पागल खाने के सामने एक लंबा -चौड़ा शख्स फ्रांसिस कुछ इस तरह के भाव दे रहा है जैसे कि वह किसी घरेलू कुत्ते को बुला रहा हो किंतु वहां पर कोई कुत्ता नहीं है कहानी में फ्रांसिस विक्षिप्त सा हो गया है |आखिर कैसे और क्यों और उसका ऐसा होने के पीछे क्या कारण है?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कहानी विक्षिप्त, नयनी दीक्षित की आवाज में
अकेलापन – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
19वीं शताब्दी के बेहद लोकप्रिय लेखक गाय दी मोपासा की कहानी अकेलापन जिसमें व्यक्ति के उस मेंटल डिसऑर्डर की बात की गई है जिसमें व्यक्ति अपने आपको बेहद अकेला महसूस करता है ।कहानी का नायक भी इसी प्रकार की समस्या से उलझ रहा है। कहानी का नायक अपनी शादी सिर्फ़ इस वज़ह से करना चाहता है क्योंकि वह मानसिक रूप से अपने अकेलेपन से बहुत उलझ चुका है जानिए पूरी कहानी अकेलापन नया नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
शारीरिक निर्बलता नेत्रहीन होना एक कृषक के बेटे नॉर के लिए जैसे अभिशाप बन गया हो |माता -पिता की मृत्यु के पश्चात उ उसे आसपास के लोगों की प्रताड़ना अलग-अलग रूप में सहनी पड़ी |किसी के लिए हंसी का पात्र होता ,यहां तक कि उसके अपने भी उसके साथ भिखारी जैसा व्यवहार करते | क्या नॉर अपनी शारीरिक निर्बलता को अपने ऊपर हावी होने देगा या या फिर डटकर मुकाबला करेगा कहानी में आगे क्या होगा उसके साथ इसे जानने के लिए गाय दी मोपासां की कहानी बेहद मार्मिक कहानी नेत्रहीन, सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
कहानी में आइरिन ,जैक्स की प्रेमिका है| जैक्स का आइरिन के प्रति प्रेम बहुत गहरा और अत्यधिक स्नेह से भरा हुआ है | जैक्स का जीवन के प्रति दृष्टिकोण बहुत ही व्यवहारिक और सकारात्मक है | आइरिन एक शादीशुदा महिला है जो नव वर्ष की पूर्व रात्रि पर अचानक से जैक्स के घर रोते हुए पहुंची है |उसका कहना है कि उसका पति उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है| ऐसे में आइरिन ,जैक्स से क्या चाहती है ?और जैक्स क्या निर्णय लेता है| उन दोनों की प्रेम की पराकाष्ठा कहां तक है ? कहानी जानने के लिए पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं नव वर्ष का उपहार, नयनी दीक्षित की आवाज में
आकांक्षा – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
प्रसिद्ध फ्रेंच लेखक guy de Maupassant के द्वारा लिखी गई कहानी आकांक्षा में ,एक ऐसे किरदार की कहानी है जो बाल्यावस्था से ही प्रतिष्ठित, सम्मानित व्यक्ति बनने की आकांक्षा रखता है किंतु कहते हैं ना कि कभी-कभी यह आकांक्षा अति आकांक्षा में तब्दील हो जाती है। ऐसे ही कुछ इस किरदार के साथ होता है। यह किरदार इस बात से इतना अधिक ग्रसित हो जाता है या यूं कहें अंधा हो जाता है कि उसके घर में ही, उसकी नाक के नीचे कोई सुराग हो रहा है, उसके परिवार में कोई सेंध लगाई जा रही है, उसे पता ही नहीं चलता। ऐसे में उस किरदार के साथ और क्या- क्या घटित होता है। जानिए कुछ गंभीर ,कुछ व्यंग कुछ भावविभोर कर देने वाली यह खूबसूरत कहानी आकांक्षा में जिसे आवाज़ दी है नयनी दीक्षित ने…
जीवन और मृत्यु – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
