कर्नल होशियार सिंह ( 5 मई, 1937- 6 दिसम्बर, 1998) परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय व्यक्ति है।1971 की भारत-पाकिस्तान की जंग भारतीय सैनिकों की वीरता और पराक्रम का एक शानदार उदाहरण है। इस जंग से जुड़े जवानों के बहादुरी के कई किस्से हैं। इस युद्ध में यूं तो चार जांबाजों को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाजा गया था, मगर सिर्फ एक जांबाज मेजर होशियार सिंह ऐसे थे जिन्हें यह पुरस्कार जीवित रहते मिला।
यह कविता आपको इस आधार पर प्रेरित करेगी और ईश्वर के प्रति आपका विश्वास तथा प्रेम बढायेगी कि कई बार ईश्वर को जब निखारना होता है तो वो आपको हमें मुश्किलों से घेर देते हैं। क्योंकि तभी हम निकलने का प्रयास करेंगे और इस परीक्षा से निकलने के बाद एक अलग ही ऊर्जा रहेगी। सफलता का अलग ही आनंद होगा।। इसके लिए हमने भगवान् श्री कृष्ण और महारथी कर्ण के बीच की गाथा को लिया है। कर्ण कौरव पक्ष की ओर होकर भी इसलिए वंदनीय है क्योंकि उसने सब बहुत संघर्ष से हासिल किया है। अपने आपको कई गुणों से सज्जित किया है। भगवान् कृष्ण भी कर्ण की प्रशंसा करते नही थकते लेकिन उन्होंने कभी अधिक पक्ष नही लिया और फिर भी कर्ण की कीर्ति सारे संसार में है।। और यह कविता कर्ण की कीर्ति का कारण श्री कृष्ण को मानते हुए बढ़ती है। अब ये किस तरह.. यह कविता सुनते हुए स्पष्ट होगा। आशा है यह कविता आपको प्रेरित करेगी। महाकवि दिनकर जी की ‘रश्मिरथी’ और शिवा जी सावंत जी की ‘मृत्युंजय’और बी आर चोपड़ा जी की ‘महाभारत’ से कर्ण का त्यागी जीवन परिचय मिला है मुझे।इनको पढ़ता हूँ।प्रेरित होता हूँ।।। बस वही से कर्ण को जो समझा।। उसी से ये कल्पना भीतर बढ़ी और प्रयास किया।
सूबेदार जोगिंदर सिंह शूरसैनी राजपूत (26 सितंबर 1921 – 23अक्टूबर1962) सिख रेजिमेंट के एक भारतीय सैनिक थे। इन्हें 1962 के भारत-चीन युद्ध में असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।साल 1962 का भारत-चीन युद्ध में एक हीरो ऐसा भी था जिसने गोली लगने के बाद भी हार नहीं मानी और युद्ध के मैदान में डटा रहा. ये हीरो कोई और नहीं बल्कि सूबेदार जोगिंदर सिंह थे,जोगिंदर सिंह ने ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के नारे लगाते हुए चीनी सेना पर हमला किया था और अकेले फौज पर भारी पड़े|
दीपक के पाँच संदेश – भाग 5
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
दीपक के पाँच संदेश – भाग 2
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
द्रौपदी ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य की नायिका है |राजा द्रुपद की पुत्री, धृष्टद्युम्न की बहन तथा युधिष्ठिर सहित पाँचों पाण्डवों की पत्नी है। अत्यधिक विकट समय होते हुए भी वह बड़े आत्मविश्वास से दु:शासन को अपना परिचय देती हुई कहती है|
धीरेंद्र अस्थाना की कहानी चीख में, एक अबोध बालक के मन पर मारपीट का प्रभाव उसके जीवन को कहां तक उधर- पुथल के रास्ते पर ले जा सकता है ? इन बातों का प्रभाव एक छोटे से बच्चे के मन पर पड़ता है जो युवा होने के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ता और किस तरफ अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है | यह कहानी समाज के सामने एक प्रश्न रखती है कि क्या इस तरह की चीजों से निपटना सामाजिक दायित्व नहीं है?
6 अक्टूबर 1860 ब्रिटिश काल में भारतीय दंड संहिता( IPC) पारित हुआ ।उस समय इसकी रचना लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में गठित प्रथम भारतीय विधि आयोग द्वारा की गई ।यह कानून अपराधों को बताता है तथा अपराधों की सज़ा और ज़ुर्माना भी तय करता है। IPC में कई बार संशोधन हुआ. जिसमें कई बार अपराध जोड़े भी गए तो कई बार अपराध हटाए भी गए।
दुःशासन नारी को वासना एवं भोग की वस्तु कहता है।वह नारी के प्रति रूढ़िवादी दृष्टिकोण रखता है |वह नारी को भोग्या और पुरुष की दासी मानता है। वह नारी कीदुर्बलता का उपहास उड़ाता है|
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pragati sharma