कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया परमवीर चक्र (29 नवंबर 1935 – 5 दिसंबर 1961) एक भारतीय सैन्य अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के सदस्य थे। वह परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले एकमात्र संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक हैं। वह किंग जॉर्ज के रॉयल मिलिट्री कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र थे।
अल्बर्ट एक्का ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिया था, जहां वह दुश्मनों से लड़ते हुए वे शहीद हो गए थे| मरणोपरांत उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया था|बता दें कि जंग के दौरान उन्हें 20 से 25 गोलियां लगी थी| उनका पूरा शरीर दुश्मन की गोलियों से छलनी हो गया था|
लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे को 1948 में परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राणा की भूमिका आव्दितीय थी। बारूदी सुरंग हमारी बटालियन की उन्नति में बाधा बन रही थी। ऐसे में राणे के नेतृत्व में गोलियों की बौछार के बीच बारूदी सुरंग को साफ़ करने का जिम्मा राणे ने बखूबी निभाया ।यह परमवीर चक्र पाने वाले पहले जीवित व्यक्ति थे। 11 जुलाई 1994 को इनका निधन हो गया।
सूबेदार जोगिंदर सिंह शूरसैनी राजपूत (26 सितंबर 1921 – 23अक्टूबर1962) सिख रेजिमेंट के एक भारतीय सैनिक थे। इन्हें 1962 के भारत-चीन युद्ध में असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।साल 1962 का भारत-चीन युद्ध में एक हीरो ऐसा भी था जिसने गोली लगने के बाद भी हार नहीं मानी और युद्ध के मैदान में डटा रहा. ये हीरो कोई और नहीं बल्कि सूबेदार जोगिंदर सिंह थे,जोगिंदर सिंह ने ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के नारे लगाते हुए चीनी सेना पर हमला किया था और अकेले फौज पर भारी पड़े|
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह (श्री पीरू सिंह शेखावत भी) (20 मई 1918 – 18 जुलाई 1948) भारतीय सैनिक थे। उनका 1947 के भारत-पाक युद्ध में निधन हुआ। उन्हें 1952 में मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो शत्रु के सामने वीरता प्राप्त करने के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च भारतीय सम्मान है।
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (17 जुलाई 1943 – 14 दिसंबर 1971) भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी थे। भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के दौरान पाकिस्तानी वायु सेना के हवाई हमले के खिलाफ श्रीनगर एयर बेस के बचाव में शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से वर्ष 1972 में सम्मानित किया गया।
कुंभ मेला, विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन, भारत की संस्कृति और आस्था की अद्भुत मिसाल है। इसकी शुरुआत पौराणिक कथा से होती है, जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत कुंभ को लेकर देवता और असुरों के बीच संघर्ष हुआ। उस संघर्ष के दौरान अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। इन चार स्थानों पर ही आज कुंभ मेले का आयोजन होता है।
हर 12 साल में लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारत की विविधता और एकता का प्रतीक भी है।
आइए, इस अद्भुत परंपरा को समझें और गर्व करें अपनी सांस्कृतिक धरोहर पर।
3 नवंबर 1947 को, जब देश अभी आजाद हुआ था, पाकिस्तान ने श्रीनगर पर हमला बोल दिया था। इस हमले का मकसद था श्रीनगर एयरबेस को कब्जे में करना। 700 दुश्मन आक्रमणकारी थे, लेकिन हमारे 50 जवानों ने उन्हें बहादुरी से रोका। उन्होंने सिर्फ छह घंटे में आगे बढ़ने से रोका और 200 आतंकवादी को नर्क पहुंचा दिया। इस युद्ध में हमारे 22 जवान शहीद हो गए, लेकिन उनकी बलिदानी चेतना हमें आगे बढ़ने का साहस देती है। इस कहानी का मुख्य किरदार, देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा (Major Somnath Sharma) है।
कठिन परिश्रम ,दृढ़ शक्ति दूरदर्शिता और कुछ कर गुज़रने का सपना लेकर कीमत राय गुप्ता जी ने किस प्रकार मात्र 10000 से 17 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया ? हैवेल्स इंडिया लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनी के मालिक कीमत राय गुप्ता की ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव के कई पहलुओं से रू-ब-रू होते हैं ,मज़ीद की आवाज़ से जानते हैं आम आदमी खास कहानी में…
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (17 जुलाई 1943 – 14 दिसंबर 1971) भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी थे। भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के दौरान पाकिस्तानी वायु सेना के हवाई हमले के खिलाफ श्रीनगर एयर बेस के बचाव में शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से वर्ष 1972 में सम्मानित किया गया।
ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन में कभी हार नहीं मानी।, जीवन में बहुत सी विसम परिस्तिथियाँ आई पर उनके क़दम कभी नहीं डगमगाए और वो हर मुश्किल का सामना करते हुए , सकरात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते गए , इनकी कहानी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है
लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे को 1948 में परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राणा की भूमिका आव्दितीय थी। बारूदी सुरंग हमारी बटालियन की उन्नति में बाधा बन रही थी। ऐसे में राणे के नेतृत्व में गोलियों की बौछार के बीच बारूदी सुरंग को साफ़ करने का जिम्मा राणे ने बखूबी निभाया ।यह परमवीर चक्र पाने वाले पहले जीवित व्यक्ति थे। 11 जुलाई 1994 को इनका निधन हो गया।
दीपक के पाँच संदेश – भाग 4
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
जदुनाथ सिंह परमवीर चक्र विजेता (21 नवंबर 1916 -6 फरवरी 1948 )नौशेरा के झांगर पोस्ट में मात्र अपने 9 सिपाहियों के साथ डटे इस नौजवान ने सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों को अपने जोश और ज़ज़्बे से कामयाब नहीं होने दिया। पाकिस्तानी सैनिकों ने लगातार तीन बार कोशिश की लेकिन अपने सारे साथियों के वीरगति प्राप्त होने के बावजूद अकेले- दम सीने पर 11 गोलियां खाकर भी पाकिस्तानी सैनिकों को तब तक मुंह -तोड़ जवाब दिया जब तक हिंदुस्तानी सेना वहां नहीं आ गयी। 6 फरवरी 1948 को हमारा यह वीर सैनिक शहीद हो गया ।भारत सरकार की ओर से अपने सर्वोच्च सैन्य अलंकरण परमवीर चक्र से मरणोपरांत इन्हें सम्मानित किया गया।
3 नवंबर 1947 को, जब देश अभी आजाद हुआ था, पाकिस्तान ने श्रीनगर पर हमला बोल दिया था। इस हमले का मकसद था श्रीनगर एयरबेस को कब्जे में करना। 700 दुश्मन आक्रमणकारी थे, लेकिन हमारे 50 जवानों ने उन्हें बहादुरी से रोका। उन्होंने सिर्फ छह घंटे में आगे बढ़ने से रोका और 200 आतंकवादी को नर्क पहुंचा दिया। इस युद्ध में हमारे 22 जवान शहीद हो गए, लेकिन उनकी बलिदानी चेतना हमें आगे बढ़ने का साहस देती है। इस कहानी का मुख्य किरदार, देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा (Major Somnath Sharma) है।
विपरीत परिस्थितियों में जब सारे रास्ते बंद हो जाए ,ऐसे में आपको उन परिस्थितियों से कौन बाहर निकाल सकता है? इसके बारे में क्या कहते हैं संदीप द्विवेदी…
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