जीवन और मृत्यु – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
इंसान जब पैदा होता है तब यह आनंद की स्थिति होती है, लेकिन क्या जब इंसान मरता है तब भी क्या वह कुछ लोगों के लिए आनंद की स्थिति होती है? क्या जब इंसान मरता है तो क्या यह समाज़ अवसरवादिता में बदल जाता है ।कुछ ऐसे ही तर्ज़ पर है यह कहानी जीवन और मृत्यु और इसे लिखा है फ्रेंच लेखक guy de Maupassantने जो वास्तव में समाज़ के प्रति वास्तविक व्यंग है कि सदियों से मनुष्य समाज अपनी सहूलियत के चलते क्या किसी की मृत्यु का इंतजार भी कर सकता है? कहानी को जिस प्रकार बेहद चुटिले अंदाज़ में लिखा गया है वैसे ही नयनी दीक्षित ने उसी अंदाज़ में अपनी आवाज़ देकर कहानी को पेश किया है।
अब तुम्हारे पास कुछ काम- धाम तो है नहीं, बीमार पड़े -पड़े बिस्तर ही तो गर्म करते रहते हो | यह मुर्गी के कुछ अंडे हैं ,ध्यान रखना बिना टूटे-फूटे मुर्गी के इन अंडों को लेटे-लेटे तुम्हें सेना है | गुस्से और गंभीर मुद्रा में ट्योने की पत्नी ने ट्योने से कहा | बेचारा अपाहिज ट्योने के आस-पास उसकी पत्नी ने अंडों को सेने के लिए रख दिया |क्या वाकई एक मुर्गी की तरह बिस्तर पर पड़े -पड़े ट्योने ने उन अंडों को सेने का काम किया? और क्या वाकई उन अंडों से चूजे निकल पाए ? इस बात से ट्योने को किस बात का एहसास हुआ ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी अपाहिज की ममता,नयनी दीक्षित की आवाज में …
अकेलापन – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
19वीं शताब्दी के बेहद लोकप्रिय लेखक गाय दी मोपासा की कहानी अकेलापन जिसमें व्यक्ति के उस मेंटल डिसऑर्डर की बात की गई है जिसमें व्यक्ति अपने आपको बेहद अकेला महसूस करता है ।कहानी का नायक भी इसी प्रकार की समस्या से उलझ रहा है। कहानी का नायक अपनी शादी सिर्फ़ इस वज़ह से करना चाहता है क्योंकि वह मानसिक रूप से अपने अकेलेपन से बहुत उलझ चुका है जानिए पूरी कहानी अकेलापन नया नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
ख़ूबसूरती – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
यह कहानी ऐसी औरत की है जो देखने में बड़ी बदसूरत हो चुकी है। लेकिन खूबसूरती किसे कहा जाता है ?क्या शरीर ,रंग- ढंग ,वजन, ऊंचाई ,बाल ,कपड़े और एक औरत का जिस्म़ खूबसूरती का मापदंड होता है। या एक करुणा से भरा दिल,किसी के प्रति निष्ठावान होना क्या वह खूबसूरती का मापदंड हो सकता है !वह कौन ।सी चीज है जो एक औरत के चरित्र को खूबसूरत बनाती है और एक पुरुष के चरित्र को भी। क्या करुणा, loyalty चरित्र ,अब क्या यह खूबसूरती के मापदंड नहीं रहे? इसी बात को चोट करती हुई कहानी है कि दोनो French लेखक guy de Maupassant के द्वारा लिखी गई कहानी खूबसूरती जिसे आवाज़ दी है नयनी दीक्षित ने…
परिवर्तन – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
एक जवान स्त्री पुरुष का संबंध क्या केवल स्त्री पुरुष के संबंध को ही दर्शाता है या फिर एक जवान स्त्री पुरुष जो लगभग एक ही उम्र के हैं वह अनजाने में मां -बेटे के संबंध में भी बदल सकते हैं। रेल यात्रा कहानी सोसाइटी के स्त्री -पुरुष के संबंध को देखने के नजरिये को चोट करती हुई कहानी है। guy de maupassant द्वारा लिखी कहानी रेल यात्रा में जानिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में..
