यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तबतक जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तबतक जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी- लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तब -तक, जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
यतीन की मुलाकात चुनिया से उसकी चचेरी बहन पटल के घर पर होती है। अपने मजाकिया स्वभाव के चलते पटल दोनों को खूब छेड़ती है जिससे तंग आकर यतीन तो अपने घर चला आता है पर चुनिया उसका जाना सहन नहीं कर पाती और घर छोड़ कर चली जाती है। काफी समय बाद वह यतीन को फिर मिलती है हमेशा के लिए चले जाने के लिए।
पोस्टमास्टर साहब के तबादले के लिए संघर्ष और उनके चले जाने की बात सुनकर अधीर हो उठी उनकी सेविका रतन की कहानी।
The story shows how the groom side of the family used to take upperhand in every area during a marriage settlement. Sometimes it goes to such extent as exploitation and mental torture.
रायचरण जो कि अनुकूल बाबू के यहां नौकर है बड़े ही चाव और अपनेपन से उनके छोटे बच्चे को संभालता है। एक दिन बच्चा ज़िद करके उसे फूल तोड़ने को भेज स्वयं नदी में चला जाता है और फिर कभी वापस नहीं आता। रायचरण जिसे नौकरी से निकाल दिया गया है अपने बच्चे को अपने मालिक के बच्चे की तरह पाल कर उन्हें उसे भेंट कर देता है।
महामाया और राजीव लोचन बचपन के साथी हैं। राजीव महामाया से प्रेम करता है किंतु एक दिन महामाया और राजीव को साथ देख महामाया का भाई उसका विवाह एक मरनासन्न बूढ़े से करवा देता है, जिसके अगले ही दिन महामाया विधवा हो जाती है तथा किसी तरह सती प्रथा के नाम पर जलती हुई चिता से बचकर भागने में सफल हो जाती है। वह राजीव के साथ इस शर्त पर रहना मंजूर करती है कि वह जीवन भर उसका अवगुंठन नहीं हटाएगा। एक रात राजीव खुद को रोक नहीं पाता और महामाया को हमेशा के लिए खो देता है।
ईरान का एक व्यापारी चांद खान जब भारत आया तो उसे गन्ने बहुत पसंद आए और वह गन्ने को रसगुल्ले की जड़ के नाम से जानने लगा| जब दोबारा चांद खां के सामने रसगुल्ले पेश किए गए किए गए तो उसने रसगुल्ले की जड़ के बारे में प्रश्न किया? अब तेनालीरामा ने किस प्रकार चांद खान कि इस गलतफहमी को दूर किया |पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी “ रसगुल्ले की जड़ “शिवानी आनंद की आवाज में…
रेवती एक आधुनिक युग की लड़की है जिसे रूढ़िवादी विचार न तो पसंद हैं और न ही वह उन्हें अपना सकती है। वह हर कदम पर समाज से लड़ते हुए अंत में अपने बॉस प्रशांत से विवाह का निर्णय लेती है जोकि उसकी बिरादरी का नही है।
विजयनगर में होली और दिवाली का त्यौहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता था | होली के त्यौहार पर महामूर्ख की उपाधि पाने वाले को पुरस्कार के तौर पर 10000 स्वर्ण मुद्राएं दी जाती थी |तेनाली रामा ने अपनी बुद्धिमत्ता से किस प्रकार यह पुरस्कार जीता ?इस पूरे रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी महामूर्ख की उपाधि, शिवानी आनंद की आवाज में….
इंसान की उस संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती यह कहानी जब कभी अपने खून के रिश्ते वास्तव में कोई जिसने गलत काम किया हो और एक ऐसा रिश्ता जो आपके लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देंलेकिन आपका खून का रिश्ता ना हो के बीच में कोई चुनाव करना होता है तो इंसान सहज भाव से अपने खून के रिश्ते का चुनाव कर लेता है और एक पल में ही दूसरे रिश्ते को ठुकरा देता है भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी साग मीट सुमन वैद्य जी की आवाज में
यह उन महिलाओं को समर्पित कविता है ,जो अपना संपूर्ण जीवन अपने परिवार , अपने बच्चों के लिए अर्पित कर देती है, किंतु उन्हें कभी भी इसका प्रतिफल नहीं प्राप्त होता | भावना तिवारी जी की भावपूर्ण आवाज में कविता “ जो बाग लगाया था “……
अवंतिका की शादी प्रभाकर से हो चुकी है और उसकी एक बच्ची भी है लेकिन नरेन जिसे वो जी जान से चाहती थी, उसे वर्षों बाद अपने सामने देख और कही चलकर बात करने के आग्रह को वो टाल न सकी। लेकिन चाहकर भी वो नरेन को उसके धोखे के लिए क्षमा नहीं कर सकी।
मगध के सम्राट श्रेणिक दरबार में राजकुमार अभय कुमार से प्रश्न करते हैं, कि राजगृह में कितने धर्मात्मा और कितने पापी हैं ?अब राजकुमार अभय किस प्रकार सम्राट को इस प्रश्न का उत्तर दे पाते हैं |बेहद रोचक ढंग से प्रस्तुत की गई इंद्रजीत शास्त्री द्वारा लिखी गई कहानी दो पापी, सुनते हैं सुमन वैद्य की आवाज में
बाधाएं और समस्याएं हर कदम पर हमारी प्रगति को रोकने की कोशिश करती है , किंतु हमें हार ना मानकर निरंतर प्रयास करते हुए अपना कर्म करना है | यह संदेश देते हुए यह कविता की पंक्तियां……
Reviews for: Patni ka patra (पत्नी का पत्र) – Part-1