अज्ञातवास का अर्थ है बिना किसी के संज्ञान में आये किसी अपरिचित स्थान व अज्ञात स्थान में रहना। वनवास के बारहवें वर्ष के पूर्ण होने पर पाण्डवों ने अब अपने अज्ञातवास के लिये मत्स्य देश के राजा विराट के यहाँ रहने की योजना बनाई| अज्ञातवास के समय पाण्डवों ने अपनी पहचान छुपाने के लिए अलग-अलग उन्होंने अपना वेश बदला |पांचो पांडु पुत्र पुत्र युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल ,सहदेव ने किन-किन का वेश धारण किया और उन्होंने क्या भूमिका निभाई ?इसे जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में महाभारत की कहानियों में से एक कहानी पांडवों का अज्ञातवास…
हरसुंदरी ने मां न बन पाने के कारण अपने पति निवारण का विवाह शेलबाला नाम की किशोरी से तो कर दिया पर उसे क्या पता था कि इसके बाद उसका जीवन इतनी मुश्किलों से भर जाएगा।
उर्वशी एक आधुनिक लड़की है जो होशियार होने के साथ ही जीवन में कुछ कर दिखाने की चाहत रखती है। प्रेम विवाह कर पति से उपेक्षित होने के बाद भी उसने हिम्मत न हारते हुए अपनी जिंदगी में कुछ कर दिखाने की चाहत को पूरा करने का प्रयास किया जिसमें उसकी खूबसूरती ही उसके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई। उसकी जिंदगी एक कटी पतंग की तरह झूलने लगी।
आचार्य गुरु द्रोणाचार्य के सभी शिष्यों में अर्जुन उनके प्रिय शिष्य थे |एक बार आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें और अपने सभी शिष्यों को एक लक्ष्य भेद करने का आदेश दिया ,किंतु अर्जुन के द्वारा उस लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के गुण से आचार्य गुरु द्रोणाचार्य बहुत प्रभावित हुए| आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन को एक अमोघ शक्ति बाण प्रदान किया| अमोघ शक्ति बाण का क्या विशेषता है ?इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी अर्जुन की अमोघ शक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में..
भगवान श्री कृष्ण दुर्योधन के पास दूत बनकर, युधिष्ठिर को मात्र 5 गांव देने का प्रस्ताव लेकर गए|किंतु दुर्योधन, युधिष्ठिर को सुई के बराबर भूमि देने को भी तैयार नहीं हुआ और इस कारण महाभारत का युद्ध प्रारंभ हो गया |इस युद्ध के पीछे और क्या कारण थे ?महाभारत के युद्ध में क्या नियम बनाए गए और कौरवों और पांडवों की सेना में कौन कौन शामिल थे ?पूरी जानकारी के लिए सुनते हैं ,महाभारत की कहानियों में से एक कहानी महाभारत का युद्ध ,शिवानी आनंद की आवाज में…
दुनिया में आखिर सबसे बड़ी चीज क्या है? किस प्रकार बीरबल ने अपने उत्तर से बादशाह अकबर को संतुष्ट किया |पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अंजू जेटली की आवाज …
आपको चित्तौर का सिंहासन सुखद हो, देश की श्री-वृद्धि हो, हिन्दुओं का सूर्य मेवाड़-गगन में एक बार फिर उदित हो। भील, राजपूत, शत्रुओं ने मिलकर महाराणा का जयनाद किया, दुन्दुभि बज उठी। मंगल-गान के साथ सपत्नीक हम्मीर पैतृक सिंहासन पर आसीन हुए। अभिवादन ग्रहण कर लेने पर महाराणा ने महिषी से कहा-क्या अब भी तुम कहोगी कि तुम हमारे योग्य नहीं हो?इस पूरी कथा को जाने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी चित्तौड़ निधि मिश्रा की आवाज में
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