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“सोमा मोंडल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की पहली महिला अध्यक्ष, जिन्होंने अपने नेतृत्व और दूरदृष्टि से भारतीय स्टील उद्योग में नए आयाम स्थापित किए हैं। फोर्ब्स द्वारा दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल, सोमा मोंडल की यात्रा प्रेरणादायक है। उनके प्रबंधन के पहले साल में सेल का मुनाफा तीन गुना बढ़ा और उन्होंने कंपनी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। एक छोटे से ओडिया परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इतिहास रचा।
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अरुंधति ने न केवल बैंकिंग की दुनिया में महिलाओं का मान बढ़ाया, बल्कि उन्होंने डिजिटल क्रांति और सामाजिक सुधारों का मार्ग भी प्रशस्त किया। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में और जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरक यात्रा को सुनें!”
मेरे राम
सुनिए राम… महसूस कीजिए राम
“मेरे राम” एक ऐसा विशेष संग्रह है, जहाँ प्रभु श्रीराम केवल कथा के पात्र नहीं, बल्कि जीवन, आदर्श, मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं के रूप में आपके सामने उपस्थित होते हैं।
इस विशेष संकलन में सुनिए —
📖 रामचरितमानस की दिव्य चौपाइयाँ और प्रसंग
🎙️ “मानव हैं मेरे राम” जैसी भावपूर्ण श्रृंखला
🪔 राम पर आधारित कविताएँ, कथाएँ और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ
यह संग्रह आपको राम के अनेक रूपों से जोड़ता है —
आराध्य राम, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, और मानवता के प्रतीक राम।
यह केवल श्रवण नहीं… एक आत्मिक यात्रा है —
राम को समझने की, राम को जीने की, राम को महसूस करने की।
🎧 सुनिए
“मेरे राम”
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“कल्पना चावला: वो नाम जिसने अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों को छूकर हर भारतीय को गर्व से भर दिया। अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली महिला, कल्पना का सपना बचपन से ही आसमान से परे देखने का था। उनकी यह जिज्ञासा और मेहनत उन्हें अंतरिक्ष तक ले गई। 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में कदम रखने के बाद, उन्होंने अपनी दूसरी उड़ान के दौरान 2003 में सभी के दिलों में अमर हो गईं। कल्पना की कहानी न केवल उनकी उपलब्धियों का वर्णन करती है, बल्कि हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है जो बड़े सपने देखता है।
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रूढ़िवादी परिवार से होने तथा पति के द्वारा दी गई यातना के बावज़ूद एक अबला सी लगने वाली महिला कैसे करोड़ों रुपए की कंपनी की मालकिन बनी? जानिए अबला से सबला बनने का पूरा सफ़र भारती सुमारिया जी का ,आम आदमी की खास कहानी में….
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया परमवीर चक्र (29 नवंबर 1935 – 5 दिसंबर 1961) एक भारतीय सैन्य अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के सदस्य थे। वह परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले एकमात्र संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक हैं। वह किंग जॉर्ज के रॉयल मिलिट्री कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र थे।
कठिन परिश्रम ,दृढ़ शक्ति दूरदर्शिता और कुछ कर गुज़रने का सपना लेकर कीमत राय गुप्ता जी ने किस प्रकार मात्र 10000 से 17 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया ? हैवेल्स इंडिया लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनी के मालिक कीमत राय गुप्ता की ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव के कई पहलुओं से रू-ब-रू होते हैं ,मज़ीद की आवाज़ से जानते हैं आम आदमी खास कहानी में…
कहते हैं “ अपनी धरती और जड़ों से जुड़कर ही मनुष्य अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है क्योंकि वे जड़े ही उसकी ज़िन्दगी को मज़बूती देती हैं जिनके सहारे वह आगे सदा आगे बढ़ता है और ज़िन्दगी को गहराई से समझता है “ सब उसे प्यार और दुलार से बाला पुकारते थे और बहुत कम उम्र में ही बाला ने इस बात को समझ कर जीवन में धारण कर लिया था इनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है , आइये जानते हैं इनके बारे में
अब्दुल हमीद मसऊदी (1 जुलाई 1933 – 10सितम्बर 1965)भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त की जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला।युद्ध में शहीद होने से पहले पाकिस्तानी सेना के आठ पैटन टैंको को नष्ट कर लड़ाई का रुख पलट दिया था| पाकिस्तान को भागना पड़ा था और इस तरह से भारतीय सेना को विजय मिली थी
“लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिड हमले के बाद सिर्फ अपने जीवन को नहीं बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने का प्रण लिया। उनकी साहसिकता और सक्रियता ने कई लोगों को प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरणादायक कहानी को सुनें!”
