कहानी में चौबे जी ने पुत्री की चाहत में अपनी पत्नी मंगला की सौतेली मां की बेटी बिन्नी को अपने घर में संरक्षण दिया और उसे पुत्री के समान स्नेह भी किया। कहानी में स्तब्ध कर देने मोड तब आता है जब चौबे जी की पत्नी मंगला की मृत्यु हो जाती है चौबे जी अधेड़ उम्र के हो चुके हैं और बिन्नी एक युवती बन चुकी है। पूरे जीवन जिसे चौबे जी ने पुत्री समान स्नेह दिया आज उनका चित्त बिन्नी को लेकर भ्रमित है और वह पुत्री मान चुके बिन्नी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने जा रहे हैं।किंतु क्या यह मर्यादा के अनुकूल है? कहानी कई दिलचस्प मोड़ से गुज़रती हुई बेहद रोचक है ।मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी भूत आज ही सुनिए सिर्फ़ गाथा पर..
मिस पदमा एक प्रभावशाली वकील है |उसकी अच्छी प्रैक्टिस भी चल रही है |यूं तो मिस पर पदमा के पास रिश्तो की कोई कमी नहीं है, किंतु मिस पदमा ऐसे व्यक्ति को अपना जीवनसाथी बनाना चाहती हैं जो पूरी तरीके से आत्मसमर्पण कर दें |ऐसे में प्रसाद से उसे प्रेम हो जाता है| क्या मिस पदमा को जीवन की वो खुशी प्रसाद के द्वारा प्राप्त होती है ?प्रसाद किस प्रकार का इंसान है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी की कहानी मिस पद्मा सुमन वैद्य जी की आवाज में
बैरिस्टर दया शंकर मेहता वायसराय की कार्यकारिणी सभा के मेंबर नियुक्त हुए तो चारों तरफ उनके पक्ष और विपक्ष भी बन गए पत्नी राजेश्वरी , सुपुत्री मनोरमा, और स्वयं वे अंग्रेजों से बहुत प्रभावित थे। किंतु उनका सुपुत्र, बालकृष्ण उनका सबसे बड़ा विरोधी बन गया और आखिरकार उसने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली।
अलग-अलग जाति से संबंध रखने वाले एक ऐसे प्रेमी युगल की कहानी जो एक दूसरे से प्रेम करते हैं विवाह भी करना चाहते हैं किन्तु सामाजिक बाधाओं के डर से डर कर कायरों की भांति पीछे हट जाते हैं
सुभागी तुलसी महतो और लक्ष्मी की बेटी है जब वह मात्र 11 वर्ष की थी तब से वह विधवा है| सुभागी बेहद मेहनती और संस्कारी लड़की है |तुलसी महतो का पुत्र रामू आलसी और कामचोर है | रामू पिता से बटवारा करवा लेता है | सुभागी अपने मां-बाप की जिम्मेदारी लेती है |मां- बाप के मरने के बाद उसके जीवन में क्या बदलाव आता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी के द्वारा लिखी गई कहानी सुभागी भूपेश पांड्या की आवाज में
हकीम जिला का किसी प्रयोजन से लेखक को अपने घर आने का निमंत्रण दिया जाता है |अब पूरी जगह यह चर्चा होने लगती है कि लेखक और हकीम जिला की बहुत गहरी दोस्ती है| अब इस बात का प्रभाव लेखक के जीवन पर किस प्रकार पड़ता है ,जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी मुफ्त का यश ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
वैवाहिक जीवन के एकपहलू में जितने जितने सुख हैं अगर उसके दूसरे पहलू को देखा जाए तो वह उतना ही हृदय विदारक और भयानक है | कहानी में नायक के जीवन में अपने वैवाहिक जीवन की इस समस्या के समाधान के लिए नायक कौन-कौन से प्रयत्न करता है | जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी हीला भूपेश पांडे जी की आवाज में
सयानी बुआ का नाम वास्तव में ही सयानी था या उनके सयानेपन को देखकर लोग उन्हें सयानी कहने लगे थे, । बचपन में ही वे समय की जितनी पाबंद थीं, अपना सामान संभालकर रखने में जितनी पटु थीं, और व्यवस्था की जितना कायल थीं, उसे देखकर चकित हो जाना पडता था| कहानी में सयानी बुआ के चरित्र को और अच्छे से समझने के लिए मनु भंडारी जी के द्वारा लिखी गई कहानी सयानी बुआ सुनते हैं माधवी शंकर जी की आवाज में
कहानी में एक युवती अपनी दोनों बेटियों के साथ अकेली है |ठंड की एक रात अचानक उसके यहां 60…65 साल का आदमी चादर लपेटे एक वृद्ध व्यक्ति आ जाता है ,जो अपने को उनका रिश्तेदार बतलाता है| अब युवती बेहद असमंजस की स्थिति में है, अतिथि को अपने घर आने दे अथवा नहीं| अब आगे क्या होता है जानने के लिए सुनते हैं सिनीवाली द्वारा लिखी गई कहानी अतिथि, निधि मिश्रा की आवाज में….
द्रौपदी ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य की नायिका है |वह केवल दु:शासन ही नहीं वरन् अपने पति को भी प्रश्नों के कटघरे में खड़ा कर स्पष्टीकरण माँगती है। वह भरी सभा में यह सिद्ध कर देती है कि जुए में स्वयं को हारने वाले युधिष्ठिर को मुझे दाँव पर लगाने का कोई अधिकार नहीं है
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