झलकारी बाई (22 नवंबर 1830 – 4 अप्रैल 1857) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं इस कारण शत्रु को गुमराह करने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं। अपने अंतिम समय में भी वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया।
पांडुरंग शास्त्री एक दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता, समाज सुधारक के रूप में जाने वाले एक जाना- माना नाम है। उनके द्वारा स्वाध्याय आंदोलन और स्वाध्याय परिवार की स्थापना की गई ।श्री भगवतगीता पर आधारित आत्मज्ञान आंदोलन उनमें से एक है। उनके जन्म दिवस को ‘मनुष्य गौरव दिन’ के रूप में मनाया जाता है 1999 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
इनका जन्म झारखंड राज्य के खूंटी जिले के उलिहातू में हुआ था। 15 नवंबर 1875 को बिरसा मुंडा का जन्म हुआ। 9 जून 1900 में रांची के कारागार में मृत्यु हुई। करीब 19वर्ष की आयु में उन्होंने बिरसा सेना का गठन किया।
रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। गणित व भौतिकी का माहौल इन्हें घर ने ही प्रदान किया था। इनके पिता चंद्रशेखर अय्यर गणित व भौतिकी के लेक्चरर थे। उन्हीं से रमन में विज्ञान व शिक्षण के प्रति लगाव पैदा हुआ।1928 में ‘रमन प्रभाव’ की खोज से इन्हें प्रसिद्धि मिली। 1930 में भौतिक विज्ञान में योगदान करने के कारण इन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 1954 में ‘भारत रत्न’ से भी यह नवाज़े गए।
सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश फातिमा बीबी नियुक्त हुई ।जिनका पूरा नाम मीरा साहब फातिमा बीवी है। सेवानिवृत होने होने के बाद वह राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सदस्य भी रही। वह तमिलनाडु की राज्यपाल भी रह चुकी है।
अर्थराइटिस एंड रूमेटिज़्म इंटरनेशनल (ARI )ने ‘विश्व गठिया दिवस’ की पहल की। जिसका उद्देश्य गठिया रोग के बारे में लोगों को जागरूकता पैदा करना है। गठिया किसी भी आयु वर्ग के लोग को प्रभावित कर सकता है। गठिया के मुख्य लक्षण जोड़ों के आसपास लालिमा ,दर्द और सूजन है।
संयुक्त राष्ट्र की इस विशेष संस्था का गठन 16 नवम्बर 1945 को हुआ था। इसका उद्देश्य शिक्षा एवं संस्कृति के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में वर्णित न्याय, कानून का राज, मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रता हेतु वैश्विक सहमति बने।
अमृता प्रीतम की लिखी हुई इस नज़्म “दुआ ” में ऐसा क्यों महसूस होता है की कोई दुआ कबूल हो या ना हो लेकिन इस नज़्म में मांगी गई दुआ को जरूर कबूल होना चाहिए |आखिर क्या है वह दुआ उसे जानने के लिए सुनते हैं अनुर्वी कीआवाज में अमृता प्रीतम की लिखी हुई नज़्म “दुआ “में”…
Credit: Josh Talk
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