तूफान अपने साथ क्या मंजर लेकर आता है इन पंक्तियों में इसका उल्लेख किया गया है
70 वर्ष की सोना घोष का जीवन कभी वैभवशाली रहा है लेकिन अपने पति की मृत्यु के बाद उसका जीवन भजनाश्रम में गुजर रहा है दीपांकर को उसने अपने बेटे की तरीके से पाला है दीपांकर आज उससे मिलने तो आया है पर क्या दीपांकर सोना घोष के अंतिम पड़ाव में उसे अपने साथ रखता है हरिवंश राय बच्चन जी की भावुक कर देने वाली कहानी अंतिम पड़ाव पूजा श्रीवास्तव जी के द्वारा
ठंडी वायु के चलने से प्रकृति और समस्त जीव धारियों में उसका कैसा प्रभाव पड़ रहा है इस बात को दर्शाती यह कविता
जब कोई प्रेम में होता है,
तो उसके लिए
प्रेम के अलावा
और कुछ भी
महत्त्वपूर्ण नहीं रह जाता।
हर सोच, हर एहसास
उसी एक व्यक्ति के
इर्द-गिर्द घूमने लगता है।
इसी सच्चे और गहरे अहसास को
बड़े सादेपन से
यह मधुर गीत सामने रखता है—
भावना तिवारी की आवाज़ में।
जब मन अपनी प्रेयसी के बिछड़ने पर शिथिल हो जाता है ,तो पुनः उसे ऊर्जावान बनाने के लिए उन साथ बिताए हुए पलों को याद कर लेना चाहिए | इसी तरह की भावना से ओतप्रोत है, कविता की यह पंक्तियां….
हमारी कई बार ऐसी मनोस्थिति हो जाती है कि हमें अपने घर में ही वह प्रेम और शांति नहीं प्राप्त हो पाती है, जो घर के बाहर प्राप्त हो जाती है |कविता के माध्यम से इसी मनोभाव को प्रकट किया गया है…
कार्तिक और केशव दोनों मित्र हैं कार्तिक जब आईआईटी की परीक्षा में टॉप करता है तो उसके अंदर कहीं ना कहीं अहंकार आ जाता है और इसी कारण वह केशव से कुछ ऐसा कह देता है जिससे केशव का आत्मविश्वास और भी कम हो जाता है और वह फेल हो जाता है लेकिन हमेशा जीतने वाले को क्या कभी हार का सामना नहीं करना पड़ता और हमेशा हारने वाला क्या कभी जिंदगी में सफल नहीं हो सकता इस बात को दर्शाती है कहानी हार में भी जी जीत है
Thank you everyone for giving me so much love . मुझे इतना प्रेम देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
प्रेम में छली गयी स्त्री – ये कहानी है एक अत्यंत सुंदर युवती निम्मी की .. जो वर्षों बाद एक विवाह में शामिल होने वापस अपने घर जा रही है । रास्ते में ट्रेन में उसकी सहयात्री निकलती है उसके बचपन की सखी और फिर याद आती है वो सब बातें जो उस भाग्यवान रूपवती के विवाह निश्चित होने और उसके टूटने की कई घटनाओं से जुड़ी थी । … निम्मी की सहेली ने उसे ऐसा क्या बताया की निम्मी ने आधे रास्ते से ही वापसी कर ली। क्यों नहीं जा पायी निम्मी फिर उस घर में वापस ….
धीरेंद्र अस्थाना की कहानी मुहिम में, समाज में जो निर्धन और धनी के बीच बीच में जो भेदभाव है| उसी के चलते एक बालक मन ना चाहते हुए भी किस तरह जाने -अनजाने में गलत रास्ते पर, क्राइम की राह पर चल पड़ता है?किस तरह उसके मन में क्राइम को सच समझ लेने की मुहिम पैदा हो जाती है
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