“सोमा मोंडल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की पहली महिला अध्यक्ष, जिन्होंने अपने नेतृत्व और दूरदृष्टि से भारतीय स्टील उद्योग में नए आयाम स्थापित किए हैं। फोर्ब्स द्वारा दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल, सोमा मोंडल की यात्रा प्रेरणादायक है। उनके प्रबंधन के पहले साल में सेल का मुनाफा तीन गुना बढ़ा और उन्होंने कंपनी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। एक छोटे से ओडिया परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इतिहास रचा।
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“वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म समीक्षक, और पद्मश्री सम्मानित शीला झुंझुनवाला ने 97 वर्ष की आयु में भी लेखन और समाजसेवा में अपनी सक्रियता को बनाए रखा है। उनका नया उपन्यास “”पतझड़ में वसंत”” वृद्ध व्यक्तियों की त्रासदी को बखूबी प्रस्तुत करता है।
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मेरे राम
सुनिए राम… महसूस कीजिए राम
“मेरे राम” एक ऐसा विशेष संग्रह है, जहाँ प्रभु श्रीराम केवल कथा के पात्र नहीं, बल्कि जीवन, आदर्श, मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं के रूप में आपके सामने उपस्थित होते हैं।
इस विशेष संकलन में सुनिए —
📖 रामचरितमानस की दिव्य चौपाइयाँ और प्रसंग
🎙️ “मानव हैं मेरे राम” जैसी भावपूर्ण श्रृंखला
🪔 राम पर आधारित कविताएँ, कथाएँ और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ
यह संग्रह आपको राम के अनेक रूपों से जोड़ता है —
आराध्य राम, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, और मानवता के प्रतीक राम।
यह केवल श्रवण नहीं… एक आत्मिक यात्रा है —
राम को समझने की, राम को जीने की, राम को महसूस करने की।
🎧 सुनिए
“मेरे राम”
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“किरण मजूमदार शॉ ने साबित कर दिया है कि सच्ची लगन, कठिन मेहनत, और समझदारी से कोई भी सफलता के शिखर को छू सकता है। बॉयोकॉन की फाउंडर और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी होने के बावजूद, उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बायोकॉन की शुरुआत एक छोटे से गैराज से की और आज इसे वैश्विक पहचान दिलाई। भारत की सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल किरण की कहानी उनकी अटूट इच्छाशक्ति और अद्वितीय प्रबंधन कुशलता की मिसाल है।
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“शोभना भरतिया, एचटी मीडिया की चेयरपर्सन और भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक, जो देश के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्यों में से एक का नेतृत्व करती हैं। पत्रकारिता की दुनिया में अपने बेहतरीन दृष्टिकोण और नेतृत्व से उन्होंने नई मिसालें कायम की हैं। राजसभा सदस्य और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक आदर्श लीडर के रूप में स्थापित किया है। शोभना भरतिया की कहानी एक प्रेरणा है, जो बताती है कि कैसे मजबूत नेतृत्व और साहसिक फैसले किसी को ऊँचाइयों पर पहुंचा सकते हैं।
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अरुंधति ने न केवल बैंकिंग की दुनिया में महिलाओं का मान बढ़ाया, बल्कि उन्होंने डिजिटल क्रांति और सामाजिक सुधारों का मार्ग भी प्रशस्त किया। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में और जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरक यात्रा को सुनें!”
