शिक्षा के महत्व को बताने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है ।विश्व में शिक्षकों की महत्ता को स्थापित किए जाने के उद्देश्य से 5 अक्टूबर 1994 से यह दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।
सर छोटू राम, (जन्म-24 नवंबर 1881 – 9 जनवरी 1945) ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के एक प्रमुख राजनेता एवं विचारक थे। उन्होने भारतीय उपमहाद्वीप के ग़रीबों के हित में काम किया। इस उपलब्धि के लिए, उन्हें 1937 में ‘नाइट’ की उपाधि दी गई।
10 नवंबर 1908 को कनाई लाल दत्त को मात्र 20 बरस की आयु में फांसी हुई। खुदीराम बोस के बाद फांसी के फंदे पर झूलने वाले वह दूसरे क्रांतिकारी थी।
गोपबंधु दास का जन्म 9 अक्टूबर, 1877 को उड़ीसा के पुरी ज़िले में साक्षी गोपाल के निकट सुआंडो नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम दैतारि दास तथा माता का नाम स्वर्णमायी देवी था। इनका सम्बन्ध एक ग़रीब ब्राह्मण परिवार से था। गोपबंधु दास ने पुरी, कटक तथा कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में शिक्षा ग्रहण की थी
डॉ॰ (सर) जगदीश चन्द्र बसु (बंगाली: (30 नवंबर 1858 – 23 नवंबर, 1937) भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हें भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया।
कन्नड़ राज्योत्सव का ऐतिहासिक महत्व साल 1956, 1 नवंबर को दक्षिणी भारत के कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को मिलाकर कर्नाटक राज्य बनाया गया। इस दिन को कर्नाटक राज्योत्सव (Karnataka Rajyotsava 2023) के रूप में मनाया जाता है। कन्नड़ राज्योत्सव का सीधा और सरल अनुवाद “कर्नाटक का राज्य महोत्सव” है।
संयुक्त राष्ट्र ने 16 अक्टूबर 1945 को विश्व खाद्य दिवस मनाने की शुरुआत की. संयुक्त राष्ट्र ने 16 अक्टूबर 1945 को रोम में “खाद्य एवं कृषि संगठन” की स्थापना की. उसके बाद “कॉन्फ्रेंस ऑफ द फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन” ने साल 1979 से विश्व खाद्य दिवस मनाने की घोषणा की
सर छोटू राम, (जन्म-24 नवंबर 1881 – 9 जनवरी 1945) ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के एक प्रमुख राजनेता एवं विचारक थे। उन्होने भारतीय उपमहाद्वीप के ग़रीबों के हित में काम किया। इस उपलब्धि के लिए, उन्हें 1937 में ‘नाइट’ की उपाधि दी गई।
हमारे समाज की कितनी बड़ी विडम्बना है की एक तरफ गरीब के सर पर छत नहीं और वहीं दूसरी तरफ हम धार्मिक स्थलों पर पानी के जैसे पैसा बहाते हैं। ऐसी ही कुछ बात कह रही है मेरी यह कहानी ‘ वो टपकती झोपडी ‘
निशिकांत लेखक बनना चाहता है हिंदी के प्रति उसका असीम प्रेम उसे यह करने की प्रेरणा दे रहा है किंतु निशिकांत द्वारा लिखी गई पहली कहानी अपने मित्र को दिखाता है तो मित्र उसकी कहानी को किसी बड़े लेखक की कहानी की नकल बताता है अब ऐसे में निशिकांत का क्या आत्मविश्वास डगमगा जाता है या फिर से कोशिश करता है विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी जानते हैं
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