बाँकुड़ा में रहने वाली एक लड़की अन्नपूर्णा शादी के बाद मुंबई जा बसी है |आज 1 साल के बाद हो अपने मां -बापू को खत लिख रही है| बचपन में बरसात के आने पोखर पर जाकर के केंचुओं को मार देती थी जो उसके लिए आनंद का कार्य था किंतु आज वही अन्नपूर्णा को बरसात अच्छी नहीं लगती और केंचुओं से उसे डर लगता है क्यों ? ऐसा क्या हो गया अन्नपूर्णा के साथ जो उसके लिए जो आनंद था आज मैं उसका भय का कारण हो गया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सुधा अरोड़ा के द्वारा लिखी गई कहानी अन्नपूर्णा मंडल की आखिरी चिट्ठी, शिवानी आनंद की आवाज में…
ये एक ऐसे युगल की कहानी है जो कार से ड्राइव करते हुए दूर किसी पार्टी में जा रहे हैं और उनमें निरंतर एक अन्य युगल, जिसका नाम मिस्टर एंड मिसेज मेहता है की आमदनी और जीवनशैली को लेकर बातचीत और नोकझोक चल रही है। अंततः एक फोन से उन्हें अवगत कराया जाता है कि मिस्टर मेहता का सारा दिखावा झूठ था और अब वह दिवालिया हो गए हैं।
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
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ani