यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तबतक जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी- लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तब -तक, जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तबतक जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
Khata” is a story of a girl who in those days got the opportunity of schooling while women’s education was not that very common. The little girl was enthusiastically writing everywhere that was not very much appreciated by his brother as she was messing up his writing notebook. Once she got married she was taunted and prevented from writing by her sister-in-law and her husband who had himself a strong passion for writing. At the end she was forced to stop writing. Her fate was bound to surrender herself to the hostile situation.
कादम्बिनी में प्राण तब वापस आए जब उसे जलाने के लिए शमशान में रखकर, लोग लकड़ी लेने चले गए। अपने आस पास किसी को ना पाकर कादंबनी को लगा कि वह मर चुकी है और जीवन तथा मृत्यु के बीच लटक रही है, उसकी इसी जीवन और मृत्यु के बीच की यात्रा की कहानी।
दो भाईयों की ऐसी कहानी जो अपनी पत्नियों के रोज़ रोज़ के झगड़े से आहत हैं। एक दिन खाना मांगने पर न मिलने से क्रुद्ध हो एक भाई अपनी पत्नी के सर पर प्रहार करता है जिससे कि उसकी मृत्यु हो जाती है लेकिन दूसरा भाई सबके सामने बताता है कि खून भाई ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी ने किया है क्योंकि उसका मानना है कि पत्नी तो उसे और मिल जाएगी लेकिन भाई तो दूसरा नहीं मिल सकता।
पोस्टमास्टर साहब के तबादले के लिए संघर्ष और उनके चले जाने की बात सुनकर अधीर हो उठी उनकी सेविका रतन की कहानी।
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
एक विज्ञान के विद्यार्थी को उसके अध्यापक के द्वारा एक मानव कंकाल, शरीर विज्ञान के अध्ययन हेतु दिया जाता है, किंतु एक रात उस मानव कंकाल की आत्मा उसे अपनी मौत के पीछे की कहानी सुनाती है| क्या है वह कहानी ? इस रोचक कहानी को सुनने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में, रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी “पिंजर”…
मृत्यु जीवन का एकमात्र सत्य है| प्रसव के बाद निशिकांत की पत्नी रजनी मृत्यु और जीवन के बीच में संघर्ष करती हुई अस्पताल में भर्ती है| रजनी के जीवन की डोर किस बात से बंधी है और निशिकांत के कौन से झूठ का सहारा लेकर रजनी के जीवन की डोर को पकड़ने की चेष्टा कर रहा है?| भावुक कर देने वाली विष्णु प्रभाकर की कहानी कितना झूठ में जानने के लिए सुनते हैं नयनी दिक्षित की आवाज में
संपूर्णता की अनुभूति करने के लिए पांच पुराने मित्र एक चिकित्सक, एक लेखक और तीन धनी कुंवारे जो रोजगार रहित है ,खाना खाने के बाद स्वप्न को लेकर चर्चा कर रहे हैं | उनमें से एक दोस्त का कहना है स्वप्न हमेशा सुहावने नहीं होते ,अगर स्वप्न देखना है तो जागते हुए देखना चाहिए किंतु जागते हुए सपनों को पूरा करने के लिए बहुत अधिक ताकत और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है |इस बात को लेकर चर्चा कहां तक बढ़ती है और आगे क्या होता है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं कहानी स्वप्न नयनी दीक्षित की आवाज में
कहानी मंदी में जान सकते हैं कि मंदी के दौर में किस प्रकार ग्राहकों को लुभाने की कोशिश की जा रही है |नायक किस प्रकार इन बातों को अनुभव कर रहा है |जानने के लिए सुनते हैं मोहन राकेश के द्वारा लिखी गई कहानी मंदी ,सुमन वैद्य की आवाज में
इंसान की उस संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती यह कहानी जब कभी अपने खून के रिश्ते वास्तव में कोई जिसने गलत काम किया हो और एक ऐसा रिश्ता जो आपके लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देंलेकिन आपका खून का रिश्ता ना हो के बीच में कोई चुनाव करना होता है तो इंसान सहज भाव से अपने खून के रिश्ते का चुनाव कर लेता है और एक पल में ही दूसरे रिश्ते को ठुकरा देता है भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी साग मीट सुमन वैद्य जी की आवाज में
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