इंसान जब पैदा होता है तब यह आनंद की स्थिति होती है, लेकिन क्या जब इंसान मरता है तब भी क्या वह कुछ लोगों के लिए आनंद की स्थिति होती है? क्या जब इंसान मरता है तो क्या यह समाज़ अवसरवादिता में बदल जाता है ।कुछ ऐसे ही तर्ज़ पर है यह कहानी जीवन और मृत्यु और इसे लिखा है फ्रेंच लेखक guy de Maupassantने जो वास्तव में समाज़ के प्रति वास्तविक व्यंग है कि सदियों से मनुष्य समाज अपनी सहूलियत के चलते क्या किसी की मृत्यु का इंतजार भी कर सकता है? कहानी को जिस प्रकार बेहद चुटिले अंदाज़ में लिखा गया है वैसे ही नयनी दीक्षित ने उसी अंदाज़ में अपनी आवाज़ देकर कहानी को पेश किया है।
रक्तमंडल के पिछले भाग में आपने सुना कि कैप्टन कैप्टन फ़्युगैसन को अपना कैंप नष्ट कर देने के लिए संदेशा आया जो रक्त मंडल की तरफ से था। अमर सिंह जो रक्त मंडल गिरोह का बहुत ही उम्दा जवान सैनिक था, किले के अंदर उसे बारूद और मैगज़ीन को नष्ट करने के लिए भेजा गया लेकिन वहां उसकी मुलाकात अपने बरसो पहले बिछड़े पिता रघुवीर सिंह से हुई। रघुवीर सिंह उस किले के प्रधान अधिकारी थे क्या बाप और बेटे एक दूसरे से मिल पाए? अमर सिंह ने मैगजीन नष्ट करने पर अपनी जान भी गंवा दी। आगे क्या हुआ जाने के लिए सुनिए रक्त मंडल के इस भाग को नयनी दीक्षित की आवाज़ में..।
छठे सर्ग की कथावस्तु हमे युद्धभूमि की ओर ले जाती है जहाँ अब कर्ण कौरव सेना का सेनापति है। श्रीकृष्ण को ज्ञात है कि जब तक कारण के पास देवराज इंद्र द्वारा प्रदत्त एकघ्नी शक्ति है तब तक पाण्डवों की विजय का मार्ग प्रशस्त नहीं है। अतः वह महावीर भीम पुत्र घटोत्कच को रण में आहूत करते हैं। उसके आते ही कौरव सेना में हाहाकार मच जाता है। तब दुर्योधन कर्ण से निवेदन करते हैं
दाहक प्रचंड इसका बल है,
यह मनुज नहीं कालनल है।
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तू नहीं जोश में आएगा,
आज ही समर चूक जाएगा।
अंततः कर्ण सेनापति के धर्म का निर्वाह करते हुए अमोघ एकघ्नी शक्ति का संधान करते हैं और घटोत्कच वीरगति को प्राप्त होता है। दिवस निश्चय ही कौरवों के नाम होता है पर कर्ण को ज्ञात है कि भविष्य अब पाण्डवों का हो चुका है।
हारी हुई पाण्डव चमू में हँस रहे भगवान थे।
पर जीत कर भी कर्ण के हारे हुए से प्राण थे।
डायल 100 – महेश दुबे – नयनी दीक्षित
मुंबई महानगर में एक शातिर कातिल हर बार खून कर खुद ही पुलिस को Dial 100 कर जानकारी देता है| मगर यह कातिल अभी तक पकड़ में नहीं आया| इंस्पेक्टर सुधीर और त्यागी उसे जल्द से जल्द पकड़ लेना चाहते हैं परंतु अभी उन्हें कोई सबूत नहीं मिल पाया |कौन है वह Serial Killer ? लोगों का खून करने के पीछे उसका क्या मकसद हो सकता है?महेश दुबे जी के द्वारा लिखी Mysteries and Thrillers से भरपूर कहानी Dial 100 सुनते हैं नए नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
पंडित गोपाल शंकर को भी उसी प्रकार की एक चिट्ठी मिली जो रक्त मंडल गिरोह से आई थी रक्त मंडल गिरोह के बारे में जानने के लिए गोपाल दास ने अपनी खुफिया लाइब्रेरी से किताब निकाली और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए किंतु भयानक चार नामक के मुखिया के बारे में अभी तक उसे कोई जानकारी नहीं प्राप्त हो पाई। क्या उन्हें इस किताब के जरिए कुछ पता चल पाएगा? क्या पंडित गोपाल शंकर नेपाल जाने के बाद मिस्टर कैमिन और रोज़ को इसके बारे में और इस किताब के बारे में कुछ बता पाएंगे? इसे जानने के लिए सुनते हैं कहानी का अगला भाग नयनी दीक्षित की आवाज़ में..
