यह कहानी बाल मन की व्यथा है |एक छोटी सी बच्ची घर से दूर अध्ययन हेतु छात्रावास के कड़े अनुशासन में रह रही है| अपने अतीत में बिताए घर के समय को स्मरण कर रही हैऔर अपने आने वाले अवकाश का बेसब्री से इंतजार करती है ,ताकि उसी बचपन में लौट सकें| अंजना वर्मा की भावुक कर देने वाली कहानी लेकिन कब ,सुनते हैं विनीता श्रीवास्तव की आवाज में..
वृद्ध पिता की कहानी,जो अपनी सारी जिम्मेदारियां पूरी कर चुका है और उसका शरीर शिथिल हो गया है |इस समय काल में जब उसे अपने बच्चों का सानिध्य प्राप्त होता है ,तो उसके अंदर एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है | किंतु यह सानिध्य उसे अल्प समय के लिए प्राप्त
जब तक बातें होती रहतीं, उन्हें लगता कि वे एक चलती-फिरती, जीती-जागती दुनिया से जुड़े हुए हैं, वरना इस शहर के अनजाने चेहरों के समुद्र में एक भी पहचाना चेहरा उन्हें नजर नहीं आता था। तब उनकी मनःस्थिति एक भटके हुए जहाज की हो जाती। कहाँ जाएँ… क्या करें… सब कुछ अपरिचित… अटूट एकाकीपन| विधुर रविंद्र बाबू अपने बेटे- बहू के पास आए हुए | बेटा और बहू दोनों नौकरी- पेशा है |घर में सारी सुविधाएं होने के बावजूद एकाकीपन परेशान कर रहा है एकाकीपन से बचने के लिए यहां -वहां लोगों से अपना परिचय बढ़ा रहे हैं किंतु क्या यह उनका प्रयास उनका एकाकीपन दूर कर पाता है? क्या होता है आगे रविंद्र बाबू जी की जिंदगी में ?जानने के लिए सुनते हैंअंजना वर्मा जी के द्वारा लिखी गई कहानी यहाँ-वहाँ हर कहीं,पूजा श्रीवास्तव जी की आवाज में…
“Mother’s Day”
माँ…
वो नाम, जिसे सुनते ही
मन अचानक बचपन की किसी सुरक्षित जगह पर लौट जाता है।
उसकी डाँट में चिंता होती है,
उसकी चुप्पी में दुआएँ,
और उसके हर त्याग में
हमारी पूरी दुनिया छिपी होती है।
माँ सिर्फ़ वह नहीं होती
जो जन्म देती है…
कभी-कभी रिश्तों में कुछ लोग
ममता का वही स्पर्श चुपचाप निभा जाते हैं।
इस भावनात्मक कहानी में
अमिता और उसके पति प्रवीण
अपने नवजात शिशु की देखभाल के लिए
बुआ सास को दिल्ली बुलाते हैं।
वह भी सब कुछ छोड़कर,
निस्वार्थ भाव से बच्चे को अपना स्नेह, समय और ममता देती हैं —
ठीक एक माँ की तरह।
लेकिन क्या रिश्तों में दिया गया प्रेम
हमेशा सम्मान भी पाता है?
जब विदा का समय आता है,
तो प्रवीण उनके वर्षों के अपनत्व और ममता को
कुछ पैसों में समेट देने की कोशिश करता है।
और यही पल दिल में एक गहरा सवाल छोड़ जाता है—
क्या हर वह स्त्री
जो माँ की तरह प्रेम और त्याग देती है,
उसे वही सम्मान नहीं मिलना चाहिए?
🎧 रिश्तों, संवेदनाओं और ममता की अनकही परतों को छूती
अंजना वर्मा की मार्मिक कहानी
“Mother’s Day”
आवाज़: विनीता श्रीवास्तव
केवल Gaatha पर।
22- 23 साल कीकी साल कीएकखूबसूरत युवती रेस्तरां में बैली डांसर है |उसकी विवशता ने उसे बेली डांसर बना दिया है किंतु अब यही डांस उसका जीवन है, उसकी रोजी -रोटी है|इसके चलते ही वह अपनी बीमार मां का इलाज करा रही है |बेहद मार्मिक ,संवेदना से भरपूर अंजना वर्मा जी के द्वारा लिखी गई कहानी बेली डांस ,सुनते हैं विनीता श्रीवास्तव की आवाज में…
एक आलीशान कॉलोनी के बीच में एक मैदान जहां पर गरीब बस्ती के लोग ,बच्चे खेलते- कूदते आते -जाते और सर्दियों में धूप सेंकते हैं किंतु आलीशान बंगलों में रहने वालों को यह बात नागुज़ार है तो क्या ये अमीर लोग अपनी झूठी शान के ख़ातिर उस मैदान के साथ ऐसा कुछ करेंगे कि जिससे कोई गरीब आदमी उस मैदान में आये ही ना । क्या होगा? जानने के लिये सुनतें हैं अंजना वर्मा की कहानी नंदन पार्क ,विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में..
