एक बार महाराजा विक्रमादित्य वेश बदलकर अपने राज्य में भ्रमण कर रहे थे ,तभी अचानक से उन्हें एक झोपड़े से कुछ आवाजें सुनाई दी |जिससे उन्हें पता चला कि झोपड़ी में रहने वाला रहने वाले दंपत्ति निसंतान है| उन्हें संतान तभी प्राप्त हो सकती है जब स्वयं महाराजा विक्रमादित्य शिव भगवान की स्तुति में अपने अंग हवन कुंड में काट कर डाल दें| महाराजा विक्रमादित्य ने क्या वास्तव में उस दिन निसंतान दंपत्ति के लिए ऐसा किया? क्या हुआ उसके बाद ?इस पूरी घटना को जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सत्रहवीं पुतली विद्यावती विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना,शिवानी आनंद की आवाज में
उर्वशी एक आधुनिक लड़की है जो होशियार होने के साथ ही जीवन में कुछ कर दिखाने की चाहत रखती है। प्रेम विवाह कर पति से उपेक्षित होने के बाद भी उसने हिम्मत न हारते हुए अपनी जिंदगी में कुछ कर दिखाने की चाहत को पूरा करने का प्रयास किया जिसमें उसकी खूबसूरती ही उसके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई। उसकी जिंदगी एक कटी पतंग की तरह झूलने लगी।
कहानी एक ऐसे ऊंट की है जिसकेअविवेक से उसे शेर का शिकार बनना पड़ा |कैसे ?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी अविवेक का मूल्य शिवानी आनंद की आवाज में
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