लीला सेठ का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में 20 अक्टूबर, 1930 को हुआ। लीला सेठ बचपन में ही पिता की मृत्यु के बाद विधवा मां के सहारे पली-बड़ीं और मुश्किलों का सामना करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जैसे पद तक पहुंचने का सफर पूरा किया
विश्व रेडियोग्राफी दिवस पहली बार साल 2012 में मनाया गया था| इस दिन को मनाने की पहल यूरोपियन सोसाइटी ऑफ रेडियोलॉजी, रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका और अमेरिकन कॉलेज ऑफ रेडियोलॉजी की तरफ से की गई थी|तभी से हर साल दुनियाभर में इस दिन को 8 नवंबर को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|
1874 में गठित हुई ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ की याद में जापान के टोक्यो में 09 अक्टूबर 1969 को आयोजित विश्व डाक संघ के सम्मेलन में इसी दिन ‘विश्व डाक दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की गई और तभी से प्रतिवर्ष 09 अक्टूबर को ही अंतरराष्ट्रीय डाक सेवा दिवस मनाया जा रहा है।
स्वेज नहर मिस्र में भूमध्य सागर पर बन्दरगाह सईद से दक्षिण की ओर स्वेज शहर (स्वेज की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित) तक 120 मील तक फैली हुई है। नहर मिस्र के बड़े हिस्से को सिनाई प्रायद्वीप से अलग करती है। इसे बनने में 10 साल लगे और इसे आधिकारिक तौर पर 17 नवंबर, 1869 को खोला गया।
स्वामी विवेकानंद को अपना आध्यात्मिक गुरु मानने वाली मार्गरेट एलिजाबेथ नोबेल ‘भगिनी निवेदिता’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। उन्होंने भारत देश को अपनी कर्मभूमि बनाया। विवेकानंद ने उन्हें ‘सिस्टर निवेदिता’ का नाम दिया ।स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रसार के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया।
इस युद्ध को प्रथम कश्मीर युद्ध कहा जाता है। इसकी शुरुआत अक्टूबर 1947 में हुई और इसका परिणाम जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय था। पाकिस्तान को डर था कि महाराजा हरि सिंह भारत में शामिल हो जाएंगे
ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन में कभी हार नहीं मानी। जीवन में बहुत सी विसम परिस्तिथियाँ आई पर उनके क़दम कभी नहीं डगमगाए और वो हर मुश्किल का सामना करते हुए , सकरात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते गए , इनकी कहानी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है
निशिकांत एक सरकारी दफ्तर में कार्यरत है |12 साल की नौकरी में बहुत खुश नहीं है| अपनी योग्यता के हिसाब से ही पद की इच्छा रखता है | वास्तव में उसकी इच्छा अपने देश की स्वतंत्रता में योगदान देने की है| ऐसे में आखिर उसके साथ क्या होता है ?क्या होता है आगे निशिकांत की जीवन में ?जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर की द्वारा लिखी गई कहानी अरुणोदय, नयनी दीक्षित की आवाज में
दुःशासन नारी को वासना एवं भोग की वस्तु कहता है।वह नारी के प्रति रूढ़िवादी दृष्टिकोण रखता है |वह नारी को भोग्या और पुरुष की दासी मानता है। वह नारी कीदुर्बलता का उपहास उड़ाता है|
स्वर्गीय चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा सामाजिक समानता के प्रबल पक्षधर थे, उनके प्रयासों के चलते इस बांध का निर्माण संभव हुआ। 22 अक्टूबर 1963 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस बांध को राष्ट्र को समर्पित किया।
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