सुंदरधुंगा – संजय शेफर्ड – पल्लवी
सुंदरधुंगा का शाब्दिक अर्थ है हमारी पहाड़ियों में एक खूबसूरत पत्थर की घाटी। इस घाटी के प्रसिद्ध और अद्भुत हिमनद हैं मार्टोली और सुखराम की घाटी। उत्तराखंड में कथित पिंडारी ग्लेशियर के दाईं ओर का ट्रेक सुंदरधुंगा घाटी पिंडारी ट्रेक और कफनी ग्लेशियर ट्रेक की तुलना में अधिक कठिन माना जाता है।गाथा के घुमंतू के साथ सुंदर आइए चलते हैं पल्लवी के साथ
पुदुचेरी जो पांडिचेरी के नाम से भी जाना जाता है ।भारत के दक्षिण का एक केंद्र शासित प्रदेश का एक शहर है। आज भी फ्रांसीसी संस्कृति की झलक यहां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां के प्राकृतिक दृश्य, खूबसूरत समुद्री तट ,यहां की संस्कृति यह सारी बातें पर्यटकों को अपने मोह में बांध लेने के लिए काफी है ।शांति की तलाश में पर्यटकों की पहली पसंद के लिए वाले जाना जाने वाला यह शहर और उसके आसपास के कई पर्यटक स्थलों के बारे में क्या आप ऐसे खूबसूरत जगह के बारे में और नहीं जानना चाहेंगे, तो सुनिए घुमंतू की श्रृंखला से संजय शेफर्ड की डायरी सै भारत की फ्रेंच कैपिटल पुदुचेरी और शांत समुद्र का किनारा ,पल्लवी गर्ग की आवाज़ में…
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला शहर के बाहरी क्षेत्र में बसा मैकलॉडगंज पर्यटकों में काफी फेमस है। यहां तिब्बती मूल के काफी लोग रहते हैं, इस वजह से इसे लिटिल लहासा या धासा के नाम से भी जाना जाता है।गाथा के घुमंतू के साथ सुंदर आइए चलते हैं पल्लवी के साथ
किब्बर – संजय शेफर्ड – पल्लवी
कभी-कभी हमारा मन भीड़-भाड़ की जगह से हटकर किसी शांत, कम जनसंख्या वाले क्षेत्र और बेहद खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के बीच में जाने का करता है, तो अब घुमंतू ने आपकी इस समस्या का समाधान कर दिया है। दुनिया की सबसे ऊंचाई में बसे एक गांव किब्बर की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराते हुये ।यहां के सादा और उत्साहपूर्ण जीवन को देखकर आपका मन खुशी से झूम उठेगा। हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत गांव किब्बर की यात्रा करें,घुमंतू के साथ पल्लवी की आवाज़ में सिर्फ़ गाथा पर..
प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग इगतपुरी महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चमी घाट पर स्थित स्ह्याद्री पर्वतमाला से घिरी यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। प्रकृति ने इस जगह को क्या खूब सजाया-संवारा और खूबसूरती बक्शी है। प्रकति प्रेमियों को यहां एक बार ज़रूर जाना चाहिए
जैसलमेर – संजय शेफर्ड – पल्लवी
जैसलमेर का इतिहास और सुंदरता पर्यटकों को मोहित करने में कभी विफल नहीं होती है। आपके लिए शहर में और उसके आसपास कई आकर्षण हैं, चाहे वह जैसलमेर किले और पटवों की हवेली की भव्यता हो, जैन मंदिरों की शांति हो, या खरीदारी के स्थानों की जीवंतता और दिलचस्प रेगिस्तानी त्यौहार हों। इतना ही नहीं, रेगिस्तान में जीप टूर और ऊंट सफारी आपके उत्साह को बढ़ाने के लिए काफी है।जैसलमेर जहाँ राजस्थान का रंग देखने को मिलता हैजैसलमेर को गोल्डन सिटी के नाम से भी जाना जाता है. विश्व की पुरानी धरोहर के रूप में जैसलमेर एक राज्य के नाम से प्रसिध्य हुआ करता था. यहाँ पीले से रंग की रेत पाई जाती हैसंजय शेफर्ड की डायरी से घुमंतू में सैर कीजिए जैसलमेर की, पल्लवी की आवाज़
अजीब सी टीस उठती है नज़ीरन के मन मे ये सोच के की शायद उसी की एक छोटी सी गलती से कैसे उसकी प्यार भरी ज़िन्दगी में जलजला आया और एक पल में उसका सब कुछ छिन गया… पर जो कुछ हुआ, क्या वाकई वो नज़ीरन कि गलती थी.???
