“वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म समीक्षक, और पद्मश्री सम्मानित शीला झुंझुनवाला ने 97 वर्ष की आयु में भी लेखन और समाजसेवा में अपनी सक्रियता को बनाए रखा है। उनका नया उपन्यास “”पतझड़ में वसंत”” वृद्ध व्यक्तियों की त्रासदी को बखूबी प्रस्तुत करता है।
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“शोभना भरतिया, एचटी मीडिया की चेयरपर्सन और भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक, जो देश के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्यों में से एक का नेतृत्व करती हैं। पत्रकारिता की दुनिया में अपने बेहतरीन दृष्टिकोण और नेतृत्व से उन्होंने नई मिसालें कायम की हैं। राजसभा सदस्य और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक आदर्श लीडर के रूप में स्थापित किया है। शोभना भरतिया की कहानी एक प्रेरणा है, जो बताती है कि कैसे मजबूत नेतृत्व और साहसिक फैसले किसी को ऊँचाइयों पर पहुंचा सकते हैं।
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“कल्पना चावला: वो नाम जिसने अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों को छूकर हर भारतीय को गर्व से भर दिया। अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली महिला, कल्पना का सपना बचपन से ही आसमान से परे देखने का था। उनकी यह जिज्ञासा और मेहनत उन्हें अंतरिक्ष तक ले गई। 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में कदम रखने के बाद, उन्होंने अपनी दूसरी उड़ान के दौरान 2003 में सभी के दिलों में अमर हो गईं। कल्पना की कहानी न केवल उनकी उपलब्धियों का वर्णन करती है, बल्कि हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है जो बड़े सपने देखता है।
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मेरे राम
सुनिए राम… महसूस कीजिए राम
“मेरे राम” एक ऐसा विशेष संग्रह है, जहाँ प्रभु श्रीराम केवल कथा के पात्र नहीं, बल्कि जीवन, आदर्श, मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं के रूप में आपके सामने उपस्थित होते हैं।
इस विशेष संकलन में सुनिए —
📖 रामचरितमानस की दिव्य चौपाइयाँ और प्रसंग
🎙️ “मानव हैं मेरे राम” जैसी भावपूर्ण श्रृंखला
🪔 राम पर आधारित कविताएँ, कथाएँ और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ
यह संग्रह आपको राम के अनेक रूपों से जोड़ता है —
आराध्य राम, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, और मानवता के प्रतीक राम।
यह केवल श्रवण नहीं… एक आत्मिक यात्रा है —
राम को समझने की, राम को जीने की, राम को महसूस करने की।
🎧 सुनिए
“मेरे राम”
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“सोमा मोंडल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की पहली महिला अध्यक्ष, जिन्होंने अपने नेतृत्व और दूरदृष्टि से भारतीय स्टील उद्योग में नए आयाम स्थापित किए हैं। फोर्ब्स द्वारा दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल, सोमा मोंडल की यात्रा प्रेरणादायक है। उनके प्रबंधन के पहले साल में सेल का मुनाफा तीन गुना बढ़ा और उन्होंने कंपनी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। एक छोटे से ओडिया परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इतिहास रचा।
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“किरण मजूमदार शॉ ने साबित कर दिया है कि सच्ची लगन, कठिन मेहनत, और समझदारी से कोई भी सफलता के शिखर को छू सकता है। बॉयोकॉन की फाउंडर और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी होने के बावजूद, उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बायोकॉन की शुरुआत एक छोटे से गैराज से की और आज इसे वैश्विक पहचान दिलाई। भारत की सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल किरण की कहानी उनकी अटूट इच्छाशक्ति और अद्वितीय प्रबंधन कुशलता की मिसाल है।
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“कल्पना चावला: वो नाम जिसने अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों को छूकर हर भारतीय को गर्व से भर दिया। अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली महिला, कल्पना का सपना बचपन से ही आसमान से परे देखने का था। उनकी यह जिज्ञासा और मेहनत उन्हें अंतरिक्ष तक ले गई। 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में कदम रखने के बाद, उन्होंने अपनी दूसरी उड़ान के दौरान 2003 में सभी के दिलों में अमर हो गईं। कल्पना की कहानी न केवल उनकी उपलब्धियों का वर्णन करती है, बल्कि हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है जो बड़े सपने देखता है।
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अरुंधति ने न केवल बैंकिंग की दुनिया में महिलाओं का मान बढ़ाया, बल्कि उन्होंने डिजिटल क्रांति और सामाजिक सुधारों का मार्ग भी प्रशस्त किया। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में और जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरक यात्रा को सुनें!”
