अल्बर्ट एक्का ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिया था, जहां वह दुश्मनों से लड़ते हुए वे शहीद हो गए थे| मरणोपरांत उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया था|बता दें कि जंग के दौरान उन्हें 20 से 25 गोलियां लगी थी| उनका पूरा शरीर दुश्मन की गोलियों से छलनी हो गया था|
सूबेदार जोगिंदर सिंह शूरसैनी राजपूत (26 सितंबर 1921 – 23अक्टूबर1962) सिख रेजिमेंट के एक भारतीय सैनिक थे। इन्हें 1962 के भारत-चीन युद्ध में असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।साल 1962 का भारत-चीन युद्ध में एक हीरो ऐसा भी था जिसने गोली लगने के बाद भी हार नहीं मानी और युद्ध के मैदान में डटा रहा. ये हीरो कोई और नहीं बल्कि सूबेदार जोगिंदर सिंह थे,जोगिंदर सिंह ने ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के नारे लगाते हुए चीनी सेना पर हमला किया था और अकेले फौज पर भारी पड़े|
अक्टूबर 1962 में चीन -भारत युद्ध में पैन्गाॅग झील के उत्तर में मेजर धन सिंह थापा ने 8 गोरखा राइफल्स के प्रथम बटालियन की कमान संभाली। चीनी सेना ने जब इस पोस्ट को घेर लिया था ,ऐसे में मेज़र थापा और उनके साथियों ने इस पोस्ट पर होने वाले तीनों आक्रमणों को असफल कर दिया। युद्ध के दौरान उनके सराहनीय प्रयास के कारण इन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
3 नवंबर 1947 को, जब देश अभी आजाद हुआ था, पाकिस्तान ने श्रीनगर पर हमला बोल दिया था। इस हमले का मकसद था श्रीनगर एयरबेस को कब्जे में करना। 700 दुश्मन आक्रमणकारी थे, लेकिन हमारे 50 जवानों ने उन्हें बहादुरी से रोका। उन्होंने सिर्फ छह घंटे में आगे बढ़ने से रोका और 200 आतंकवादी को नर्क पहुंचा दिया। इस युद्ध में हमारे 22 जवान शहीद हो गए, लेकिन उनकी बलिदानी चेतना हमें आगे बढ़ने का साहस देती है। इस कहानी का मुख्य किरदार, देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा (Major Somnath Sharma) है।
अब्दुल हमीद मसऊदी (1 जुलाई 1933 – 10सितम्बर 1965)भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त की जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला।युद्ध में शहीद होने से पहले पाकिस्तानी सेना के आठ पैटन टैंको को नष्ट कर लड़ाई का रुख पलट दिया था| पाकिस्तान को भागना पड़ा था और इस तरह से भारतीय सेना को विजय मिली थी
कर्नल होशियार सिंह ( 5 मई, 1937- 6 दिसम्बर, 1998) परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय व्यक्ति है।1971 की भारत-पाकिस्तान की जंग भारतीय सैनिकों की वीरता और पराक्रम का एक शानदार उदाहरण है। इस जंग से जुड़े जवानों के बहादुरी के कई किस्से हैं। इस युद्ध में यूं तो चार जांबाजों को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाजा गया था, मगर सिर्फ एक जांबाज मेजर होशियार सिंह ऐसे थे जिन्हें यह पुरस्कार जीवित रहते मिला।
कुमाऊं रेजीमेंट की 13वीं बटालियन, जिसमें 123 वीर जवान थे, भारत-चीन 1962 युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए एक महान योद्धा, मेजर शैतान सिंह भाटी के नेतृत्व में, उच्च शिखरों पर भयंकर मुश्किलों का सामना किया। उनकी अद्वितीय साहस, प्रेरणादायक नेतृत्व और अनन्त बलिदान ने चीनी सैनिकों को अंधेरे में डाल दिया। मेजर शैतान सिंह को आखिरी सांस तक हारने का सोचना तक नहीं था, और उन्होंने दुश्मनों को उल्टे पैर भागते देखा। उन्हें इस अद्वितीय पराक्रम के लिए परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह (श्री पीरू सिंह शेखावत भी) (20 मई 1918 – 18 जुलाई 1948) भारतीय सैनिक थे। उनका 1947 के भारत-पाक युद्ध में निधन हुआ। उन्हें 1952 में मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो शत्रु के सामने वीरता प्राप्त करने के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च भारतीय सम्मान है।
“लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिड हमले के बाद सिर्फ अपने जीवन को नहीं बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने का प्रण लिया। उनकी साहसिकता और सक्रियता ने कई लोगों को प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए Gaatha ऐप डाउनलोड करें और इस प्रेरणादायक कहानी को सुनें!”
कुंभ मेला, विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन, भारत की संस्कृति और आस्था की अद्भुत मिसाल है। इसकी शुरुआत पौराणिक कथा से होती है, जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत कुंभ को लेकर देवता और असुरों के बीच संघर्ष हुआ। उस संघर्ष के दौरान अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। इन चार स्थानों पर ही आज कुंभ मेले का आयोजन होता है।
हर 12 साल में लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारत की विविधता और एकता का प्रतीक भी है।
आइए, इस अद्भुत परंपरा को समझें और गर्व करें अपनी सांस्कृतिक धरोहर पर।
दीपक के पाँच संदेश – भाग 2
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
क्या आप जानते हैं कि जिस परीक्षा के नाम से हम सभी को इतना भय लगता है ,असल में परीक्षा की वह प्रक्रिया हमारी जिंदगी में कौन सा गुण विकसित करती है ? निश्चित तौर पर संदीप द्विवेदी के द्वारा पास- फेल से ऊपर परीक्षा का उद्देश्य को सुनकर , परीक्षा को लेकर भय की स्थिति पर भी एक सकारात्मक बदलाव महसूस करेंगे…
कुमाऊं रेजीमेंट की 13वीं बटालियन, जिसमें 123 वीर जवान थे, भारत-चीन 1962 युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए एक महान योद्धा, मेजर शैतान सिंह भाटी के नेतृत्व में, उच्च शिखरों पर भयंकर मुश्किलों का सामना किया। उनकी अद्वितीय साहस, प्रेरणादायक नेतृत्व और अनन्त बलिदान ने चीनी सैनिकों को अंधेरे में डाल दिया। मेजर शैतान सिंह को आखिरी सांस तक हारने का सोचना तक नहीं था, और उन्होंने दुश्मनों को उल्टे पैर भागते देखा। उन्हें इस अद्वितीय पराक्रम के लिए परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह (श्री पीरू सिंह शेखावत भी) (20 मई 1918 – 18 जुलाई 1948) भारतीय सैनिक थे। उनका 1947 के भारत-पाक युद्ध में निधन हुआ। उन्हें 1952 में मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो शत्रु के सामने वीरता प्राप्त करने के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च भारतीय सम्मान है।
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