कुवारेपन की वजह – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
कई बार कुछ ऐसी घटना एक पुरुष के जीवन में घट जाती हैं जिसके लिए एक महिला जिम्मेदार होती है। उन घटनाओं का यह भी असर होता है जो उसके कुंवारे पन की वजह बन सकता है। हर बार हर मामले में सिर्फ़ पुरुष को ही जिम्मेदार ठहराना यह जरूरी नहीं ।19वीं शताब्दी में फ्रेंच लेखक guy de maupssantने इसी बात को अपनी कहानी का आधार बनाया है ।क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में कहानी कुंवारेपन की वजह..।
कहानी में लेखक द्वारा कुछ ऐसी घटनाओं का जिक्र किया गया है ,जो डर की सारी सीमाओं को भी पार कर जाती है| जो स्वाभाविक भय से भी बहुत ज्यादा है| लेखक ने खौफ़नाक अनुभवों को लिखा है जिसे सुनकर आपके रोंगटें खड़े हो जायेंगे | ऐसा खौफनाक मंजर आखिर क्या हो सकता है ?जिसे लेखक अपने कहानी के माध्यम से पाठकों और सुनने वालों को बांटना चाह रहा है जानने के लिए सुनते हैं दिल दहलाने वाली कहानी खौफ़नाक, नयनी दीक्षित की आवाज में
मैं उस स्याह रात को कब्रिस्तान में थक कर एक संगमरमर की कब्र के ऊपर बैठ गया | अचानक मैं देखता हूं कि कब्र की संगमरमर की शिला धीरे -धीरे खड़ी हो रही है और उसमें से एक मानव कंकाल अपने खोखले आंखों के कोटर से मुझे घूर रहा है और उसकी कब्र पर जो लिखा हुआ है उसे मिटा रहा है| धीरे-धीरे यह सिलसिला पूरी कब्रिस्तान में शुरू हो गया | कई कब्र खुली ,उनसे मृतक निकले और उन्होंने अपनी कब्र पर से लिखी हुई पंक्तियों को मिटाने लगे |मैंने सोचा कि मेरी मृतक प्रेमिका भी कुछ ऐसा ही कर रही होगी और यह बात सच निकली ,वह भी ऐसा ही कुछ कर रही थी| क्या आप नहीं जानना चाहेंगे ऐसा क्यों हो रहा है ? इन मृतकों के साथ कौन सी अदृश्य सच्चाई दफ़न हो गई है, जो अब भी इन्हें कब्र के अंदर भी चैन से नहीं रहने दे रही ? इस पूरी रोचक कहानी को जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी अदृश्य सच्चाई ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
परिवर्तन – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
एक जवान स्त्री पुरुष का संबंध क्या केवल स्त्री पुरुष के संबंध को ही दर्शाता है या फिर एक जवान स्त्री पुरुष जो लगभग एक ही उम्र के हैं वह अनजाने में मां -बेटे के संबंध में भी बदल सकते हैं। रेल यात्रा कहानी सोसाइटी के स्त्री -पुरुष के संबंध को देखने के नजरिये को चोट करती हुई कहानी है। guy de maupassant द्वारा लिखी कहानी रेल यात्रा में जानिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में..
लाल क्रॉस – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
धर्म जब अंधविश्वास का आवरण ओढ़ लेता है तब समाज में कुरीतियों, अलगाव, भेदभाव की स्थितियां पैदा होती हैं और इसका कारण स्वयं धर्म नहीं होता बल्कि वह लोग होते हैं जो इस का प्रभुत्व रखना चाहते हैं ।धर्म की आड़ लेकर कुछ इसी तरह की कहानी है लाल क्रॉस जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति जो कि एक केंद्र किरदार है जब उसकी मृत्यु होती है तो किस प्रकार गांव के लोग अंधविश्वास का आवरण पहनाने के लिए उसमें तरह-तरह की कही -अनकही बातें जोड़ देते हैं। इसके पीछे से यह कारण होता है कि वह वृद्ध व्यक्ति किसी एक धर्म का अनुयाई नहीं होता। पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज़ में 19वीं शताब्दी के बेहद प्रसिद्ध लेखक guy de maupassant की लिखी कहानी लाल क्रॉस
पागल खाने के सामने एक लंबा -चौड़ा शख्स फ्रांसिस कुछ इस तरह के भाव दे रहा है जैसे कि वह किसी घरेलू कुत्ते को बुला रहा हो किंतु वहां पर कोई कुत्ता नहीं है कहानी में फ्रांसिस विक्षिप्त सा हो गया है |आखिर कैसे और क्यों और उसका ऐसा होने के पीछे क्या कारण है?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कहानी विक्षिप्त, नयनी दीक्षित की आवाज में
