कादम्बिनी में प्राण तब वापस आए जब उसे जलाने के लिए शमशान में रखकर, लोग लकड़ी लेने चले गए। अपने आस पास किसी को ना पाकर कादंबनी को लगा कि वह मर चुकी है और जीवन तथा मृत्यु के बीच लटक रही है, उसकी इसी जीवन और मृत्यु के बीच की यात्रा की कहानी।
विजयनगर में होली और दिवाली का त्यौहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता था | होली के त्यौहार पर महामूर्ख की उपाधि पाने वाले को पुरस्कार के तौर पर 10000 स्वर्ण मुद्राएं दी जाती थी |तेनाली रामा ने अपनी बुद्धिमत्ता से किस प्रकार यह पुरस्कार जीता ?इस पूरे रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी महामूर्ख की उपाधि, शिवानी आनंद की आवाज में….
पाँचवीं पुतली – लीलावती ने भी राजा भोज को विक्रमादित्य के बारे में जो कुछ सुनाया उससे उनकी दानवीरता ही झलकती है | कैसे ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पाँचवीं पुतली – लीलावती
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर, बिना विषय की गंभीरता समझे अपनी किट्टी पार्टी की सहेलियों के साथ श्रीमती खन्ना की पर्यावरण बचाने की मुहीम पर हास्य व्यंग।
विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें बंधकर हर लड़की को अपने प्रियजनों से विदा लेनी पड़ती है। हेम भी इसी बंधन में बंध कर अपने पिता से दूर अपने ससुराल चली आई थी किंतु तब ये किसने जाना था कि यह विदा एक दिन अनंत कालीन विदा बन जाएगी।
बेताल पच्चीसी की कहानियों में से एक कहानी जिसमें अंग देश का राजा यशकेतु बेहद बिलासी प्रवृत्ति का राजा है और उसके राज्य का सारा कार्य उसका दीवान करता है |कहानी के अंत में जब राजा एक खूबसूरत स्त्री को अपने से विवाह हेतु राज्य में लाता है तो दीवान की हृदयाघात से मृत्यु हो जाती है| ऐसा क्यूँ ? इसका कारण जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी दीवान की मृत्यु क्यूँ….
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