अमृता अपने सपने लिखतीं थीं अपनी डायरी में।
उनींदे सपने, गहरी नींद के सपने, जागती आंखों के सपने…
ये कुछ सपने जो उन्होंने 2001 से ले कर 2003 के बीच देखे और लिखे। कुछ सपनों पर कविता या नज़्म लिखी, कुछ को बस उड़ने के लिए छोड़ दिया।
उनकी आत्मा की चेतना तक पहुंचाते हैं ये सपने
सुनते हैं, मैं तुम्हें फिर मिलूँगी काव्य संग्रह में दर्ज़ अमृता के कुछ सपने, गाथा ऐप्प पे, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
अमृता बहुर्मुखी प्रतिभा की धनी रहीं। उनके अंदर जितना अनुराग रहा,उतना ही दर्द छुपा रहा। बंटवारे का दर्द उन्हें बहुत तकलीफ देता था। जीवन के अंतिम पड़ाव पर थीं अमृता जब पाकिस्तान से तौसीफ़ उनसे मिलने आईं। मिलने की खुशी से अधिक, उनके उस वक़्त लिखे गद्य काव्य में बचपन की यादों का दर्द, अपने साथियों से, बंटवारे के कारण या मृत्यु के कारण बिछड़ने का दर्द, समाज के बदलते स्वरूप का दर्द बड़ी सरलता से व्यक्त हुआ और दिल की गहराइयों तक उतर गया।
सुनते हैं दर्द शीर्षक के अंतर्गत, अमृता के इस दर्द को उकेरती मैं तुम्हें फिर मिलूँगी काव्य संग्रह की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पे,पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
मैं तुम्हे फिर मिलूँगी काव्य संग्रह की कुछ कविताओं को शीर्षक दिया है मुलाक़ात।
अमृता बीमार थीं, बहुत बीमार। अपने नग्मों, अपनी कविताओं के माध्यम से वो कभी अपनी माँ को याद करतीं, कभी सभी बंधनों के परे जा, कृष्ण से, गणेश से, साईं से मिलतीं, कभी बस अपने प्रेमी से मुलाक़ात के लिए किसी भी सीमा को पार करने की बात करतीं।
सुनते हैं शीर्षक मुलाक़ात के अंतर्गत समाहित मैं तुम्हे फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पे, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी इस कविता से शुरुवात होती है इस शीर्षक प्रेम की कविताओं की।
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी आखिरी कविता थी जो अमृता ने लिखी थी। प्रेम से लबरेज़ ये कविता, आंखे नम कर देती है। बेइन्तहां प्रेम में डूबी अमृता, बेहद बीमार अमृता पूरे प्रेम और समर्पण से अपने आप को तैयार कर लेती हैं अपनी आने वाली अन्त यात्रा के लिए।
प्रेम शीर्षक के अंतर्गत जी कविताएँ हैं, उनमें न सिर्फ उनका अपने साथी के लिए प्रेम उमड़ता है, बल्कि, उंस ईश्वर के लिए भी प्रदर्शित होता है जिसके आगे उन्होंने समर्पण कर दिया है।
सुनते हैं शीर्षक प्रेम के अंतर्गत, आत्मा की परमात्मा के लिए प्रेम में डूबी मैं तुम्हें फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
गुलियाना का एक ख़त ….जिसके नाम का अर्थ है फूलों सी औरत ……पर वह लोहे के पैरों से लगातार दो साल चल कर युगोस्लाविया से चल कर अमृता तक आ पहुंची | गुलियाना की कहानी इस दुनिया के किसी भी देश की नारी की कहानी है। ये कहानी अमृता प्रीतम ने दशकों पहले लिखी थी लेकिन आज भी ख़त के वो सवाल वहीं खड़े हैं
2 साल पहले की बात है आज करमांवाली, डोली वाली लड़की ,एक औरत बन चुकी है| शादी के बाद करमांवाली के जीवन में जो कुछ भी घटित हुआ वह उसके चेहरे पर साफ -साफ झलक रहा है |आज जब लेखिका की पुनः करमांवाली से मुलाकात होती है तो लेखिका ने करमांवाली के संघर्ष को कहानी का रूप दिया है| करमांवाली के जीवन को अमृता प्रीतम ने किस तरीके से कहानी का रूप दिया है? जानने के लिए सुनते हैं अनुर्वी मेहरा की अवाज़ में कहानी करमांवाली…