इस गाथा में हम कुंभ मेले के प्रकारों की रोचक और विस्तृत कहानी साझा करेंगे। दरअसल, कुंभ मेला चार प्रकार का होता है- कुंभ, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ। पूर्ण कुंभ: 12 वर्षों में एक बार
अर्ध कुंभ: हर 6 साल में
महाकुंभ: 144 वर्षों में एक बार
कुंभ स्नान: विशेष ग्रह-नक्षत्र योग में
हर कुंभ का अपना महत्व, अपनी महिमा है
रूढ़िवादी परिवार से होने तथा पति के द्वारा दी गई यातना के बावज़ूद एक अबला सी लगने वाली महिला कैसे करोड़ों रुपए की कंपनी की मालकिन बनी? जानिए अबला से सबला बनने का पूरा सफ़र भारती सुमारिया जी का ,आम आदमी की खास कहानी में….
“शोभना भरतिया, एचटी मीडिया की चेयरपर्सन और भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक, जो देश के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्यों में से एक का नेतृत्व करती हैं। पत्रकारिता की दुनिया में अपने बेहतरीन दृष्टिकोण और नेतृत्व से उन्होंने नई मिसालें कायम की हैं। राजसभा सदस्य और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक आदर्श लीडर के रूप में स्थापित किया है। शोभना भरतिया की कहानी एक प्रेरणा है, जो बताती है कि कैसे मजबूत नेतृत्व और साहसिक फैसले किसी को ऊँचाइयों पर पहुंचा सकते हैं।
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किसी सजातीय -विजातीय जीव से मेल ना रखने के कारण माली ने उस खरगोश का नाम लड़ाकू रखा। मेरी शिष्याओ ने उसके कट खन्ने स्वभाव के कारण उसे दुर्मुख पुकारना आरंभ किया , और मैंने दुर्वासा की संज्ञा से विभूषित किया । उसका मिलना भी एक दुर्योग ही कहा जाएगा । पड़ोस के दंपति ने खरगोश का एक जोड़ा पाल रखा था। एक रात मार्जारी ने दोनों खरगोश और उनके तीन बच्चों को क्षत-विक्षत कर डाला। केवल एक शशक- शिशु जीवित बचा, जिसे हमारा माली मेरे घर ले आया। मैं उसके अकेलेपन को दूर करने के लिए एक शशक- वधू खरीद लाई। किंतु दुर्मुख ने उसे स्वीकार नहीं किया , परंतु कुछ महीनों के अंतराल में उसकी कलहप्रियता में कुछ अंतर दिखाई पड़ा।
एक लड़की के लिए मायका क्या होता है ? सिर्फ वही जानती है । मायके के नाम से ही आँखें भर आती हैं। सारा बचपन, सखियाँ,सावन, माँ-बाबूजी, भईया, बहन आँखों में तैर जाते है।मायके जाने के नाम से ही ज़मीन पर पैर नही पड़ते है।वक्त काटे नही कटता है।क्या कोई ऐसा होगा , जो मायके न जाने की कसम खाले ? श्रुति ने मायके न जाने की कसम खाई थी। आखिर क्यों ?
मुंशी राम सेवक की सारी धाक मिट्टी में मिल गई। बूढ़ी विधवा, मूंगा के पैसे हड़प करना उन्हें रास ना आया। ब्राह्मणी मूंगा ने उनके द्वार पर प्राण क्या त्यागे, सारे गाँव ने उनसे मुँह मोड़ लिया ।मूंगा के भूत का डर अलग से सताने लगा। पत्नी नागिन चल बसी। बेटा रामगुलाम रिफारमेंट्री स्कूल में भर्ती हो गया ।और खुद रामसेवक साधु हो गए। गरीब की हाय उनके पूरे परिवार को लील गई।
पश्चिम में रंगो का उत्सव देखते देखते जैसे ही मुँह फेरा कि नौकर सामने आ खड़ा हुआ, कि एक वृद्ध मुझसे मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मेरी कविता की पहली पंक्ति ही लिखी गई थी । मैं खिसिया गई ।कुछ खींझी सी उठी। कण्व ऋषि जैसे सफेद बाल और दूधफेनी जैसी सफेद दाढ़ी वाला मुख । मैंने कहा कि आपको पहचानती नहीं ? तो उन्होंने उत्तर दिया कि जिस के द्वार पर आया है उसका नाम जानता है, इससे अधिक माँगने वाले का परिचय क्या होगा? मेरी पोती आपसे मिलने के लिए विकल है । मैं आश्चर्य से वृद्ध की ओर देखती रह गई।
पुनर्विवाह का दूसरा नाम है समझौता । हर परिस्थिति से , हर हालात से समझौता करना ही पुनर्विवाह है। हालात से तो समझौता किया जा सकता है लेकिन प्यार में समझौता ? कभी नहीं । फिर ऐसा समझौता क्यों करना पड़ा ? क्या मजबूरी थी ?
Reviews for: पद्मश्री शीला झुनझुनवाला: पत्रकारिता का जीवित इतिहास!