जब मैंने पहली बार उन्हें देखा तो वह रहमान भाई की खिड़की में बैठी लंबी-लंबी गालियाँ और कोसने दे रही थी । उस दिन पहली दफा मुझे मालूम हुआ कि हमारी इकलौती सगी फूपी, बादशाही खानम है। हर ईद- बकरीद को मेरे अब्बा मियां बेटों को लेकर सीधे फूपी अम्मा के यहाँ कोसने और गालियाँ सुनने जाया करते। मरते दम तक भाई- बहन का मिलन न हुआ । जब अब्बा मियां पर फालिश का चौथा हमला हुआ और बिल्कुल ही वक्त आ गया तो हलहलाती, छाती कूटती, सफेद पहाड़ की तरह भूचाल लाती हुई बादशाही खानम उसी ड्यूटी पर उतरी जहाँ अब तक उन्होंने कदम नहीं रखा था।
‘साहब मर गया’ जयंत राम ने बाजार से लाए हुए सौदा के साथ यह खबर लाकर दी। वह काना साहब -जैक्सन । वह मजे से सक्खू बाई को झोंटे पकड़कर पीटता था। फ्लोमीना और पीटू को मारता था ।मैंने एक दिन मौका पाकर सक्खू बाई को पकड़ा’ क्यों कमबख्त ! यह पाजी तुम्हें मारता है । तुझे शर्म नहीं आती? रोज कभी मारता है बाई? वह बहस करने लगी। तुझे शर्म नहीं आती सफेद चमड़ी वाले की जूतियाँ सहती है । इन लुटेरों ने हमारे मुल्क को कितना लूटा है? तुम्हें इसका इतना दर्द क्यों होता है? काहे को नहीं होगा दर्द? वह हमारा मर्द है ना ! वह शक्ल से रोबीला और खूबसूरत था। ऊँची पहुँच वाले बाप की बेटी डोर्थी से शादी करने के बाद भी उसका छिछोरापन कम ना हुआ।
जिस अवकाश के समय को लोग आमोद प्रमोद के लिए सुरक्षित रखते हैं उसी को मैं इस खंडहर और उसके क्षत-विक्षत चरणों पर पछाड़े खाती हुई भागीरथी के तट पर सुख से काट देती हूँ। कब और कैसे मुझे उन बालकों को कुछ सिखाने का ध्यान आया मैं नहीं जानती। मेरे विद्यार्थी पीपल की छाया में मेरे चारों ओर एकत्र हो गए। वह गोधूलि मुझे अब तक ना भूली जब एक मलिन स्त्री ने मुझे कुछ शब्दों और कुछ संकेतों से कहा कि उसके अकेले लड़के को भी और बच्चों के साथ बैठने दिया करूँ। तो यह कुछ तो सीख सकें । वह घीसा था जिसकी सचेत आँखों में ना जाने कौन सी जिज्ञासा भरी थी । जब उन लोगों को मुझे छोड़ जाना था तब मेरा मन बहुत ही अधीर हो उठा। मैं घीसा को ढूँढ रही थी । हार कर मैं चली किंतु अंधेरे में एक काला धब्बा आता दिखा। वह घीसा था। उसके दोनों हाथों में एक बड़ा तरबूज था ।घीसा के पास न पैसा था ना खेत। तब क्या वह इसे चुरा लाया है? मन का संदेह बाहर आया। तब पता चला कि घीसा आज नया कुर्ता दे आया और उसके बदले में मेरे लिए तरबूज लाया है। किंतु चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि गर्मी में वह कुर्ता पहनता ही नहीं।
रोजी मेरे पिताजी के राजकुमार विद्यार्थी द्वारा दी गई एक कुत्ती थी। एक रोज जब हम आम की डाल पर झूल – झूल कर अपने संग्रहालय का निरीक्षण कर रहे थे, तब हमने देखा कि रोजी़ मुँह में किसी जीव को दबाए हुए ऊपर आ रही है। आकार में वह गिलहरी से बढ़ा न था पर आकृति में स्पष्ट अंतर था। रामा उसे रुई की बत्ती से दूध पिलाता। कुछ ही दिनों में वह स्वस्थ और पुष्ट होकर हमारा साथी हो गया। बाबू जी से यह सुनकर कि हमारे लिए टट्टू आया है , हम उससे रुष्ट और अप्रसन्न ही घूमते रहे पर अंत में उसने हमारी मित्रता प्राप्त कर ही ली। नाम रखा गया रानी। फिर हमारी घुड़सवारी का कार्यक्रम आरंभ हुआ। एक छुट्टी के दिन दोपहर में सबके सो जाने पर हम रानी को खोलकर बाहर ले आए। मेरे बैठ जाने पर भाई ने अपने हाथ की पतली संटी उसके पैरों में मार दी। इससे ना जाने उसका स्वाभिमान आहत हो गया या कोई दुखद स्म्रति उभर आयी । वह ऐसे वेग से भागी मानो सड़क पर नदी- नाले सब उसे पकड़कर बाँध रखने का संकल्प किए हो। कुछ दूर मैंने अपने आप को उस उड़न खटोले पर सँभाला परंतु गिरना तो निश्चित था !
Reviews for: सुषमा स्वराज: नेतृत्व में निडरता, संवाद में गरिमा!