सफ़ाई पसंद – विपिन जैन – विनीता श्रीवास्तव
इसमें कोई दो -राय नहीं कि साफ़-सफ़ाई एक बहुत अच्छी आदत है लेकिन ज्यादा साफ़- सफ़ाई की धुन कभी-कभी मुश्किल में भी डाल देती है। कहानी की नायिका विभा कुछ ज्यादा सफ़ाई पसंद है और ऐसे में उसके पति का क्या अनुभव रहता है ?जानिए विपिन जैन के द्वारा लिखी गई कहानी सफ़ाई पसंद ,विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में…
राक्षसी ढूंढी ने राजा पृथृ के राज्य में बहुत अत्याचार फैलाया। राजा पृथृ ने राक्षसी ढूंढी के अत्याचार से किस प्रकार अपने राज्य का संरक्षण किया? और इस बात का होली के त्योहार से क्या संबंध है? जानने के लिए सुनते हैं राक्षसी ढूंढी की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
बिंदा लेखिका की की बचपन की सहेली है| जो लेखिका के पड़ोस में ही रहती है| बिंदा की सौतेली मां उसे खूब सताती है और घर का सारा काम करवाती है |बिंदा का मातृप्रेम से वंचित रहना और अपनी सौतेली मां के क्रूर व्यवहार को सहन करने के कारण क्या बिंदा का बचपन खिलने से पहले ही मुरझा जाएगा ? महादेवी वर्मा जी की बेहद हृदयस्पर्शी कहानी बिंदा मे जानिए ,जिसे विनीता श्रीवास्तव ने अपनी आवाज दी है…
होली का त्योहार प्रहलाद और होलिका की कथा से किस प्रकार गहराइयों से जुड़ा है? इसे जानने के लिए पूरी कहानी सुने प्रहलाद और होली का की कथा, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
त्रास – रवींद्र कालिया – विनीता श्रीवास्तव
एक लड़का जो काफी समय से अपने मां-बाप ,परिवार से दूर अलग रह रहा है ।अब अलग और अकेले रहने पर उसकी ज़िन्दगी कुछ उदासीन हो गई है लेकिन जब उसके मां-बाप उससे मिलने आते हैं और उसके जीवन का विश्लेषण करते हैं तो बहुत सी बातें निकल कर आती है ।कहानी में मां अपने बेटे की इस स्थिति से अवगत हो रही है किंतु अपने को उसके सामने सामान्य दिखाने की कोशिश में लगी है ।कहानी में मां और बेटे के कई प्रसंग आपको इमोशनल कर देते हैं ।सुनिए रवींद्र कालिया की लिखी कहानी त्रास, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
यह कहानी हर उस पत्नी की है जो पढ़ी- लिखी और विवेकशील होने के कारण परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाती बल्कि उनसे लड़ती है तब -तक, जबतक कि वह लड़ सकती हैं…
मिस पदमा एक प्रभावशाली वकील है |उसकी अच्छी प्रैक्टिस भी चल रही है |यूं तो मिस पर पदमा के पास रिश्तो की कोई कमी नहीं है, किंतु मिस पदमा ऐसे व्यक्ति को अपना जीवनसाथी बनाना चाहती हैं जो पूरी तरीके से आत्मसमर्पण कर दें |ऐसे में प्रसाद से उसे प्रेम हो जाता है| क्या मिस पदमा को जीवन की वो खुशी प्रसाद के द्वारा प्राप्त होती है ?प्रसाद किस प्रकार का इंसान है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी की कहानी मिस पद्मा सुमन वैद्य जी की आवाज में
दूसरा देवदास – ममता कालिया – शैफाली कपूर
एक युवा संभव हरिद्वार हर की पौड़ी अपनी नानी के यहां आया हुआ है। गंगा आरती का विहंगम दृश्य के बाद जब एक मंदिर जाता है तो उस मंदिर में उसे एक गुलाबी साड़ी पहने एक खूबसूरत युवती उसी के बगल में पूजा करती हुई नज़र आती है। संभव के मन में उस युवती के प्रति एक आकर्षण महसूस होता है, किंतु बाद में भीड़ में वह कहीं नज़र नहीं आती है इस पर संभव दुबारा उस युवती से मिलने के लिए बेहद विचलित हो जाता है। क्या पुनः दोनों का आमना-सामना हो पाएगा? क्या संभव अपने दिल की बात उससे कह पाएगा? पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी दूसरा देवदास, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में…
कुवारेपन की वजह – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
कई बार कुछ ऐसी घटना एक पुरुष के जीवन में घट जाती हैं जिसके लिए एक महिला जिम्मेदार होती है। उन घटनाओं का यह भी असर होता है जो उसके कुंवारे पन की वजह बन सकता है। हर बार हर मामले में सिर्फ़ पुरुष को ही जिम्मेदार ठहराना यह जरूरी नहीं ।19वीं शताब्दी में फ्रेंच लेखक guy de maupssantने इसी बात को अपनी कहानी का आधार बनाया है ।क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में कहानी कुंवारेपन की वजह..।
The story shows how the groom side of the family used to take upperhand in every area during a marriage settlement. Sometimes it goes to such extent as exploitation and mental torture.
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Vineeta
Ankita Kalra
Sweta Khare
Naveen Srivastava
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sunitarushilanwesha@gmail.com
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subodh verma