2 साल पहले की बात है आज करमांवाली, डोली वाली लड़की ,एक औरत बन चुकी है| शादी के बाद करमांवाली के जीवन में जो कुछ भी घटित हुआ वह उसके चेहरे पर साफ -साफ झलक रहा है |आज जब लेखिका की पुनः करमांवाली से मुलाकात होती है तो लेखिका ने करमांवाली के संघर्ष को कहानी का रूप दिया है| करमांवाली के जीवन को अमृता प्रीतम ने किस तरीके से कहानी का रूप दिया है? जानने के लिए सुनते हैं अनुर्वी मेहरा की अवाज़ में कहानी करमांवाली…2 साल पहले की बात है आज करमांवाली, डोली वाली लड़की ,एक औरत बन चुकी है| शादी के बाद करमांवाली के जीवन में जो कुछ भी घटित हुआ वह उसके चेहरे पर साफ -साफ झलक रहा है |आज जब लेखिका की पुनः करमांवाली से मुलाकात होती है तो लेखिका ने करमांवाली के संघर्ष को कहानी का रूप दिया है| करमांवाली के जीवन को अमृता प्रीतम ने किस तरीके से कहानी का रूप दिया है? जानने के लिए सुनते हैं अनुर्वी मेहरा की अवाज़ में कहानी करमांवाली…
आखिर वृद्धावस्था में क्यों लोग अपने आप को अकेला महसूस करते हैं ?जानते हैं नज़्म सुभाष के द्वारा लिखी गई कहानी” कबाड़ “,पल्लवी की आवाज में
समापन – भाग -5
Dr. Dharmveer भर्ती जी द्वारा रचित कृति कनुप्रिया का ये समापन है
कनु की प्रिया जिसके हृदय में प्रतिक्षण कनु ही व्याप्त रहता है, ऐसी कनुप्रिया सम्पूर्ण रचना में छाई हुई है. राधा को कभी कनु अपना अन्तरंग सखा लगता है तो कभी रक्षक, कभी लीला बन्धु कभी आराध्य और कभी लक्ष्य.
कनुप्रिया के समापन में राधा कृष्ण की पुकार की प्रतीक्षा में जन्मांतरों की अनंत पगडंडी के कठिनतम मोड़ पर अडिग खड़ी है!
जन्मांतरों से, जन्मांतरों तक…
चलिए गाथा पर सुनते हैं कनुप्रिया का समापन, पल्लवी की आवाज़ में
जीभी – संजय शेफर्ड – पल्लवी
शांत वातावरण, पहाड़ी पक्षियों के मधुर गीत , ऊंचे -ऊंचे देवदार के वृक्ष और एक छोटी सी जगह, अगर आप ऐसे किसी प्राकृतिक दृश्य की तलाश में हों, जो किसी भी पर्यटक को अपना कायल बना दे, तो आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं घुमंतू की नयी Travel story में जानिए ऐसी ही एक जगह, कुल्लू के पास छोटा सा गांव जीभी के बारे मे Sanjay Shepherd की travel story से Pallavi की आवाज़ में सिर्फ़ गाथा पर…
बड़े बुजुर्ग घर की शान होते हैं उनकी बातों में एक तजुर्बा होता है उनके सानिध्य में सब कुछ कितना सरल हो जाता है बच्चों के लिए उनकी दादी तो पूरा स्नेह का खजाना होती है इसी रिश्ते के मधुर संबंधों काअवलोकन कराती हुई कविता है दादी पल्लवी की आवाज में
भावना तिवारी की आवाज़ में भाई बहन के भावों को प्रदर्शित करती रक्षा बंधन पर एक भाव पूर्ण कविता, जो आपकी आँख नाम कर देगी
जज़्बा |Passion| جازبہ | Hindi Kavita | हिंदी कविता | Motivational Poems by Anupam Dhyani
Passion is an ingredient , if missing, can dilute the hard work, talent, luck and focus put in winning.
Make passion the most important thing in your toolbox.
आज इस वैश्विक महामारी में चिकित्सा जगत से जुड़े सभी लोगों की जो भूमिका रही है उसके लिए गाथा उन सभी का हार्दिक अभिनंदन करता है ।धर्म, जाति और अपना निजी स्वार्थ को त्याग कर मानवता की सेवा करना ही जिनका एक मात्र उद्देश्य है।कमल मुस्सद्दी की यह कविता उन सभी को समर्पित है ।
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