9 अक्टूबर 1949 आधुनिक प्रादेशिक सेना का गठन किया गया। प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948 में पारित होने के बाद इसका गठन किया गया। पहले गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने इसका उद्घाटन किया ।1962 ,1965 और 1971 के सैन्य अभियानों में इसकी सक्रिय रूप से इसे शामिल किया गया। रक्षा से जुड़ी कई ज़िम्मेदारियां निभाने में प्रादेशिक सेवा का अहम भूमिका रही है ।आतंक विरोधी अभियान में सेना की मदद ली जाती रही है। कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी भी प्रादेशिक सेना का हिस्सा हैं।
लचित बरफूकन का जन्म 24 नवंबर, 1622 को अहोम साम्राज्य के एक अधिकारी सेंग कालुक-मो-साई और माता कुंदी मराम के घर हुआ था। उनका पूरा नाम ‘चाउ लाचित फुकनलुंग’ था। लचित को अहोम साम्राज्य के राजा चक्रध्वज सिंह की शाही घुड़साल के अधीक्षक और महत्वपूर्ण सिमलूगढ़ किले के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। बहादुर और समझदार लचित जल्दी ही अहोम साम्राज्य के सेनापति बन गए। ‘बरफूकन’ लचित का नाम नहीं, बल्कि उनकी पदवी थी।
9 नवंबर 1947 के दिन जूनागढ़ का भारत में विलय हो गया|बाद में एक जनमत भी कराया गया, जिसमें जूनागढ़ की जनता ने खुद फैसला किया था कि उन्हें भारत के साथ रहना है. 20 फरवरी 1948 को हुए इस जनमत में 190870 लोगों ने भारत को चुना था, जबकि पाकिस्तान के लिए सिर्फ 91 लोगों ने मतदान किया था |
गुरु नानक देव जी की 500 जयंती के अवसर पर अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।यह पंजाब राज्य विधानमंडल द्वारा पारित एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था। विश्वविद्यालय को यूजीसी द्वारा “उत्कृष्टता की क्षमता वाले विश्वविद्यालय” का दर्जा भी दिया गया है।
शिक्षा के महत्व को बताने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है ।विश्व में शिक्षकों की महत्ता को स्थापित किए जाने के उद्देश्य से 5 अक्टूबर 1994 से यह दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।
7 अक्टूबर, 1944 को संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावित ढांचे को प्रकाशित किया गया। इनमें प्रस्तावों पर आगे चलकर याल्टा सम्मेलन (फरवरी 1945) में विचार-विमर्श किया गया, जहां सोवियत संघ, अमेरिका एवं ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई थी।
धीरेंद्र अस्थाना की कहानी पतन बोध में, इंसान पूरी दुनिया से झूठ बोल सकता है लेकिन क्या वह अपने आप से झूठ बोल सकता है ?इंसान जब अकेला होता है खासतौर पर मानसिक रूप से अकेला तो वह सारे सच उसके सामने आते हैं जिनसे वह सारी जिंदगी बचता रहा है लेकिन यही सच क्या कभी-कभी उसके पतन का कारण बनते हैं या नहीं ?
मात्र 19 वर्ष की आयु में इंग्लिश चैनल पार करने वाली हिंदुस्तान की जलपरी के नाम से मशहूर आरती साहा ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया ।इस कीर्तिमान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।
Credit: Josh Talk
https://www.youtube.com/watch?v=XWQlMArBjzI&t=18s
Reviews for: Pradeshik Sena – 9 Oct