चारों कुंभ स्थलों का महत्व: भारतीय संस्कृति का आध्यात्मिक चमत्कार
भारत में चार स्थान ऐसे हैं, जो कुंभ मेले के आयोजन का पवित्र केंद्र बनते हैं – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन स्थलों का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि ये भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक भी हैं।
प्रयागराज: गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम। यहां कुंभ में स्नान से जीवन की शुद्धि और पापों का नाश होता है।
हरिद्वार: गंगा नदी का प्रवेश द्वार। यहां स्नान से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
उज्जैन: क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित, यह स्थल भगवान महाकालेश्वर से जुड़ा है। यहां कुंभ अध्यात्म और शिव आराधना का केंद्र है।
नासिक: गोदावरी नदी के तट पर बसा यह स्थान रामायण और अमृत मंथन की कहानियों से जुड़ा है।
चारों स्थलों पर कुंभ मेला एक ऐसा अनुभव है, जो आस्था, परंपरा और आध्यात्मिकता को जीवंत करता है।
गाथा के साथ जानिए इन पवित्र स्थलों की कहानियां और इनके महत्व की गहराई।
ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन में कभी हार नहीं मानी।, जीवन में बहुत सी विसम परिस्तिथियाँ आई पर उनके क़दम कभी नहीं डगमगाए और वो हर मुश्किल का सामना करते हुए , सकरात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते गए , इनकी कहानी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है
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“लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिड हमले के बाद सिर्फ अपने जीवन को नहीं बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने का प्रण लिया। उनकी साहसिकता और सक्रियता ने कई लोगों को प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरणादायक कहानी को सुनें!”
कहते हैं “ अपनी धरती और जड़ों से जुड़कर ही मनुष्य अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है क्योंकि वे जड़े ही उसकी ज़िन्दगी को मज़बूती देती हैं जिनके सहारे वह आगे सदा आगे बढ़ता है और ज़िन्दगी को गहराई से समझता है “ सब उसे प्यार और दुलार से बाला पुकारते थे और बहुत कम उम्र में ही बाला ने इस बात को समझ कर जीवन में धारण कर लिया था इनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है , आइये जानते हैं इनके बारे में
पुनर्विवाह का दूसरा नाम है समझौता । हर परिस्थिति से , हर हालात से समझौता करना ही पुनर्विवाह है। हालात से तो समझौता किया जा सकता है लेकिन प्यार में समझौता ? कभी नहीं । फिर ऐसा समझौता क्यों करना पड़ा ? क्या मजबूरी थी ?
माता-पिता हमें पाल – पोस कर बड़ा करते हैं ।इस काबिल बनाते हैं कि हम समाज में सर उठा कर जी सके। फिर ऐसा क्यों होता है ,कि काबिल होते ही हम माता-पिता को इस्तेमाल की वस्तु समझ लेते हैं ? उन्हें घर का माली ,घर का सामान लाने वाला नौकर, बच्चों की केयर- टेकर, और वॉचमैन मान लेते हैं ?
“मिथाली राज: महिला क्रिकेट का आइकॉन! उनकी उपलब्धियों ने न केवल खेल को नया आयाम दिया है, बल्कि युवाओं को भी प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी को जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और Navratri स्पेशल ‘उड़ान हौसलों की’ में जाकर बस क्लिक कर सुनिए Arti Srivastava की खूबसूरत आवाज़ में!””
शकुन डॉक्टर के पास जाने की जिद कर रही है, तो क्या मुझ में कुछ कमी है जो शकुन माँ नहीं बन पा रही है? दोनों के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। शकुन बुझी -बुझी सी रहने लगी है । सतीश देख रहा था कि शकुन आलोक के आने से बहुत खुश है ।तो क्या उन दोनों के बीच ? नहीं – नहीं ,यह मेरे दिमाग का फितूर है। शकुन मेरी है, सिर्फ मेरी ।जैसे शादी के पहले 2 साल तक थी।
साधारणत: धोबियों का रंग साँवला पर मुख की गठान सुडौल होती है ।बिबिया ने यह विशेषता गेंहएँ रंग के साथ पाई है । उसका हँसमुख स्वभाव उसे विशेष आकर्षण देता है। सुडौल, गठीली शरीर वाली बिबिया को धोबिन समझना कठिन था। पर थी वह धोबिनों में भी सबसे अभागी धोबिन। अपना ही नहीं वह दूसरों का काम करके भी आनंद का अनुभव करती थी। पाँचवें वर्ष में ब्याह हो गया। पर गौने से पहले ही वर की मृत्यु ने इस संबंध को तोड़ दिया। जिस प्रकार उच्च वर्ग की स्त्री का गृहस्थी बसा लेना कलंक है उसी प्रकार नीच वर्ग की स्त्री का अकेला रहना सामाजिक अपराध है। कन्हैया ने उसका दोबारा ब्याह रचा दिया लेकिन——-
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