हकीम जिला का किसी प्रयोजन से लेखक को अपने घर आने का निमंत्रण दिया जाता है |अब पूरी जगह यह चर्चा होने लगती है कि लेखक और हकीम जिला की बहुत गहरी दोस्ती है| अब इस बात का प्रभाव लेखक के जीवन पर किस प्रकार पड़ता है ,जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी मुफ्त का यश ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
माधव और उसके पिता घीसू दोनों के दोनों बेहद आलसी, निकम्मे और कामचोर प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। उन्हें फटे -चीथडे में रहना मंजूर है किंतु वे दोनों मेहनत कर पैसा कमाना नहीं चाहते। कहानी में बेहद संवेदनहीन दृश्य तब आता है जब घीसू और माधव लालच और भूख मिटाने के लिए माधव की बीवी बुधिया का इलाज तक नहीं करवाते और वह प्रसव पीड़ा से कराह कर मर जाती है। कहानी मे दोनों का अमानवीय रूप तब और झलकता है जब दोनों बुधिया के अंतिम संस्कार और कफ़न के लिए जो लोगों से पैसे प्राप्त करते हैं उनका भी उपभोग वह अपने खाने-पीने में उड़ा देते हैं ।एक इंसान के मन की दुर्बलता के चलते किस प्रकार मनुष्य अपनी मानवता को छोड़ देता है इस बेहद संवेदनशील भावों को झकझोर देने वाली प्रेमचंद की कहानी कफ़न, जरूर सुनिए सिर्फ़ गाथा पर
सुभागी तुलसी महतो और लक्ष्मी की बेटी है जब वह मात्र 11 वर्ष की थी तब से वह विधवा है| सुभागी बेहद मेहनती और संस्कारी लड़की है |तुलसी महतो का पुत्र रामू आलसी और कामचोर है | रामू पिता से बटवारा करवा लेता है | सुभागी अपने मां-बाप की जिम्मेदारी लेती है |मां- बाप के मरने के बाद उसके जीवन में क्या बदलाव आता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी के द्वारा लिखी गई कहानी सुभागी भूपेश पांड्या की आवाज में
नीला और मीना नाम की दो युवतियां आपस में किसी बात को लेकर जिरह कर रही है |उनके जिरह का संबंध किस बात से है? उसका क्या निष्कर्ष निकलता है ?जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी जादू सुमन वैद्य जी की आवाज में
अभागिन अमीना अपनी कोठरी में बैठी रो रही है |आज ईद का दिन, उसके घर में दाना नहीं ! आज आबिद होता,तो क्या इस तरह की ईद आती और चली जाती ! इस अंधकार और निराशा में वह डूबी जा रही है ! किसने बुलाया था इस निगोड़ी ईद को ? इस घर में उसका काम नहीं ,लेकिन हामिद ! उसे किसी के मरने जीने के क्या मतलब? उसके अंदर प्रकाश है, | बाहर आशा विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए , हामिद की आनंद- भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी | हामिद के अब्बा और अम्मी का देहावसान हो चुका है |चार -पांच साल का छोटा हामिद, अपनी गरीब बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता है | ईद के अवसर पर वह अपने दोस्तों के साथ ईदगाह जाता है |उसके पास मात्र 3 पैसे होते हैं, लेकिन अपने विवेक और अपनी सूझबूझ से वह उन पैसों को खर्च करता है |कहानी में हामिद के बालपन में ही उसकी विवेकशीलता को बेहतरीन रूप से वर्णित किया गया है |प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह ‘…में , नयनी दीक्षित की बेहतरीन संवेदनशील आवाज में ….