कहानी में दो कबाड़ उठाने वाले दो दोस्त लिबॉयस और मेलचॉन,एक स्त्री से पांच ट्रेंट में 5 फ्रै़ंक मिनट में एक गधा खरीदते हैं और सिर्फ अपने आमोद -प्रमोद के लिए उस गधे को बड़ी क्रूरतासे उसका वध करते हैं लेकिन इसके बाद कहानी में बहुत मरे हुए गधे से क्या करते हैं? इसे जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी गधा ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
कुएँ का राज – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
200 साल पुरानी एक कोठी, एक बहुत ही पुरानी इमारत और उसके अंदर एक कुआं ।जिसके राज़ को वहां के बाशिंदे आज तक नहीं जान पाए ।ऐसी कौन सी बातें हैं उस कुंए की?जिसे सॉल्व करने के लिए वहाँ पर रहने वाले लोगों को इंस्पेक्टर फ़रीदी की मदद लेनी पड़ी ।घर के अंदर से आती हुई जानवरों की चीखें ,रोज मरते जानवर और फिर आखिरकार एक इंसान ।कुंए के अंदर मिली लाशें, किसी भूत का साया है या किसी की चली हुई चाल और आखिर चली हुई चाल है तो क्यों ?यह सारे राज़ अगर आप जानना चाहते हैं तो सुनिए इब्रेसफ़ी के द्वारा लिखी गई कहानियों की सीरीज़ कुंए का राज़ नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
लाल क्रॉस – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
धर्म जब अंधविश्वास का आवरण ओढ़ लेता है तब समाज में कुरीतियों, अलगाव, भेदभाव की स्थितियां पैदा होती हैं और इसका कारण स्वयं धर्म नहीं होता बल्कि वह लोग होते हैं जो इस का प्रभुत्व रखना चाहते हैं ।धर्म की आड़ लेकर कुछ इसी तरह की कहानी है लाल क्रॉस जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति जो कि एक केंद्र किरदार है जब उसकी मृत्यु होती है तो किस प्रकार गांव के लोग अंधविश्वास का आवरण पहनाने के लिए उसमें तरह-तरह की कही -अनकही बातें जोड़ देते हैं। इसके पीछे से यह कारण होता है कि वह वृद्ध व्यक्ति किसी एक धर्म का अनुयाई नहीं होता। पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज़ में 19वीं शताब्दी के बेहद प्रसिद्ध लेखक guy de maupassant की लिखी कहानी लाल क्रॉस
दु:शासन द्वारा केश खींचने के बाद द्रौपदी रौद्र-रूप धारण कर लेती है| वह सिंहनी के समान गरजती हुई दु:शासन को ललकारती है। द्रौपदी की गर्जना से पूरा राजमहल हिल जाता है। और समस्त सभासद स्तब्ध रह जाते हैं| जैसे ही वे द्रौपदी का चीर हरण करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाता है द्रोपदी की सतीत्व ज्वाला से पराजित हो जाता है|
फरीदी और लियोनार्ड – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
इब्ने सफ़ी की कहानी फ़रीदी और लियोनार्ड में लियोनार्ड एक बेहद चलाक लेकिन बेहद घटिया किस्म का ब्लैकमेलर है ।जो ब्लैक मेलिंग तक ही नहीं रुकता बल्कि क़त्ल और दूसरे और हथकंडे अपनाने पर भी उतर आता है। कहानी में लियोनार्ड कौन-कौन से हथकंडे आज़माता हैं?फ़रीदी किस प्रकार उसको अपनी गिरफ्त में लेता है ?इस बेहद सनसनीख़ेज़ कहानी को आवाज़ दी है नयनी दीक्षित ने..
एक निम्न जाति की वृद्धा मंदिर के पास बैठी है |वह 3 दिन से भूखी है तभी उसका बेटा राधे शराब के मद में चूर होकर उसके पास आता है और मंदिर में अछूतों के साथ दर्शन करने की जिद करने लगता है| किंतु मंदिर के अपवित्र होने के डर से मंदिर के महाराज उसे इस बात की चेतावनी देता है राधे की जिद्द का क्या नतीजा निकलता है क्या उसे मंदिर में दर्शन मिल पाते हैं क्या होता है राधे के साथ ?पूरी कहानी सुनने के लिए जानते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी विराम चिन्ह निधि मिश्रा की आवाज में
तुम हाथ पर हाथ धरे नामर्दों की भाँति बैठे रहोगे, सरदारनी ने कहा, और लोग एक से एक बढ़िया घर पर कब्जा कर लेंगे। इस्लामाबाद की नयी आबादी के मुसलमान जब सामान का मोह छोड़कर लोग भाग जाते हैं तो उनके खाली मकानों पर कब्जा करने लगते हैं |लहना सिंह भी इसी संदर्भ में एक खाली मकान पर कब्जा करना चाहता है मकान में वह अपने घर का सारा सामान के साथ-साथ अपने चारे की मशीन को भी रखकर अपने पत्नी और अपने बच्चों को लेने जाता है उसके वापस आने पर वह देखता है उस कब्जे वाले घर मकान में अब कोई दूसरा आ चुका है | लहना सिंह के साथ आगे क्या होता है ?जानने के लिए उपेंद्रनाथ अश्क के द्वारा लिखी गई कहानी चारा काटने की मशीन ,अमित तिवारी जी की आवाज में सुनते हैं
बाइबल अनुवादक ‘सेंट जेरोम’ की स्मृति में 30 सितंबर 2018 से अंतरराष्ट्रीय अनुवादक दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रों को एक साथ लाने तथा भाषा विद अनुवाद में योगदान के साथ-साथ विश्व शांति में अहम भूमिका बनाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन की घोषणा की।
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