मगध के सम्राट श्रेणिक दरबार में राजकुमार अभय कुमार से प्रश्न करते हैं, कि राजगृह में कितने धर्मात्मा और कितने पापी हैं ?अब राजकुमार अभय किस प्रकार सम्राट को इस प्रश्न का उत्तर दे पाते हैं |बेहद रोचक ढंग से प्रस्तुत की गई इंद्रजीत शास्त्री द्वारा लिखी गई कहानी दो पापी, सुनते हैं सुमन वैद्य की आवाज में
श्रीमती ने बालपन में ही खेल -खेल में मंदिर के एक मुनि को अपना पति स्वीकार कर लिया | अब श्रीमती सयानी हो चुकी है तो उसके सामने विवाह के कई प्रस्ताव आ रहे हैं और वह सब को अस्वीकार कर रही है| क्या वास्तव में श्रीमती को मुनि पति के रूप में प्राप्त होते हैं? क्या मुनि गृहस्थ जीवन स्वीकार करते हैं ? इंद्र चंद्र शास्त्री जी के द्वारा लिखी गई कहानी प्रेम के धागे जानते हैं सुमन वैद्य जी की आवाज में …
गौरा शूद्र जाति की गरीब मां की बेटी है | जिसकी शादी मंगरू नामक एक परदेसी से हो जाती है, लेकिन अचानक मंगरू गौरा को छोड़कर बिना कुछ बताए वहां से चला जाता है, कई साल बाद अचानक एक बूढ़ा व्यक्ति गौरा के पास आता है और यह कहकर कि मंगरू ने उसे बुलाया है अपने साथ कोलकाता ले जाता है किंतु बाद में जब गौरा कोलकाता पहुंचती है तो वह बहुत अचंभित हो जाती है आखिर ऐसा क्या हुआ गौरा के साथ?क्या मंगरू ने वापस गौरा को अपने पास बुलाया था ? बूढ़ा व्यक्ति कौन था ?पूरी कहानी को जाने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी शुद्र सुमन वैद्य जी की आवाज में..
जयराज एक चित्रकार है और रानीखेत की सुंदर वादियों में प्रकृति के सुंदर चित्र बनाता है किंतु इन चित्रों में मनुष्य की अनुपस्थिति उसे अपने चित्र में अधूरे पन का एहसास दिलाती है इसी बीच उसके एक मित्र का पत्र आता है कि वह अपने पत्नी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उसे रानीखेत भेज रहा है जयराज का चित्रकार मन नारी के सौंदर्य को चित्रित करने की कल्पना की उड़ान लेने लगता है क्या होता है जब उसकी मुलाकात नीता से होती है क्या वास्तव में उसकी कल्पना यथार्थ हो पाती है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी चित्र का शीर्षक सुमन वैद्य जी की आवाज में
कहानी एक एक मां बचन की है| जिसके दो बेटे बिन्नी और लाली है| बचन अपने छोटे बेटे बिन्नी के साथ मुंबई की एक छोटी बस्ती में रह रही है| लाली एक दूसरे शहर में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रह रहा है |लाली के अस्वस्थ होने की खबर जब बचन को मिलती है ,तो वह बड़ी बेचैन होकर लाली को देखने जाती है | किंतु अब यहां उसे बिन्नी की याद सताने लगती है |मोहन राकेश के द्वारा लिखी गई कहानी आर्द्रा में जान सकते हैं मां की ममता को ,जिसे आवाज दी है सुमन वैद्य जी ने
जहाँ चील की आँखें अपने लक्ष्य को देख कर वार करती हैं, वहाँ वे अदृश्य चीलें अंधी होती हैं, और अंधाधुंध हमला करती हैं। उन्हें झपट्टा मारते हम देख नहीं पाते और हमें लगने लगता है कि जो कुछ भी हुआ है, उसमें हम स्वयं कहीं दोषी रहे होंगे। नायक की पत्नी शोभा नायक के साथ नहीं रहती है अचानक एक दिन नायक को शोभा एक पार्क में दिखाई देती है| नायक फिर से शोभा से मिलना चाहता है |क्या नायक का शोभा से पुनः मिलन हो पाएगा ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी चीले, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
स्टेशन के प्लेटफार्म में 2 औरतें जोर-जोर से लड़ रही है| उन दोनों औरतों का दावा एक छोटे दूध पीते बच्चे की मां होने का है| इस विषम परिस्थिति में जानने के लिए कि कौन उस बच्चे की वास्तविक मा है मां है? उसके पीछे क्या कहानी है? सुनते हैं भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी माता -विमाता ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
गुरुत्वाकर्षण से परे वो चली जा रही थी ऊपर… बहुत ऊपर… पा गयी थी वो “महामुक्ति”… आज देह के साथ उसकी आत्मा भी मुक्त हो गयी थी।कहानी एक मध्यमवर्गीय लड़की ललिता की है जिसकी मृत्यु हो चुकी है |किंतु आज उसकी रूह वह सब देख रही है जो उसने जीते जी कभी नहीं देखा क्या ललिता की रूह को मुक्ति मिल पाएगी ?जानने के लिए सुनते हैं कहानी महामुक्ति ,अंजू जेटली की आवाज में
कहानी एक अनोखे चोर की है| गांव वाले चोर को पकड़ लेते हैं |उसके पास से एक पुरानी गीली धोती, लगभग दो सेर चने और एक पीतल का लोटा मिलता है |फिर भी गांव वाले उसे थाने ले जाते हैं| नरायन चोर को भाग जाने के लिए कहता भी है| किंतु चोर नहीं भागता | क्या है इसके पीछे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं एक चोर की कहानी ,निधि मिश्रा की आवाज में
“दीपशिखा”,महादेवी वर्मा का पाँचवाँ कविता-संग्रह है। इस संग्रह के गीतों का मुख्य प्रतिपाद्य स्वयं मिटकर दूसरे को सुखी बनाना है। दीपशिखा के संग्रह से लिया गया गीत “दीप मेरे जल अकम्पित” सीमा अग्रवाल की आवाज में
तिलिस्मी दुनिया जहां बड़े लोग, बड़े व्यापार, बड़ी पार्टियां, बड़ी सुंदरता ,बड़ी मारकाट ,बड़ी सफलता और चकाचौंध कर देने वाली जिंदगी को पाने के लिए इंसान ऐसी नींद के आगोश में चला जाता है कि उसके कारण वह अपने सच्चे रिश्ते, सच्चा प्यार और यहां तक की अपने से भी प्यार करना भूल जाता है |वह समझ नहीं पाता है कि उस नींद के बाहर की दुनिया अब उसके लिए कितनी अजनबी हो चुकी है ?एक आम -इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में आए हुए कई बदलावों को चित्रित करती हुई धीरेंद्र अस्थाना की कहानी नींद के बाहर ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
घबराहट में किसी ने गाड़ी का रेडियो चला दिया था। रेडियो में भी अब उतनी जिद नहीं बची थी शायद, नहीं तो रात के बारह बजे, भला कोई समय है राग यमन कल्याण बजाने का… स्वप्नमय बाबू कचहरी में कार्यरत हैं| उनका टाइपिंग में अनुभव कमाल का है| अब स्वप्नमय बाबू और रेडियो के बीच में क्या संबंध है इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं पंकज मित्र के द्वारा लिखी गई कहानी जिद्दी रेडियो अमित तिवारी जी की आवाज में
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janikamalu1@gmail.com
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junaidansariansari019@gmail.com
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