कुवारेपन की वजह – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
कई बार कुछ ऐसी घटना एक पुरुष के जीवन में घट जाती हैं जिसके लिए एक महिला जिम्मेदार होती है। उन घटनाओं का यह भी असर होता है जो उसके कुंवारे पन की वजह बन सकता है। हर बार हर मामले में सिर्फ़ पुरुष को ही जिम्मेदार ठहराना यह जरूरी नहीं ।19वीं शताब्दी में फ्रेंच लेखक guy de maupssantने इसी बात को अपनी कहानी का आधार बनाया है ।क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में कहानी कुंवारेपन की वजह..।
चीनी फेरीवाला फाटक से बाहर आता दिखाई दिया । उसके कंधे पर भूरे कपड़े का गट्ठर था। मैंने कहा कि मैं फॉरेन नहीं खरीदती, तो सरल विस्मय के साथ उसने कहा कि हम क्या फारन है ? हम तो चाइना से आता है । मैंने अपनी नहीं को और अधिक कोमल बनाकर कहा, मुझे कुछ नहीं चाहिए भाई । चीनी भी विचित्र निकला,’ हमको भाई बोला है ।तुम जरूर लेगा। बहुत अच्छा सिल्क आता है सिस्तर। और उस दिन से उसे मेरे घर में आने जाने की परवानगी मिल गई
हेज़ल: क्या तुम्हें मालूम है कि कल रात किसी ने गरीब पीटर को चाकू मार कर कत्ल कर दिया?
एलिज़ाबेथ: मैं यह भी जानती हूँ कि पीटर का कातिल और कोई नहीं, बल्कि तुम्हारा पति रेमंड ही है।
हेज़ल: (हैरान होते हुए) यह नामुमकिन है! मेरे पति तो एक रोड हादसे में मर चुके हैं। वह भला पीटर की हत्या कैसे कर सकते हैं?
वाल्टर: एलिज़ाबेथ! तुम्हें हेज़ल के मरे हुए पति के बारे में ऐसा नहीं कहना चाहिए।
यहां पर कई सवाल उभरते हैं: एलिज़ाबेथ ने हेज़ल के पति रेमंड पर पीटर की हत्या का इल्जाम क्यों लगाया? आखिर यह पीटर कौन है और उसकी हत्या की वजह क्या हो सकती है? रेमंड का पीटर की हत्या से क्या संबंध हो सकता है? अगर रेमंड ने पीटर की हत्या नहीं की, तो असली कातिल कौन है? और एलिज़ाबेथ का रेमंड के साथ क्या रिश्ता है?
इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए सुनिए एरूनिका पार्कर जोन्स द्वारा लिखी गई रहस्यमय कहानी ‘साजिशबाज़ औरत’ शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
कविता के अंश में सिंदूरी शाम की सुंदरता का वर्णन किया गया है
“हिंदुस्तानी अफ़सर – “”आप मुझे कोई और बंगला अलॉट कर दीजिए। वहाँ मेरी जान को खतरा है। कोई साया और आवाज़ जैसे मेरा पीछा कर रहे हैं।””
स्टेट अफ़सर – “”तुम्हें किसी बात का भ्रम हुआ होगा। कोई भूत-वूत नहीं होते। मैं इसकी जांच कराता हूँ।””
जांचकर्ता – “”अरे देखो! बाथरूम की खुदाई करने पर एक मानव कंकाल मिला है।””
शिमला के कैथो बंगले पर जो कोई भी रहने जाता, एक साया और एक आवाज़ उसका पीछा करती रहती। बंगले के बाथरूम में जब खुदाई हुई तो एक मानव कंकाल भी मिला। यह सब क्या था? यह कंकाल किसका था? क्या वाकई उस बंगले में किसी आत्मा का साया है? और आखिर वह आत्मा क्या कहना चाह रही है?
इस रहस्यमयी घटना के पीछे की सच्चाई क्या है? जानिए सत्य घटना पर आधारित डिप्टी कमिश्नर किंग के द्वारा लिखी गई कहानी ‘शिमला का बंगला’ में। आज ही सुनें शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।”
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