स्वामी विवेकानंद को अपना आध्यात्मिक गुरु मानने वाली मार्गरेट एलिजाबेथ नोबेल ‘भगिनी निवेदिता’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। उन्होंने भारत देश को अपनी कर्मभूमि बनाया। विवेकानंद ने उन्हें ‘सिस्टर निवेदिता’ का नाम दिया ।स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रसार के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया।
डॉ राम मनोहर लोहिया स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर चिंतक, और एक लोकप्रिय नेता के रूप में जाने गए। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वह कई बार जेल भी गए। दिल्ली में उनकी स्मृति में राम मनोहर लोहिया अस्पताल की स्थापना की गई।
साल 1996 में 20 अक्टूबर को पहली बार विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस (World Osteoporosis Day) मनाया गया था। जिसकी शुरुआत यूनाइटेड किंगडम के नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस सोसाइटी ने यूरोपीय आयोग के साथ मिलकर एक अभियान के साथ की थी।
शिक्षा के महत्व को बताने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है ।विश्व में शिक्षकों की महत्ता को स्थापित किए जाने के उद्देश्य से 5 अक्टूबर 1994 से यह दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।
महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती, भारतीय सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक, 30 अक्टूबर 1883 को अजमेर, राजस्थान, भारत में अपने आश्रयस्थल में निधन हुआ था। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की और अपने जीवन के दौरान भारतीय समाज के सुधार और सामाजिक परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्ध रहे।स्वामी दयानंद सरस्वती की दिशा में अर्थनीति, सामाजिक न्याय, और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया गया और उनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरणास्त्रोत रहा।
विश्व रेडियोग्राफी दिवस पहली बार साल 2012 में मनाया गया था| इस दिन को मनाने की पहल यूरोपियन सोसाइटी ऑफ रेडियोलॉजी, रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका और अमेरिकन कॉलेज ऑफ रेडियोलॉजी की तरफ से की गई थी|तभी से हर साल दुनियाभर में इस दिन को 8 नवंबर को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|
10 नवंबर 1920 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले के अरवी में जन्मे दत्तोपंत ठेंगड़ी ने श्रमिक आंदोलनों को एक नयी दृष्टि और चेतना दी। राष्ट्र के औद्योगीकरण के साथ श्रम के राष्ट्रीयकरण के पक्षधर दत्तोपंत ठेंगड़ी ने भारतीयता के दर्शन को अपने जीवन में उतार कर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्वीकरण को आर्थिक पक्ष तक सीमित न रह कर मानवतावादी सोच का आह्वान किया
आपकी छोटी बेटी – ममता कालिया – शैफाली कपूर
जबकि एक ही मां -बाप की दो बेटियां हैं पपीहा और टुन्ना। मां-बाप अपनी बड़ी बेटी जो की कॉलेज छात्रा होने के साथ ही साथ स्टेज की नामी कलाकार भी है उसके गुणों का गुणगान करने में कोई कसर नहीं रखते। वहीं दूसरी ओर उनकी 13 साल की छोटी बेटी टुन्ना जो कि पढ़ने में भी अच्छी होने के साथ ही साथ बेहद संस्कारी भी है।उसके इन गुणों के होने के बावजूद कहीं ना कहीं उसे उपेक्षित महसूस कराते रहते हैं ।टुन्ना की मासूमियत इस कारण अपने को बड़ी बहन की तुलना में निम्न ही समझने लगी है। परंतु क्या किसी की पारखी नज़र टुन्ना को इस बात का एहसास दिला पायेगा कि वह भी अपनी दीदी से कुछ कम तो नहीं। दिल को छू लेने वाली ममता कालिया की कहानी सुने आपकी छोटी बेटी, शैफाली कपूर की आवाज़ में…
ZOHO कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू का अमेरिका छोड़कर अपने देश भारत वापस लौट कर आना और18000 करोड़ की कंपनी के मालिक बनने का सफर कैसा रहा? जानिए बेहद सादा जीवन व्यतीत करने वाले श्रीधर वेम्बू की असाधारण कहानी अमित तिवारी की आवाज़ में…
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