अक्सर हमारा वक्त बीती -बातों को याद करने में चला जाता है| आप कुछ ऐसा ही पल्लवी के द्वारा लिखी गई कविताyad aa gya mujko gujra zamana(याद आ गया मुझको गुज़रा ज़माना) को सुनकर निश्चित तौर पर सब अपने बचपन में जरूर लौट जाएंगे, उन पलों को याद करेंगे, जो हमारे- आपके जीवन का एक खूबसूरत हिस्सा है |
samaj ki buraiyon aur kaise ladkiyaan purush pradhaan samaj mein aaj ke samay mein bhi apni pehchaan dhoondh rahee hain… yeh ek sochne yogya baat hai… cover page: ek ladki, old man, table pe rakhha chai ka cup
मैं तुम्हे फिर मिलूँगी काव्य संग्रह की कुछ कविताओं को शीर्षक दिया है मुलाक़ात।
अमृता बीमार थीं, बहुत बीमार। अपने नग्मों, अपनी कविताओं के माध्यम से वो कभी अपनी माँ को याद करतीं, कभी सभी बंधनों के परे जा, कृष्ण से, गणेश से, साईं से मिलतीं, कभी बस अपने प्रेमी से मुलाक़ात के लिए किसी भी सीमा को पार करने की बात करतीं।
सुनते हैं शीर्षक मुलाक़ात के अंतर्गत समाहित मैं तुम्हे फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पे, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी इस कविता से शुरुवात होती है इस शीर्षक प्रेम की कविताओं की।
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी आखिरी कविता थी जो अमृता ने लिखी थी। प्रेम से लबरेज़ ये कविता, आंखे नम कर देती है। बेइन्तहां प्रेम में डूबी अमृता, बेहद बीमार अमृता पूरे प्रेम और समर्पण से अपने आप को तैयार कर लेती हैं अपनी आने वाली अन्त यात्रा के लिए।
प्रेम शीर्षक के अंतर्गत जी कविताएँ हैं, उनमें न सिर्फ उनका अपने साथी के लिए प्रेम उमड़ता है, बल्कि, उंस ईश्वर के लिए भी प्रदर्शित होता है जिसके आगे उन्होंने समर्पण कर दिया है।
सुनते हैं शीर्षक प्रेम के अंतर्गत, आत्मा की परमात्मा के लिए प्रेम में डूबी मैं तुम्हें फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
महादेवी वर्मा जी के द्वारा लिखा गया प्रेमचंद्र जी के लिए संस्मरण सुनते हैं नयनी दीक्षित जी की आवाज में
महाशय मेहता उन अभागों में से हैं जिनको अपनी मेहनत के हिसाब से प्रशंसा या पुरस्कार नहीं मिलता| किंतु अब उन्होंने सोच लिया है कि वह राजा साहब के आगे स्तुति गान करेंगे| इसके चलते वह शीघ्र दीवान बन गए |किंतु मेहता जी की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुई ,आगे अब क्या क्या हुआ? पूरी बात जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी रियासत का दीवान ,सुमन वैद्य की आवाज में
गुलियाना का एक ख़त ….जिसके नाम का अर्थ है फूलों सी औरत ……पर वह लोहे के पैरों से लगातार दो साल चल कर युगोस्लाविया से चल कर अमृता तक आ पहुंची | गुलियाना की कहानी इस दुनिया के किसी भी देश की नारी की कहानी है। ये कहानी अमृता प्रीतम ने दशकों पहले लिखी थी लेकिन आज भी ख़त के वो सवाल वहीं खड़े हैं
मेला – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में प्रयागराज में लगे कुंभ मेले का दृश्य है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग अपने पाप को धोने के लिए संगम में डुबकी लगाने आते हैं। क्या मात्र डुबकी लगाकर पाप से मुक्त हुआ जा सकता है ?क्या वास्तव में अध्यात्म को भी एक पेशे की दृष्टि से अपनाया जाता है? आस्था ,परंपरा इन सब बातों का अद्भुत संगम है इस कहानी में। इसी बात को रोचक ढंग से आधार बनाकर ममता कालिया ने कहानी मेला का ताना-बाना बुना है,जिसे शेफ़ाली कपूर ने उतने ही अनोखे अंदाज़ से अपनी आवाज़ से निखारा है।
अनोखी यात्रा – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
कहानी अनोखी यात्रा में, प्यार की एक अनोखी यात्रा पर निकले जो दो लोग उस प्यार में, जिस तरह के बेलौस और बेसाख़्ता मोहब्बत है वह देखने को मिलेगी। प्यार को किसी भाषा, शब्द ,वाक्य किसी की जरूरत नहीं होती क्योंकि प्यार अपने आप में भाषा होता है। चाहे वह दो प्यार करने वाले उसे अनजान ही क्यों ना हो, बेपनाह मोहब्बत की ऐसी दास्तां सुनिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में
Reviews for: Sundardhunga