रह रही है वह उसके बच्चे की मां बनने जा रही है| उसके अनुसार स्वतंत्रता, अस्तित्व, वजूद, पसंद, सब शादी के साथ मिटने लगते है| किन्तु क्या उसे एहसास हो पायेगा कि सारे रिश्ते रस्मों के मोहताज होतें हैं |
शारीरिक निर्बलता नेत्रहीन होना एक कृषक के बेटे नॉर के लिए जैसे अभिशाप बन गया हो |माता -पिता की मृत्यु के पश्चात उ उसे आसपास के लोगों की प्रताड़ना अलग-अलग रूप में सहनी पड़ी |किसी के लिए हंसी का पात्र होता ,यहां तक कि उसके अपने भी उसके साथ भिखारी जैसा व्यवहार करते | क्या नॉर अपनी शारीरिक निर्बलता को अपने ऊपर हावी होने देगा या या फिर डटकर मुकाबला करेगा कहानी में आगे क्या होगा उसके साथ इसे जानने के लिए गाय दी मोपासां की कहानी बेहद मार्मिक कहानी नेत्रहीन, सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
द्रौपदी जब अपना शील खो रही थी , तब आप कहां थे कृष्ण ??? कृष्ण और उद्धव जी के बीच में चल रहे संवाद को उस संदर्भ मे उस प्रसंग को प्रेषित करता है जब धर्मराज युधिष्ठिर, दुर्योधन से द्युत क्रीडा में पराजित हो गए थे | भगवान श्री कृष्ण उसी संदर्भ में उद्धव को स्पष्टीकरण देते हैं | सुनते हैं इस संवाद को अमित तिवारी जी की आवाज में……
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नारी अपना पूरा जीवन घर बनाने में लगा देती है ।फिर भी उस घर में निर्णय लेने का अधिकार उसे क्यों नहीं दिया जाता ? क्यों हमेशा घर का आदमी ही निर्णय लेने का अधिकारी होता है ? लेकिन छाया को यह बात अब गवारा नहीं है। इसलिए उसने निर्णय लिया और पति को जता भी दिया कि जितना अधिकार उसका है घर पर, उतना ही अधिकार छाया का भी है।
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tiwariamit