महाभारत की कहानियों में से एक कहानी’ युधिष्ठिर द्वारा दुर्योधन की रक्षा ‘ ,उस समय का प्रसंग है जब पांडवों के वनवास को 11 वर्ष हो चुके थे| दुर्योधन पांडवों को जान से मारने की मंशा से उस जगह जा पहुंचता है जहां पांडवों का वास है ,किंतु ऐसी कुछ घटित होता है कि दुर्योधन को ही युधिष्ठिर की शरण में आना पड़ता है और युधिष्ठिर दुर्योधन के प्राणों की का संरक्षण करते हैं| ऐसा क्या घटित हुआ था कि दुर्योधन को युधिष्ठिर की शरण लेनी पड़ी? शिवानी आनंद की आवाज में सुनते हैं कहानी का पूरा प्रसंग…
एक औरत यह सोचने पर क्यों विवश हो जाती है कि आखिर उसका एक औरत होने के नाते उसका वजूद क्या है ?आज चेतना भी यही सोचने को विवश है जब तक मां-बाप के साथ थी, तब तक उन पर निर्भर थी और आज अपने पति पर निर्भर है। आखिर चेतना ऐसा सोचने के लिए क्यों मज़बूर है ? चेतना के साथ क्या घटित हुआ ?जानिए अलका सैनी के द्वारा लिखी गई कहानी वज़ूद में शिवानी आनंद की आवाज़ में..
विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें बंधकर हर लड़की को अपने प्रियजनों से विदा लेनी पड़ती है। हेम भी इसी बंधन में बंध कर अपने पिता से दूर अपने ससुराल चली आई थी किंतु तब ये किसने जाना था कि यह विदा एक दिन अनंत कालीन विदा बन जाएगी।
रेवती एक आधुनिक युग की लड़की है जिसे रूढ़िवादी विचार न तो पसंद हैं और न ही वह उन्हें अपना सकती है। वह हर कदम पर समाज से लड़ते हुए अंत में अपने बॉस प्रशांत से विवाह का निर्णय लेती है जोकि उसकी बिरादरी का नही है।
बेताल, विक्रमादित्य से पूछता है कि यदि मां और पुत्री में अगर एक ऐसा रिश्ता बन जाए कि पुत्री अपनी मां की ही सास बन जाए और मां ,अपनी पुत्री की बहू.. तो बताओ राजन् कि माँ-बेटी के जो बच्चे हुए, उनका आपस में क्या रिश्ता हुआ ?क्या विक्रमादित्य बेताल के इस प्रश्न का उत्तर दे पाते हैं ,इसे जानने के लिए सुनते हैं बेताल पच्चीसी की कहानियों में से एक कहानी मां -बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ?, शिवानी आनंद की आवाज में..
Reviews for: Shiv or Narayan ke Bhakton ka Jhagda (शिव और नारायण के भक्तों का झगड़ा)