उसकी देखने की अदा बड़ी मोहक थी, किसी को भी आमंत्रित करने वाली |मैंने भी घर के भीतर शीशे के सामने जाकर कई बार उसकी तरह ही इशारा करने का अभ्यास किया और मैं तुमसे क्या कहूं मैं उससे कहीं बेहतर कर पाई| इसके बाद मैं खिड़की के पास उसी अदा से बैठ गयी| शायद ही उसके बाद कोई भी ग्राहक उसकी तरफ गया हो| तुम तो जानती हो मेरी सनक और मेरी जिद्द को |मैं जिस चीज को करने के लिए सोच लेती हूं ,उसे कर के ही रहती हूं |यह सब बातें बॉरोनस अपनी फ्रेंड मॉरसिनस से कह रही है लेकिन बॉरोनस के बिना सोचे समझे की गई किसी की नकल, आज उसे एक बुरे चक्कर में फंसा गई है |क्या आप जानना नहीं चाहेंगे कि बॉरोनस किस चक्कर में फंस गई है? और उसकी फ्रेंड उसे किस बात की सलाह दे रही है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं| गाय दी मोपासां की कहानी नकल,नयनी दीक्षित की आवाज में …
शोलागढ़@34km – Kumar Rehman (कुमार रहमान) – Nayani Dixit
रात के अंधेरे में सोहराब से टकराने वाला व्यक्ति कौन था ?श्रेया को गुस्सा क्यों आ रहा था? शोलागढ़ में क्या गुल खिलने वाले थे? चार आदमी श्रेया को कहां ले जा रहे थे ?सार्जेंट सलीम ने सुबह श्रेया को ना पाकर क्या किया? इंस्पेक्टर सोहराब यहां क्या करने आया था ?ऐसे बहुत से सवालों का जवाब पाने के लिए सुनते हैं उपन्यास का अगला भाग…
रक्त मंडल के पिछले भाग में आपने सुना कि बाबू बटुक चंद की हत्या कर दी और उनका बेटा कहीं गायब है और किस तरह से रक्त मंडल के सिपाहियों ने सरकारी खज़ाने को रास्ते से ही लूट लिया बड़े से बड़े अफसर भी उनका मुकाबला नहीं कर पाए। मृत्यु किरण से छोड़े गए गोले पूरे लश्कर को ले डूबे। रक्त मंडल के सदस्य सरकारी खज़ाने को अपने साथ ले गए आगे क्या हुआ? जानने के लिए सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज़ में रक्त मंडल का यह भाग…
Maa Shailputri
नवरात्र के 9 दिन भक्ति और साधना के लिए बहुत पवित्र माने गए हैं। इसके पहले दिन शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। हिमालय पर्वतों का राजा है। वह अडिग है, उसे कोई हिला नहीं सकता। जब हम भक्ति का रास्ता चुनते हैं तो हमारे मन में भी भगवान के लिए इसी तरह का अडिग विश्वास होना चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
Chants credit- Jyoti upreti sati
रक्त मंडल के भाग 8 में सुना कि पंडित गोपाल शंकर बूढ़े का भेष बनाकर किले के अंदर से जरूरी सामान जैसे ज़हाज ,बेतार के तार के यंत्र सब कुछ जरूरी सामान लेकर चकमा हो जाता है ।इधर नगेंद्र रक्त मंडल गिरोह के सेनापति के रूप में नियुक्त किया जाता है। और वह युद्ध की तैयारियों में लग जाता है। वापस आने के बाद गोपाल शंकर जी की मुलाकात वाहिद अली खान और मैकडॉनल्स सलाइस् से हुई जो उस प्रांत के लाड साहब है। मृत्यु किरण देखने और जानने के बाद गोपाल शंकर और मैकडॉनल्ड में क्या बातचीत हुई इसे पूरा जानने के लिए सुनते हैं रक्त मंडल भाग 9 नयनी दीक्षित की आवाज़ में..
जयकाली देवी जिसके पौरुष से लोग भय खाते थे और उससे सामने कुछ भी कहने से डरते थे। जो अपने मंदिर की स्वच्छता को सब चीजों से ऊपर रखती थी उसके अपने मंदिर में एक शूकर को स्थान देने सी सभी हैरान थे।
पति -पत्नी के बीच में शक की भावना उनके वैवाहिक जीवन को नष्ट कर सकती है |ऐसा ही कुछ सलीमा के साथ होता है सलीमा बादशाह का बेसब्री से इंतजार कर रही है| इंतजार की घड़ियां नहीं कट पाती तो मैं अपनी बाँदी बीन भीम सुनाने का आदेश देती है | बाँदी स्त्री के भेष में एक पुरुष होता है बादशाह इस दृश्य को देखकर सलीमा पर आरोप लगाता है |कहानी में आगे क्या होता है क्या सलीमा इस आरोप को सहन कर पाती है? क्या होता है बादशाह के साथ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी ,सुमन वैद्य की आवाज में
“सूरत को नहीं सीरत को तवज्जो देना सीखें तभी शायद आप असली खूबसूरती का मतलब समझ पाएंगे।
भूत की कल्पना के माध्यम से आम लोगो के घमंड को तोड़ने का प्रयास किया गया है इस कहानी ‘भूत की बातों’ में।
अलग -अलग प्रांत और अलग -अलग स्वभाव वाले राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ‘नशा समस्या’ के सप्ताह भर चलने वाले तीसरे पाठ्यक्रम में भाग लेने 4 लोग चार अपरिचित लोग जब एक साथ मिलते हैं और अपनी 2 दिन की उस मुलाकात में एक दूसरे के निकट आ जाते हैं | सोमसुंदरम केरल से ,महाराष्ट्र से जगदले और एस.पी.हायातंगारकर और मनजीत सिंह झारखंड से की कहानी है उनके बीच में कैसे निकटता आती है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कमल के द्वारा लिखी हुई कहानी पिन्ने काणाम्,सुमन वैद्य जी की आवाज में
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