दो भाईयों की ऐसी कहानी जो अपनी पत्नियों के रोज़ रोज़ के झगड़े से आहत हैं। एक दिन खाना मांगने पर न मिलने से क्रुद्ध हो एक भाई अपनी पत्नी के सर पर प्रहार करता है जिससे कि उसकी मृत्यु हो जाती है लेकिन दूसरा भाई सबके सामने बताता है कि खून भाई ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी ने किया है क्योंकि उसका मानना है कि पत्नी तो उसे और मिल जाएगी लेकिन भाई तो दूसरा नहीं मिल सकता।
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यह मधुर गीत उस स्थिति को दर्शाता है ,जब हम नए-नए प्रेम में पड़ते हैं | हमारा तन – मन हमारे काबू में नहीं होता | भावना तिवारी जी की मधुर आवाज में….
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पेट में थोड़ी जान पड़ी तो आँखों से आँसू छलछला उठे और अम्मा का रुदन पूरे गाँव में भर गया। नदिया का गाड़ा, जीयतै खाइस, मोइते खाइस।गांव में 90 साल के बब्बा की मृत्यु हो जाती है |मृत्यु के पश्चात क्रिया कर्म करने के लिए भी उनके घर में धन नहीं होता है |बब्बा की वृद्ध पत्नी गोमती अम्मा अभी जीवित है किंतु गरीबी के कारण उनका शरीर भी बेहद कमजोर हो चुका है | ऐसी स्थिति में बब्बा का अंतिम संस्कार कैसे होता है? और उसे कौन कराता है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सविता पाठक के द्वारा लिखी गई नीम के आंसू, निधि मिश्रा जी की आवाज में
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