कहानी दो अपरिचित एक महिला यात्री और एक पुरुष यात्री के बीच के वार्तालाप से संबंधित है | बातों ही बातों में जाने- अनजाने में दोनों अपने दिल की व्यथा कह जाते हैं | दोनों की जिंदगी में क्या उलझन है? इसको जानने के लिए सुनते हैं मोहन राकेश जी के द्वारा लिखी कहानी अपरिचित सुमन वैद्य जी की आवाज में
हरसिंगार एक अनाथालय में जीवन बिता रहे एक युवक गोविंद की कहानी है| जिसे एक घटना के पश्चात ये एहसास होता है कि उसके अनाथ जीवन में कभी उसे पूर्णता का एहसास नहीं होगा |ऐसा गोविंद क्यों सोच रहा है? इसको जानते हैं अज्ञेय जी की लिखी कहानी हरसिंगार में सुमन वैद्य जी की आवाज में
महतो टोली के पंचों ने पेट्रोमैक्स खरीदा |जिसे गांव वाले पंचलाइट कहते हैं |गांव वालों और पंचों का उत्साह देखते बनता है| बस समस्या यह है कि पंचलाइट कैसे और कौन जलाएं क्योंकि पंचलाइट जलाना किसी को आता नहीं है |यह समस्या किस प्रकार हल होती है |बेहद हास्यास्पद तरीके से इसका उल्लेख किया गया है फणीश्वरनाथ रेणु जी के द्वारा लिखी कहानी पंचलाइट में ,आवाज दी है सुमन वैद्य जी ने…
हिंदुस्तान- पाकिस्तान बंटवारे में हुए दंगों के समय रफ़ीकुद्दीन और देविन्दरलाल मित्र होते हैं |देविन्दरलाल रफ़ीकुद्दीन के यहां शरण लेता है | देविन्दरलाल को जब यह लगता है कि उसकी वजह से रफ़ीकुद्दीन की जान खतरे में है तो है उसका घर छोड़ देता है और देविन्दरलाल अत्ताउल्लाह के अहाते में शरण लेता है | क्या वास्तव में यह शरणदाता उसके जीवन की रक्षा करता है क्या देविन्दरलाल जी का जीवन वहां वास्तव में सुरक्षित है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं अज्ञेय द्वारा लिखी गई कहानी शरणदाता सुमन वैध्य की आवाज में
जहाँ चील की आँखें अपने लक्ष्य को देख कर वार करती हैं, वहाँ वे अदृश्य चीलें अंधी होती हैं, और अंधाधुंध हमला करती हैं। उन्हें झपट्टा मारते हम देख नहीं पाते और हमें लगने लगता है कि जो कुछ भी हुआ है, उसमें हम स्वयं कहीं दोषी रहे होंगे। नायक की पत्नी शोभा नायक के साथ नहीं रहती है अचानक एक दिन नायक को शोभा एक पार्क में दिखाई देती है| नायक फिर से शोभा से मिलना चाहता है |क्या नायक का शोभा से पुनः मिलन हो पाएगा ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी चीले, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
अतृप्त आत्माओं से भरे एक महल की कथा जिसका एक एक पत्थर जिंदा व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो अपनी महत्वकांक्षाओ के चलते अपने बचपन की सहचरी सुरबाला से विवाह के लिए इंकार कर देता है और जब जीवन के यथार्थ पर उतरकर देखता है तो उसे एहसास होता है कि उसने सिर्फ सुरबाला ही नहीं बल्कि सब कुछ खो दिया।
हरिशंकर परसाई जी का अनुभव ऐसा है कि उन्हें लगता है कि हर कोई किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त है| भाई !सबके अपने-अपने अलग-अलग दुख है, अपने -अपने संघर्ष है| कोई अपनी संपन्नता के कारण दुखी है, कोई अपनी न्यूनतम जीवन भी ना जी पाने के कारण दुखी है |ऐसे में व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जी है किस बीमारी से ग्रसित होना चाहते हैं? आखिर किस लिए ?बेहद व्यंग्यपूर्ण तरीके से लिखी गई कहानी अपनी-अपनी बीमारी, सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में..
कहानी एक वृद्ध खिलौने वाले गंगाधर की है| आज गृहत्याग करने की इच्छा से जाने लगता है |तब उसे गृहस्वामी की छोटी बेटी कनक रोक लेना चाहती है |गंगाधर मासूम कनक को अपनी पूरे जीवन गाथा सुनाता है क्या आज गंगाधर उस मासूम के मोह में आकर अपने गृह त्याग का विचार ध्यान देगा त्याग देगा| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी गृहत्याग , सुमन वैद्य की आवाज में
ल्यूक और जीन दो नाटे कद के सैनिक हैं। दोनों एक दूसरे के अच्छे मित्र भी हैं ।प्रत्येक रविवार दोनों सैन्य निवास से निकलकर अपने एक प्रिय स्थान पर जाकर अपना समय बिताते जहां पर उनकी मुलाकात एक पर्शियन लड़की से होती है जो कि ग्वालिन है| धीरे-धीरे उनकी मुलाकाते बढ़ती है उसके बाद ल्यूक और जीन के जीवन में कुछ बदलाव आते हैं |कहानी में कुछ ऐसी घटना घटती है जो कहानी को एक अलग ही मोड़ दे देती है| उस लड़की से मिलने के बाद आखिर क्या हुआ ल्यूक और जीन के साथ? और अंत में कहानी किस मोड़ पर आकर रुकी इसे जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी दो छोटे सैनिक, नयनी दीक्षित की आवाज में…
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pragati sharma