झलकारी बाई (22 नवंबर 1830 – 4 अप्रैल 1857) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं इस कारण शत्रु को गुमराह करने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं। अपने अंतिम समय में भी वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ भारत की आज़ादी की मांग करते हुए जिसने हंसते-हंसते अपनी अपनी आखिरी सांस भी कुर्बान करने में ऐसी निडरता दिखाई जो भारतीय इतिहास के पन्नों में एक मिसाल बन अंकित हो गई। महान क्रांतिकारी भगत सिंह के यह स्वर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ सबकी रगों में देशभक्ति का संचार कर गया।
1983 मेंआज ही के दिन देश में पहली बार नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था। यह राष्ट्रमंडल देशों का सातवां शिखर सम्मेलन था। इसकी अध्यक्षता भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थी। यह सम्मेलन 29 नवंबर तक चला।
शिक्षा के महत्व को बताने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है ।विश्व में शिक्षकों की महत्ता को स्थापित किए जाने के उद्देश्य से 5 अक्टूबर 1994 से यह दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।
रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। गणित व भौतिकी का माहौल इन्हें घर ने ही प्रदान किया था। इनके पिता चंद्रशेखर अय्यर गणित व भौतिकी के लेक्चरर थे। उन्हीं से रमन में विज्ञान व शिक्षण के प्रति लगाव पैदा हुआ।1928 में ‘रमन प्रभाव’ की खोज से इन्हें प्रसिद्धि मिली। 1930 में भौतिक विज्ञान में योगदान करने के कारण इन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 1954 में ‘भारत रत्न’ से भी यह नवाज़े गए।
भारत की महान क्रांतिकारी में से एक मातंगिनी हाजरा को ‘बूढ़ी गांधी’ के नाम से के नाम से जाना जाता है।’कर बंदी’ आंदोलन को दबाने के लिए बंगाल में इन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। हजारों लोगों के साथ सरकारी डाक बंगले पर पहुंचकर इन्होंने अपना जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। 72 वर्ष की आयु में इन्हें अंग्रेजों ने गोलियों से छलनी कर दिया किन्तु मरते दम तक तिरंगे को इन्होंने गिरने नहीं दिया। आखिरी समय में भी उनके मुंह से वंदे मातरम ही निकलता रहा।
आज ही के दिन 24 अक्टूबर 1946 को व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज (White Sands Missile Range) से सैनिकों और वैज्ञानिकों ने एक वी-2 मिसाइल (V-2 missile) लॉन्च की, जिसमें 35-मिलीमीटर मोशन पिक्चर कैमरा था. इसके जरिए अंतरिक्ष से पृथ्वी की पहली तस्वीर ली गई. इन तस्वीरों को बाहरी अंतरिक्ष (Outer Space) की शुरुआत से ठीक ऊपर 65 मील की ऊंचाई पर लिया गया था. इन तस्वीरों को जिस कैमरे में लिया गया था, वो लैंडिंग के दौरान क्रैश से इसलिए बच गया, क्योंकि इसे स्टील कैसेट में बंद किया गया था. ये पहली बार नहीं था, जब पृथ्वी की कर्व को तस्वीर में देखा गया था.
Credit: Josh Talk
आपकी छोटी बेटी – ममता कालिया – शैफाली कपूर
जबकि एक ही मां -बाप की दो बेटियां हैं पपीहा और टुन्ना। मां-बाप अपनी बड़ी बेटी जो की कॉलेज छात्रा होने के साथ ही साथ स्टेज की नामी कलाकार भी है उसके गुणों का गुणगान करने में कोई कसर नहीं रखते। वहीं दूसरी ओर उनकी 13 साल की छोटी बेटी टुन्ना जो कि पढ़ने में भी अच्छी होने के साथ ही साथ बेहद संस्कारी भी है।उसके इन गुणों के होने के बावजूद कहीं ना कहीं उसे उपेक्षित महसूस कराते रहते हैं ।टुन्ना की मासूमियत इस कारण अपने को बड़ी बहन की तुलना में निम्न ही समझने लगी है। परंतु क्या किसी की पारखी नज़र टुन्ना को इस बात का एहसास दिला पायेगा कि वह भी अपनी दीदी से कुछ कम तो नहीं। दिल को छू लेने वाली ममता कालिया की कहानी सुने आपकी छोटी बेटी, शैफाली कपूर की आवाज़ में…
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ भारत की आज़ादी की मांग करते हुए जिसने हंसते-हंसते अपनी अपनी आखिरी सांस भी कुर्बान करने में ऐसी निडरता दिखाई जो भारतीय इतिहास के पन्नों में एक मिसाल बन अंकित हो गई। महान क्रांतिकारी भगत सिंह के यह स्वर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ सबकी रगों में देशभक्ति का संचार कर गया।
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