चीनी फेरीवाला फाटक से बाहर आता दिखाई दिया । उसके कंधे पर भूरे कपड़े का गट्ठर था। मैंने कहा कि मैं फॉरेन नहीं खरीदती, तो सरल विस्मय के साथ उसने कहा कि हम क्या फारन है ? हम तो चाइना से आता है । मैंने अपनी नहीं को और अधिक कोमल बनाकर कहा, मुझे कुछ नहीं चाहिए भाई । चीनी भी विचित्र निकला,’ हमको भाई बोला है ।तुम जरूर लेगा। बहुत अच्छा सिल्क आता है सिस्तर। और उस दिन से उसे मेरे घर में आने जाने की परवानगी मिल गई
महादेवी जी के द्वारा लिखी गई कहानी गिल्लू उनकी चर्चित कहानियों में से एक है| कहानी एक गिलहरी (गिल्लू) और लेखिका के बीच के स्नेह की है |गिल्लू किस प्रकार लेखिका को मिला और उन दोनों के बीच में किस प्रकार का स्नेह था ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में कहानी गिल्लू
उनकी देहयष्टि में ऐसा कुछ उग्र या रौद्र नहीं था, जिसकी हम वीर गीतों की कवियत्री में कल्पना करते हैं। बहन सुभद्रा का चित्र बनाना कुछ सहज नहीं है। गोल मुख , चौड़ा माथा , सरल भ्रकुटियाँ , बड़ी भावस्वात आँखें, छोटी सुडौल नासिका, हँसी को जमा कर गढ़े हुए से होंठ, दृढ़ता सूचक ठुड्डी, सब कुछ मिलकर अत्यंत निश्चल, कोमल, उदार व्यक्तित्व वाली भारतीय नारी। एक बार मृत्यु की चर्चा चल पड़ी थी। उन्होंने कहा ,”मेरे तो मन में मरने के बाद भी धरती छोड़ने की कल्पना नहीं है । मैं चाहती हूँ मेरी समाधि हो। जिसके चारों ओर नित्य मेला लगता रहे। बच्चे खेलते रहे ।स्त्रियाँ गाती रहे और कोलाहल होता रहे।
किसी सजातीय -विजातीय जीव से मेल ना रखने के कारण माली ने उस खरगोश का नाम लड़ाकू रखा। मेरी शिष्याओ ने उसके कट खन्ने स्वभाव के कारण उसे दुर्मुख पुकारना आरंभ किया , और मैंने दुर्वासा की संज्ञा से विभूषित किया । उसका मिलना भी एक दुर्योग ही कहा जाएगा । पड़ोस के दंपति ने खरगोश का एक जोड़ा पाल रखा था। एक रात मार्जारी ने दोनों खरगोश और उनके तीन बच्चों को क्षत-विक्षत कर डाला। केवल एक शशक- शिशु जीवित बचा, जिसे हमारा माली मेरे घर ले आया। मैं उसके अकेलेपन को दूर करने के लिए एक शशक- वधू खरीद लाई। किंतु दुर्मुख ने उसे स्वीकार नहीं किया , परंतु कुछ महीनों के अंतराल में उसकी कलहप्रियता में कुछ अंतर दिखाई पड़ा।
अगर मर्द बिना मूछों के रहे तो वह मर्द नहीं लगता |एक मूंछ ही तो मर्दाना चेहरे के लिए अनिवार्य होती है और मेरे पति ने एक नौकरानी की भूमिका निभाने के लिए अपनी मूंछे कटवा ली |अब तो शायद ने उन्हें प्यार भी ना कर सकूं| और मर्दों में मूछों के बिना कोई आकर्षण नहीं | मर्दों की मूछों को लेकर एक स्त्री अपनी दोस्त से यह सब बातें क्यों कह रही है ?इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? इसे जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी मूंछ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
महाशय मेहता उन अभागों में से हैं जिनको अपनी मेहनत के हिसाब से प्रशंसा या पुरस्कार नहीं मिलता| किंतु अब उन्होंने सोच लिया है कि वह राजा साहब के आगे स्तुति गान करेंगे| इसके चलते वह शीघ्र दीवान बन गए |किंतु मेहता जी की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुई ,आगे अब क्या क्या हुआ? पूरी बात जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी रियासत का दीवान ,सुमन वैद्य की आवाज में
राजभवन की अतिथिशाला में सजावट के लिए एक पुरातन दीपदान को सिगरेट दानी के रूप में सुशोभित किया जाता है |जबकि उस दीपदान में भगवान श्री गणेश की सुंदर मूर्ति भी स्थापित होती है| हमारी सरकार में सर्कुलर होना गर्व की बात मानी जाती है | इसी तर्ज पर भगवान का नाम लेना सर्कुलर होने पर बाधा होता है| बड़ी खूबसूरती के साथ इसी बात को रखते हुए कहानी राजभवन की सिगरेट दानी में व्यंग किया गया है|
बड़े बुजुर्ग घर की शान होते हैं उनकी बातों में एक तजुर्बा होता है उनके सानिध्य में सब कुछ कितना सरल हो जाता है बच्चों के लिए उनकी दादी तो पूरा स्नेह का खजाना होती है इसी रिश्ते के मधुर संबंधों काअवलोकन कराती हुई कविता है दादी पल्लवी की आवाज में
वैवाहिक जीवन के एकपहलू में जितने जितने सुख हैं अगर उसके दूसरे पहलू को देखा जाए तो वह उतना ही हृदय विदारक और भयानक है | कहानी में नायक के जीवन में अपने वैवाहिक जीवन की इस समस्या के समाधान के लिए नायक कौन-कौन से प्रयत्न करता है | जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी हीला भूपेश पांडे जी की आवाज में
Reviews for: Nisha ki dho deta Rakesh (निशा की धो देता राकेश)