वृद्धावस्था में सुख-दु:ख की भावना परिवर्तित हो जाती है। तरुणावस्था में आडम्बर अथवा प्रदर्शन की जो चाह रहती है वह वृद्धावस्था में नहीं रह जाती| इसी प्रकार न क्षणिक सुखों से वृद्धों को उल्लास होता है और न क्षणिक दु:खों से विषाद। न तो कोई सफलता उन्हें उत्तेजित करती है और न कोई असफलता हताश। संसार की कठोरता और कर्तव्य की गुरुता से परिचित हो जाने से उनमें विश्वास के स्थान में अविश्वास आ जाता है। वे संयत हो कर भी संशयालु हो जाते हैं। इसी से वे तरुणावस्था के मोह में पड़ना नहीं चाहते।
आज भी समाज में लड़के और लड़की की परवरिश में अंतर रखा जाता है| ऐसा ही एक परिवार है , भागवत परिवार |परिवार में उनकी बेटी मीनाक्षी और बेटा मंदार की परवरिश में अंतर रखा जाता है |बेटी मीनाक्षी इस बात से आहत होकर अपने परिवार को सबक देने के लिए क्या कदम उठाती है??, जानने के लिए सुनते हैं कहानी अमित तिवारी जी की आवाज में अशोक कुमार द्वारा लिखी गई कहानी who cares
अंतिम समय में विद्या के पिता ने श्याम बाबू को बुला कर विद्या की ज़िम्मेदारी उन्हें सौप दी। तब से लेकर आज तक श्याम बाबू ने विद्या को अपने बेटी से ज़्यादा प्यार दिया है। और विद्या ने भी श्याम बाबू को अपने पिता ज़्यादा समझा है। “कहाँ बाबू जी. जो आपने और माँ ने मेरे लिए किया है उसके आगे तो ये कुछ भी नहीं है। आप दोनों ने एक अनाथ लड़की को अपने बेटे जैसे प्यार दिया है। उसका एहसान तो मैं सारी ज़िंदगी नहीं चुका सकती”। विद्या श्याम बाबू जी की सगी बेटी ना होते हुए भी उनके ना रहने के बाद भी उनके परिवार को एक मां की तरह संभालती है कहानी नहीं पड़ता है इंसानियत के रिश्ते खून के रिश्तो से ज्यादा अपने हो जाते हैं
कहानी में शिवा अपने मौसा जी के लिए आगरा से एक संगमरमर ऐशट्रे लेता है |आज शिवा को गुजरे पूरे 10 वर्ष बीत चुके हैं, किंतु आज उसकी दी हुई निशानी उसकी याद दिला रही है |क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कृष्ण बिहारी के द्वारा लिखी गई कहानी ऐशट्रे में ताजमहल ,अमित तिवारी की आवाज में
कहानी में मनसुख कवि बनना चाहता है किंतु कविता लिखने का उसे कोई अभ्यास नहीं है वह अपने गुरु से कविता लिखने के गुण सीखता है उसे भाव विहीन शब्दों से उसके द्वारा लिखी गई कविता को पुरस्कार भी प्राप्त हो जाता है इसी बात पर व्यंग करते हुए पल्लवी त्रिवेदी जी की एक कहानी मनसुख कवि कैसे बने अमित तिवारी जी की आवाज में
नेहा ओम बाबू और निरूपा की बेटी है ओम बाबू हद से ज्यादा अपनी बेटी नेहा से प्रेम करते हैं रघु नेहा को स्कूल के दिनों से प्रेम करता है नेहा की खातिर कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहता है इधर नेहा की दोस्ती अर्जुन और फिर रघुवीर से हो जाती है परंतु अचानक से एक दिन कोई दोनों के सिर पर वार कर उन्हें घायल कर देता है नेहा को इस बात की शंका है कि यह काम रघु के द्वारा किया गया है क्या नेहा की शंका सत्य है या इसके पीछे कोई और कारण है प्रेम और सस्पेंस से भरी इस मनोरंज क जुनैद के द्वारा लिखी गई कहानी फितूर को सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज म
निशिकांत पंडित नंद राम बाबू जी के यहां किराएदार के तौर पर रह रहे हैं |पंडित जी की बड़ी-बड़ी आंखें हमेशा निराशा ,अभिमान और क्रोध से तमतमायी सी रहती है अपनी मान्यताओं किसी भी कीमत पर समझौता नहीं कर सकते और पंडित जी स्वभाव कुछ बेबाक किस्म का है इस वजह से सभी लोग उनसे कन्नी काटते हैं |निशिकांत भी पंडित जी के स्वभाव को से हमेशा खिन्न सा रहता है किंतु निशिकांत के जीवन में ऐसी घटना घटी है तब उन्हें सिवाय पंडित जी के अलावा कोई साथ देने वाला नहीं नजर आया |ऐसा क्या हुआ था निशिकांत के जीवन में ?पंडित जी ने किस प्रकार निशिकांत की उस समय मदद करी ? विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई रोचक कहानी पंडित जी ,जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
दो भाईयों की ऐसी कहानी जो अपनी पत्नियों के रोज़ रोज़ के झगड़े से आहत हैं। एक दिन खाना मांगने पर न मिलने से क्रुद्ध हो एक भाई अपनी पत्नी के सर पर प्रहार करता है जिससे कि उसकी मृत्यु हो जाती है लेकिन दूसरा भाई सबके सामने बताता है कि खून भाई ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी ने किया है क्योंकि उसका मानना है कि पत्नी तो उसे और मिल जाएगी लेकिन भाई तो दूसरा नहीं मिल सकता।
ये केस सिर्फ जीत -हार का नही बल्कि उस सिस्टम को संतुलित और पवित्र करने का एक माध्यम एक आधार बनेगा जो बिक ही नही गया बल्कि सत्ता और पावर की दलाली का मुख्य केंद्र मुख्य शक्ति बन गया है” … कहानी में एक 30 साल की युवती शादीशुदा गरीब युवती सायरा बी जिसके साथ कुछ दरिंदों ने बलात्कार किया है | पैसे के अभाव के कारण कोई भी वकील उसका साथ नहीं दे रहा था | ऐसे में एक व्यक्ति न्याय दिलाने के लिए सामने आता है |कौन है वह व्यक्ति?? और क्या कारण था उसके पीछे?? और वह क्या न्याय दिला पाएगा?? जाने के लिए सुनते हैं कहानी ONE MEN JUSTICE
सब औरतें एक जैसी होती हैं, कि आखिरकार उनमें कोई फर्क नहीं होता। इस बात को मत सुनना क्योंकि यह झूठ है। हरेक औरत का अपना स्वाद और अपनी खुशबू होती है।‘ ‘पर यह सच नहीं है यार।‘ कमल कह रहा था, ‘इस मारुति की पिछली सीट पर कई औरतें लेटी हैं, लेकिन जब वे रुपयों को पर्स में ठंूसती हुई, हंसकर निकलती हैं, तो एक ही जैसी गंध छोड़ जाती हैं। बीवी की गंध हो सकता है, कुछ अलग होती हो। क्या खयाल है तुम्हारा?‘ मुंबई में कमल और उसका एक दोस्त पूरी रात मस्ती में गुजारना चाहते हैं | इसी घटनाक्रम में उनकी मुलाकात ऐसी लड़कियों और औरतों से होती है जो देह व्यापार जैसे घिनौने व्यवसाय से जुड़ी होती हैं | आखिर उसके पीछे उनकी क्या वजह थी पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कहानी उस रात की गंध
Reviews for: Vriddhavastha (वृद्धावस्था )
Average Rating
project@project