पद्मश्री उड़न सिख मिल्खा सिंह का जन्मदिन है। स्वर्गीय मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर,1929 को मौजूदा पाकिस्तान के गोविंदपुरा शहर में हुआ था। उनका जीवन खेल को ही समर्पित रहा। मिलखा सिंह मरते दम तक खिलाड़ियों में जोश भरने का काम करते रहे।
जीन बैप्टस सीमेन चार्डिन ने 200 से अधिक चित्रों की रचना की। इनका पसंदीदा विषय खेलने वाला बच्चा रहा। घरेलू अंदरूनी शैली के चित्रों का को इन्होंने बखूबी चित्रित किया। उनकी चित्रकारी में बच्चों और घरेलू गतिविधियों को बखूबी दर्शाया गया है
पिकासो ने 1907 से क्यूबिज़्म की शैली में काम किया। इस प्रवृत्ति को ज्यामितीय आकृतियों के उपयोग से अलग किया जाता है जो वास्तविक वस्तुओं को आदिम आकृतियों में तोड़ते हैं|मानव वेदना का जीवित दस्तावेज कहीं जाने वाली इन कलाकृतियों को बनाने के लिए पिकासो ने अपना सब कुछ कल को समर्पित कर दिया|
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड में हुआ। पिता का नाम झावेर भाई और माता का नाम लाडबा पटेल था। माता-पिता की चौथी संतान वल्लभ भाई कुशाग्र बुद्धि के थे। उनकी रुचि भी पढ़ाई में ही ज्यादा रही।आज एकता के सूत्र में बंधे भारत के लिए देश सरदार पटेल का ही ऋणी है। कहा जाता है कि एक बार उनसे किसी अंग्रेज ने इस बारे में पूछा तो सरदार पटेल ने कहा- मेरा भारत बिखरने के लिए नहीं बना।सरदार पटेल’,’लोह पुरुष’ और ‘भारत का बिस्मार्क’ की उपाधियों से इन्हें सम्मानित किया गया 1991 में ‘भारत रत्न’ से भी इन्हें सम्मानित किया गया इनका जन्म दिवस ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है
साल 1996 में 20 अक्टूबर को पहली बार विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस (World Osteoporosis Day) मनाया गया था। जिसकी शुरुआत यूनाइटेड किंगडम के नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस सोसाइटी ने यूरोपीय आयोग के साथ मिलकर एक अभियान के साथ की थी।
नोबेल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक डायनामाइट का आविष्कार है.| नाइट्रोग्लिसरीन नामक एक रासायनिक पदार्थ में असीमित विस्फोटक शक्ति होती है. |नोबेल ने नाइट्रोग्लिसरीन की इस ताकत को पहचाना और उससे एक ऐसी खोज की, जिसने मानव इतिहास की दिशा बदल दी|अल्फ्रेड नोबेल शाही स्वीडिश वैज्ञानिक अकादमी के सदस्य भी थे| यही अकादमी अब नोबेल पुरस्कारों के लिए दुनिया भर से योग्य उम्मीदवारों का चयन करती है|
एक ही मां के अंश यानी सिबलिंग्स,यह रिश्ता बहुत खास होता है वह छोटी-छोटी नोकझोंक, वह साथ-साथ हंसना ,रोना और और अपनी कुछ खास बातों को सिर्फ उनके साथ बांटना |समय की रफ्तार में अगर यह रिश्ते आप से दूर चले गए हैं ,तो फिर से उन्हें अपने नजदीक जरूर लाइए |कैसे? जानते हैं इस खूबसूरत एहसास को, अंगोना साहा के साथ..
यतीन्द्रनाथ दास का जन्म 27 अक्टूबर 1904 को कोलकता में हुआ था। जब वे नौ वर्ष के थे तभी उनकी माँ का देहान्त हो गया था। उनके पिता ने उनका पालन पोषण किया। पढ़ाई के दौरान ही जब गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन आरम्भ किया तो यतीन्द्र भी आन्दोलन में कूद पड़े थे।
Reviews for: Milkha Singh – 20 Nov