महाभारत का घमासान युद्ध चल रहा था |युद्ध में दुर्योधन और युधिष्ठिर का आमना -सामना होने पर दोनों के द्वारा शस्त्रों की वर्षा होने लगी| ऐसा समय भी आया जब युधिष्ठिर के प्रहारों से दुर्योधन मूर्छित हो गया |ऐसे समय भीमसेन ने आकर युधिष्ठिर से दुर्योधन का प्राण दान मांगा| आखिर क्या वजह थी कि भीम ने दुर्योधन प्राण –दान, युधिष्ठिर से क्यों मांगा |इसके पीछे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी दुर्योधन का प्राण दान, शिवानी आनंद की आवाज में
पोस्टमास्टर साहब के तबादले के लिए संघर्ष और उनके चले जाने की बात सुनकर अधीर हो उठी उनकी सेविका रतन की कहानी।
राजा विक्रमादित्य अद्भुत गुणग्राही थे। वे सच्चे कलाकारों का बहुत अधिक सम्मान करते थे तथा स्पष्टवादिता पसंद करते थे। उनके दरबार में योग्यता का सम्मान किया जाता था। चापलूसी जैसे दुर्गुण की उनके यहाँ कोई कद्र नहीं थी। यही सुनकर एक दिन एक युवक उनसे मिलने उनके द्वार तक आ पहुँचा। शास्त्रों का ज्ञाता था। कई राज्यों में नौकरी कर चुका था। युवक स्पष्टवक्ता होने के कारण उसके आश्रयदाताओं को वह धृष्ट नज़र आया, अतः हर जगह उसे नौकरी से निकाल दिया गया।विक्रमादित्य ने उस युवक की गुणवत्ता को परखा और उसे उचित सम्मान दिया |कैसे?इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानीबाइसवीं पुतली अनुरोधवती राजा विक्रमादित्य और बुद्धि और संस्कार पर चर्चा ,शिवानी आनंद की आवाज में …
This story contains the description of a tarbooj (watermelon) and the whole world inside it.
पाषाणी मृगमयी नाम की एक लड़की की कहानी है, जिससे अपूर्व नाम के लड़के को प्रेम होता है तथा वह उससे विवाह भी करता है। किंतु मृगमयी की प्रकृति से बचपना है की जाने का नाम नहीं लेता। परिस्थितियां विपरीत तब होती हैं जब अपूर्व कई वर्षो के लिए कलकत्ता चला जाता है और लौट कर नहीं आता…
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर ने अर्जुन को कर्ण का वध न कर पाने के कारण धिक्करा और यहां तक कह दिया कि अगर कर्ण का वध नहीं कर पाते हो तो ,अपना गांडीव धनुष किसी दूसरे योद्धा को दे दो |इस बात को लेकर अर्जुन बहुत क्रोधित हुए और और युधिष्ठिर को मारने के लिए तत्पर हो गए |ऐसी विषम परिस्थिति में किस प्रकार अर्जुन शांत इस हो पाए |महाभारत के रोचक प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी युधिष्ठिर का अपमान ,शिवानी आनंद की आवाज में
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर धर्मराज के रूप में विश्व में जाने जाते रहे हैं |कहानी में इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है| जब यक्ष के प्रश्नों का उत्तर युधिष्ठिर के अन्य भाई नहीं दे पाते हैं ,तो उन सबको मृत्यु प्राप्त हो जाती है किंतु युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों के उत्तर देकर यक्ष को प्रसन्न कर देते हैं और अपना मनचाहा वरदान भी प्राप्त कर लेते हैं |कैसे? इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी यक्ष और युधिष्ठिर संवाद भाग -1 शिवानी आनंद की आवाज में …
अनुशासन पर्व में कुल मिलाकर 168 अध्याय हैं। अनुशासन पर्व के आरम्भ में 166 अध्याय दान-धर्म पर्व के हैं। इस पर्व में भी भीष्म के साथ युधिष्ठिर के संवाद का सातत्य बना हुआ है। भीष्म युधिष्ठिर को नाना प्रकार से तप, धर्म और दान की महिमा बतलाते हैं और अन्त में युधिष्ठिर पितामह की अनुमति पाकर हस्तिनापुर चले जाते हैं। भीष्मस्वर्गारोहण पर्व में केवल 2 अध्याय (167 और 168) हैं। इसमें भीष्म के पास युधिष्ठिर का जाना, युधिष्ठिर की भीष्म से बात, भीष्म का प्राणत्याग, युधिष्ठिर द्वारा उनका अन्तिम संस्कार किए जाने का वर्णन है। इस अवसर पर वहाँ उपस्थित लोगों के सामने गंगा जी प्रकट होती हैं और पुत्र के लिए शोक प्रकट करने पर श्री कृष्ण उन्हें समझाते हैं।महाभारत की कहानियों में से एक कहानीअनुशासन पर्व में ,जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
कहानी एक ऐसे ऊंट की है जिसकेअविवेक से उसे शेर का शिकार बनना पड़ा |कैसे ?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी अविवेक का मूल्य शिवानी आनंद की आवाज में
राजा कृष्णदेव राय के प्रिय सुनहरे पौधे को बकरी के खा जाने पर माली को दिए जाने वाले दंड को किस प्रकार तेनाली रामा राजा को अनुचित निर्णय लेने से रोकते हैं ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी सुनहरा पौधा शिवानी आनंद की आवाज में
Reviews for: Duryodhan ko praan dan (दुर्योधन को प्राण दान)