27 नवंबर 1895 को अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी आखिरी वसीयत लिखी थी। इसी वसीयत के आधार पर नोबेल पुरस्कारों की स्थापना हुई। 1901 में पहली बार नोबेल पुरस्कार दिए गए। अब तक 975 शख्सियत और संस्थानों को 609 नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं।
एशिया का एक देश इराक़ 3 अक्टूबर 1932 को ब्रिटेन की गुलामी से स्वतंत्र हुआ। इराक़ की राजधानी बगदाद है। इराक़ की 6 पड़ोसी देश ईरान ,कुवैत जॉर्डन ,सऊदी अरब ,सीरिया और तुर्की है ।आधिकारिक भाषाएं अरबी और कुर्दिश है। 2006 में सद्दाम हुसैन के तानाशाही और मानवता के खिलाफ़ अपराध के लिए उन्हें फ़ासी की सज़ा दी गई।
भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी और पहली उड़ान 1 अप्रैल 1933 को भरी थी। भारतीय वायु सेना को आजादी से पहले ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद 1950 में इसके नाम से रॉयल शब्द हटा दिया गया था। भारतीय वायु सेना ने 1933 में पहली बार उड़ान भरी थी।
भारतीय नृत्य सम्राट शंभू महाराज का वास्तविक नाम ‘शंभूनाथ मिश्रा’ था। नृत्य के संग ठुमरी गाकर उसके भावों को विभिन्न प्रकार से इस अदा से शंभू महाराज प्रदर्शित करते थे कि दर्शक मुग्ध हुए बिना नहीं रह सकते थे ।शंभू महाराज को 1967 में ‘संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप’ से तथा 1956 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था।
भारत संघ में त्रिपुरा राज्य विलय होने से पूर्व एक रियासत थी। त्रिपुरा के अंतिम महाराज बीर विक्रम सिंह की मृत्यु के बाद पत्नी महारानी कंचन प्रभा ने इसकी बागडोर संभाली ।1972 में पूर्ण इसे राज्य का इसको दर्जा मिला ।
गुरु नानक देव जी की 500 जयंती के अवसर पर अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।यह पंजाब राज्य विधानमंडल द्वारा पारित एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था। विश्वविद्यालय को यूजीसी द्वारा “उत्कृष्टता की क्षमता वाले विश्वविद्यालय” का दर्जा भी दिया गया है।
3 नवंबर, 1957 की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई, जब सोवियत संघ ने पहली बार स्पुतनिक-2 स्पेसक्राफ़्ट से लाइका नाम की स्ट्रीट फ़ीमेल डॉग को अंतरिक्ष में भेजा. वैज्ञानिक दावा करते हैं कि लाइका को स्पेस में भेजने के प्रयोग ने इंसानों के अंतरिक्ष तक पहुंचने का रास्ता साफ किया
आपको चित्तौर का सिंहासन सुखद हो, देश की श्री-वृद्धि हो, हिन्दुओं का सूर्य मेवाड़-गगन में एक बार फिर उदित हो। भील, राजपूत, शत्रुओं ने मिलकर महाराणा का जयनाद किया, दुन्दुभि बज उठी। मंगल-गान के साथ सपत्नीक हम्मीर पैतृक सिंहासन पर आसीन हुए। अभिवादन ग्रहण कर लेने पर महाराणा ने महिषी से कहा-क्या अब भी तुम कहोगी कि तुम हमारे योग्य नहीं हो?इस पूरी कथा को जाने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी चित्तौड़ निधि मिश्रा की आवाज में
‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य में विकर्ण को एक विवेकशील व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है। कौरवों की विशाल सभा के मध्य जब दुःशासन शस्त्रबल की महत्ता और शास्त्रबल को निर्बलों का शस्त्र कहकर शास्त्रों के प्रति अपनी अश्रद्धा तथा अनास्था प्रकट करता है तो विकर्ण इस अनीति को सहन नहीं कर पाता है।इसी संदर्भ में यह पंक्तियां लिखी गई है
Reviews for: Nobel Prize – 27 Nov